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ताजा हुई बिछियन नरसंहार की घटना
ब्यूरो/ अमर उजाला, चित्रकूट।
Updated Sat, 02 Jan 2016 11:32 PM IST
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इस घटना के लगभग छह साल पहले कुख्यात डाकू रागिया
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उर्फ सुंदर पटेल द्वारा ने डाकू बलखड़िया के साथ मिलकर सीमावर्ती मझगवां के
बिछियन गांव में सामूहिक नरसंहार किया था।
इसमें डकैतों ने मुखबिरी के शक नें गौड़ परिवार को उनके घर में ही बंधक बनाकर जिंदा जला दिया था, जिसमें नौ लोग मौके पर जिंदा जल मरे थे। तीन अन्य की इलाज के दौरान मौत हुई थी। कुछ उसी अंदाज में डकैत शिवा पटेल गैंग ने यह वारदात की।
शिवा पटेल गैंग ने चुनाव में चौथ न मिलने पर प्रधान व उनके परिजनों को जिंदा फूंकने का प्रयास किया। समय से पुलिस न पहुंचती तो बिछियन कांड की पुनरावृत्ति हो जाती। 19 मार्च 2009 को सीमावर्ती मझगवां के बिछियन मेें डाकू रागिया गैंग ने बेटा लाल गौड़ के परिवार को बंधक बनाकर जिंदा जला दिया था। बेटालाल व उसकी पुत्री प्रतिभा बाहर होने के कारण बच गए थे।
पुलिस अधीक्षक केके चौधरी ने बताया कि शिवा पटेल गैंग ने इस क्षेत्र में पहली वारदात की है। मध्य प्रदेश की बगदरा घाटी में तीर्थयात्री की हत्या व लूट के मामले में उस पर तीस हजार का इनाम है। उसे जल्द पकड़ा जाएगा। उसका एक साथी कमलेश पटेल पुलिस के हत्थे चढ़ चुका है।
प्रधानपति ने बताया कि चुनाव के पहले व जीतने के बाद से मर्द गैंग उनसे दो लाख रुपये पहुंचाने की धमकी दे रहा था। मर्द कमलेश पटेल की गिरफ्तारी के बाद शिवा पटेल ने भी रुपये की मांग की थी, अन्यथा परिणाम भुगतने की धमकी दी थी। इसके डर से ही वह ज्यादातर गांव में नहीं रहते हैं। उन्होंने भय के कारण इस धमकी के बारे में पुलिस अधीक्षक को नहीं बताया था। बहिलपुरवा थाने में जरूर दो बार जानकारी दी थी।
बहिलपुरवा थाना क्षेत्र का खांच का पुरवा पहले से ही दस्यु प्रभावित रहा है। कुख्यात डकैत बलखडिया का क्षेत्र होने के कारण यहां ज्यादातर कामों में डकैतों की दखलंदाजी रहती है।
इस गांव में पूर्व प्रधान इंद्रराज के दो भाई शत्रुघन व छोटेलाल का परिवार रहता है। पूर्व प्रधान रैपुरवा माफी में परिवार के साथ रहते हैं। इस बार प्रधान पद के चुनाव में रुकमा बुजुर्ग गांव से इंद्रराज ने अपनी पत्नी गोमती को चुनाव लड़ाया। वह बलखड़िया की पत्नी लक्ष्मिनिया को हराकर प्रधान बन गई।
साक्षात मौत को अपने सामने देखने वाले प्रधान के देवर का परिवार इतना भयभीत है कि किसी भी परिचित को देखकर उसके गले लिपटकर बिलखने लगता है।
शुक्रवार रात मौत के मुंह से बाहर निकले प्रधान गोमती देवी के परिजनों के चेहरों से खौफ का साया मिट नहीं रहा है। देवर शत्रुघन की पत्नी कौशल्या व वृद्ध मां देवती ने कहा- ‘भगवाने आए जिव बचाईस हवै।
डाकुन से तो जिव अगाहन है’। रात को जब प्रधान के घर डकैतों ने आग लगाई तो इसकी जानकारी होने पर पड़ोसी रामनारायण व गुड़िया देवी दौड़कर उनके घर पहुंचे। गेट पर असलहे लिए मौजूद डकैतों ने उन्हें धमकी देकर भगा दिया।
