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Chitrakoot News: स्काई ग्लास ब्रिज में चढ़ने का पर्यटकों का ख्वाब अधूरा
Sat, 01 Nov 2025 11:59 PM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चित्रकूट
संवाद न्यूज एजेंसी, चित्रकूट
Updated Sat, 01 Nov 2025 11:59 PM IST
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12 सीकेटीपी-15- परिचय- पाठा क्षेत्र में बना स्काई ग्लास ब्रिज । संवाद
चित्रकूट। घनघोर जंगल के बीच प्राकृतिक सौंदर्य को समेटे रानीपुर टाईगर रिजर्व क्षेत्र के मारकुंडी के समीप पर्यटन का प्रमुख स्थान तुलसी जल प्रपात है। यहां पर पर्यटकों को आकर्षित करने को स्काई ग्लास ब्रिज बना है लेकिन अभी तक इसका उद्घाटन नहीं पाया, हालांकि बतौर ट्रायल जरूर किया जा चुका है। ऐसे में पर्यटकों का स्काई ग्लास ब्रिज में चढ़ने का सपना पूरा नहीं हो रहा।
तुलसी जल प्रपात में दो गहरे कुंड बने हैं। यहां पर झरना बहता है। यह प्राकृतिक नजारा देखते ही बनता है। दोनों कुंडों में 50 किमी ऊंचाई से पानी गिरता है। जिस स्थान में यह है, वहां से एमपी सीमा भी चार किमी दूर है। इसे देखते हुए वन विभाग ने यहां पर करीब पौने तीन करोड़ से स्काई ग्लास ब्रिज बनाया। तैयार होने के बाद ट्रायल भी हुआ, लेकिन खामियों के चलते इसे चालू नहीं किया सका, हालांकि यहां पर आने वाले पर्यटक स्काई स्काई ग्लास ब्रिज पर चढ़ने को बेताब हैं। (संवाद)
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बारिश से चतूबरा निर्माण में आईं थीं दरारें
चित्रकूट। पिछले साल बरसात के मौसम में बारिश होने पर जिस स्थान पर स्काई ग्लास ब्रिज बना है। निर्माण स्थल में बनाए गए चबूतरे व जमीन में दरार हो गई थी। इसे लेकर जिला पंचायत सदस्य मीरा भारती ने जांच की मांग की थी। जिस पर डीएम स्तर से गठित टीम ने जांच की थी। गुणवत्ता में कोई कमी नहीं मिली थी। मोती लाल नेहरू इंस्टीट्यूट प्रयागराज की चार सदस्यीय टीम ने भी इसका जायजा लिया था। (संवाद)
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ईकों पर्यटन केंद्र के रूप में उबर रहा
चित्रकूट। क्षेत्रीय पर्यटन अधिकारी आरके रावत ने बताया कि तुलसी जल प्रपात ईको पर्यटन केंद्र के रूप में उबर रहा है। यहां पर बड़ी संख्या में यूपी व एमपी क्षेत्र से पर्यटक आते हैं। इसको देखते हुए यहां का सुंदरीकरण कराने के साथ ही यहां पर स्काई ग्लास ब्रिज बनाया गया है। (संवाद)
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इसी माह रानीपुर स्काई ग्लास ब्रिज के शुभारंभ होने की संभावना है। इसे लेकर प्रयास जारी है। जल्द ही पर्यटक स्काई ग्लास ब्रिज पर चढ़ सकेंगे।
सुशील कुमार, क्षेत्राधिकारी, वन विभाग मानिकपुर
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तुलसी जल प्रपात में दो गहरे कुंड बने हैं। यहां पर झरना बहता है। यह प्राकृतिक नजारा देखते ही बनता है। दोनों कुंडों में 50 किमी ऊंचाई से पानी गिरता है। जिस स्थान में यह है, वहां से एमपी सीमा भी चार किमी दूर है। इसे देखते हुए वन विभाग ने यहां पर करीब पौने तीन करोड़ से स्काई ग्लास ब्रिज बनाया। तैयार होने के बाद ट्रायल भी हुआ, लेकिन खामियों के चलते इसे चालू नहीं किया सका, हालांकि यहां पर आने वाले पर्यटक स्काई स्काई ग्लास ब्रिज पर चढ़ने को बेताब हैं। (संवाद)
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बारिश से चतूबरा निर्माण में आईं थीं दरारें
चित्रकूट। पिछले साल बरसात के मौसम में बारिश होने पर जिस स्थान पर स्काई ग्लास ब्रिज बना है। निर्माण स्थल में बनाए गए चबूतरे व जमीन में दरार हो गई थी। इसे लेकर जिला पंचायत सदस्य मीरा भारती ने जांच की मांग की थी। जिस पर डीएम स्तर से गठित टीम ने जांच की थी। गुणवत्ता में कोई कमी नहीं मिली थी। मोती लाल नेहरू इंस्टीट्यूट प्रयागराज की चार सदस्यीय टीम ने भी इसका जायजा लिया था। (संवाद)
ईकों पर्यटन केंद्र के रूप में उबर रहा
चित्रकूट। क्षेत्रीय पर्यटन अधिकारी आरके रावत ने बताया कि तुलसी जल प्रपात ईको पर्यटन केंद्र के रूप में उबर रहा है। यहां पर बड़ी संख्या में यूपी व एमपी क्षेत्र से पर्यटक आते हैं। इसको देखते हुए यहां का सुंदरीकरण कराने के साथ ही यहां पर स्काई ग्लास ब्रिज बनाया गया है। (संवाद)
इसी माह रानीपुर स्काई ग्लास ब्रिज के शुभारंभ होने की संभावना है। इसे लेकर प्रयास जारी है। जल्द ही पर्यटक स्काई ग्लास ब्रिज पर चढ़ सकेंगे।
सुशील कुमार, क्षेत्राधिकारी, वन विभाग मानिकपुर