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Chitrakoot News: बयान से मुकरी पीड़िता व मां, दहेज प्रताड़ना में दो बरी
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= पीड़िता ने अदालत में अभियोजन पक्ष के आरोपों का नहीं किया समर्थन
संवाद न्यूज एजेंसी
चित्रकूट। न्यायिक मजिस्ट्रेट-प्रथम सृष्टि शुक्ला की अदालत ने दहेज प्रताड़ना के मामले में आरोपी पति व दो देवरों को दोषमुक्त कर दिया है। पीड़िता और उसकी मां ने अदालत में अभियोजन पक्ष के आरोपों का समर्थन नहीं किया।
यह मामला महिला थाना, चित्रकूट में वर्ष 2017 में दर्ज किया गया था। तुलसी, जय नारायण और बौरा पर दहेज प्रताड़ना के आरोप थे। आरोप था कि वे पीड़िता से पचास हजार रुपये और एक मोटर साइकिल की मांग कर रहे थे। मांग पूरी न होने पर उसे प्रताड़ित करने और जान से मारने की धमकी देने का भी आरोप था। मामले की विवेचना कर विवेचक ने कोर्ट में इनके खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया था।
सुनवाई के दौरान अदालत में पीड़िता और उसकी मां बयान से बदल गई। पीड़िता ने कहा कि उसके पति और देवरों ने कभी दहेज की मांग नहीं की। उसके साथ मारपीट या गाली-गलौज जैसा कोई कृत्य नहीं हुआ। उसने बताया कि उसकी मां ने गुस्से में आकर प्राथमिकी दर्ज कराई थी। उसने यह भी कहा कि वह अब मुकदमा नहीं लड़ना चाहती। वह सुलह करना चाहती है। पीड़िता की मां सहोद्रा ने भी अपने बयान में कहा कि उसने घटना को स्वयं नहीं देखा था। उसने बेटी के कहने पर पुलिस अधीक्षक को प्रार्थना-पत्र दिया था। बाद में रिश्तेदारों ने समझौता करा दिया था। उसकी बेटी अब ससुराल में खुशी से रह रही है और कोई विवाद नहीं है। अदालत ने बयान व साक्ष्य के आधार पर तीनों आरोपियों को बरी कर दिया।
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संवाद न्यूज एजेंसी
चित्रकूट। न्यायिक मजिस्ट्रेट-प्रथम सृष्टि शुक्ला की अदालत ने दहेज प्रताड़ना के मामले में आरोपी पति व दो देवरों को दोषमुक्त कर दिया है। पीड़िता और उसकी मां ने अदालत में अभियोजन पक्ष के आरोपों का समर्थन नहीं किया।
यह मामला महिला थाना, चित्रकूट में वर्ष 2017 में दर्ज किया गया था। तुलसी, जय नारायण और बौरा पर दहेज प्रताड़ना के आरोप थे। आरोप था कि वे पीड़िता से पचास हजार रुपये और एक मोटर साइकिल की मांग कर रहे थे। मांग पूरी न होने पर उसे प्रताड़ित करने और जान से मारने की धमकी देने का भी आरोप था। मामले की विवेचना कर विवेचक ने कोर्ट में इनके खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया था।
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सुनवाई के दौरान अदालत में पीड़िता और उसकी मां बयान से बदल गई। पीड़िता ने कहा कि उसके पति और देवरों ने कभी दहेज की मांग नहीं की। उसके साथ मारपीट या गाली-गलौज जैसा कोई कृत्य नहीं हुआ। उसने बताया कि उसकी मां ने गुस्से में आकर प्राथमिकी दर्ज कराई थी। उसने यह भी कहा कि वह अब मुकदमा नहीं लड़ना चाहती। वह सुलह करना चाहती है। पीड़िता की मां सहोद्रा ने भी अपने बयान में कहा कि उसने घटना को स्वयं नहीं देखा था। उसने बेटी के कहने पर पुलिस अधीक्षक को प्रार्थना-पत्र दिया था। बाद में रिश्तेदारों ने समझौता करा दिया था। उसकी बेटी अब ससुराल में खुशी से रह रही है और कोई विवाद नहीं है। अदालत ने बयान व साक्ष्य के आधार पर तीनों आरोपियों को बरी कर दिया।
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