वारदात के बाद प्रधान के घर के पास दो पुलिसकर्मी तैनात कर दिए गए हैं। जिला पंचायत सदस्य अनिल प्रधान व कांग्रेस नेता पुष्पेंद्र सिंह पटेल ने बताया कि कुछ माह पहले तक यहां पीएसी कैंप था।
इससे डकैतों का मूवमेंट कम होता था। पीएसी हटते ही डकैतों ने आतंक मचाना शुरू कर दिया है। पुलिस अधीक्षक के के चौधरी ने बताया कि ग्रामीणों की सूचना पर पुलिस टीम को तत्काल मौके पर पहुंचने के निर्देंश दे दिए थे।
डकैतों को शायद यह मालूम नहीं था कि प्रधान गोमती व उसका पति इंद्रराज गांव में नहीं हैं। परिजनों ने बताया कि एक दिन पहले ही दोनों किसी काम से रैपुरवा गांव चले गए थे।
ग्रामीणों ने मौके पर पहुंची पुलिस की कार्यशैली पर भी सवालिया निशान लगाए हैं। कुछ लोगों ने बताया कि जब गांव के अंदर पुलिस टीमें आ गईं तो भी डकैैत प्रधान के आंगन में मौजूद थे। इस बीच पुलिस टीम ने गांव के बाहर फायरिंग शुरू कर दी। फायरिंग की आवाज सुनकर डकैत भाग निकले। पुलिस बिना फायरिंग किए घेराबंदी करती तो शायद डकैत भाग न पाते।
इसमें डकैतों ने मुखबिरी के शक नें गौड़ परिवार को उनके घर में ही बंधक बनाकर जिंदा जला दिया था, जिसमें नौ लोग मौके पर जिंदा जल मरे थे। तीन अन्य की इलाज के दौरान मौत हुई थी। कुछ उसी अंदाज में डकैत शिवा पटेल गैंग ने यह वारदात की।
शिवा पटेल गैंग ने चुनाव में चौथ न मिलने पर प्रधान व उनके परिजनों को जिंदा फूंकने का प्रयास किया। समय से पुलिस न पहुंचती तो बिछियन कांड की पुनरावृत्ति हो जाती। 19 मार्च 2009 को सीमावर्ती मझगवां के बिछियन मेें डाकू रागिया गैंग ने बेटा लाल गौड़ के परिवार को बंधक बनाकर जिंदा जला दिया था। बेटालाल व उसकी पुत्री प्रतिभा बाहर होने के कारण बच गए थे।
पुलिस अधीक्षक केके चौधरी ने बताया कि शिवा पटेल गैंग ने इस क्षेत्र में पहली वारदात की है। मध्य प्रदेश की बगदरा घाटी में तीर्थयात्री की हत्या व लूट के मामले में उस पर तीस हजार का इनाम है। उसे जल्द पकड़ा जाएगा। उसका एक साथी कमलेश पटेल पुलिस के हत्थे चढ़ चुका है।
प्रधानपति ने बताया कि चुनाव के पहले व जीतने के बाद से मर्द गैंग उनसे दो लाख रुपये पहुंचाने की धमकी दे रहा था। मर्द कमलेश पटेल की गिरफ्तारी के बाद शिवा पटेल ने भी रुपये की मांग की थी, अन्यथा परिणाम भुगतने की धमकी दी थी। इसके डर से ही वह ज्यादातर गांव में नहीं रहते हैं। उन्होंने भय के कारण इस धमकी के बारे में पुलिस अधीक्षक को नहीं बताया था। बहिलपुरवा थाने में जरूर दो बार जानकारी दी थी।
बहिलपुरवा थाना क्षेत्र का खांच का पुरवा पहले से ही दस्यु प्रभावित रहा है। कुख्यात डकैत बलखडिया का क्षेत्र होने के कारण यहां ज्यादातर कामों में डकैतों की दखलंदाजी रहती है।
इस गांव में पूर्व प्रधान इंद्रराज के दो भाई शत्रुघन व छोटेलाल का परिवार रहता है। पूर्व प्रधान रैपुरवा माफी में परिवार के साथ रहते हैं। इस बार प्रधान पद के चुनाव में रुकमा बुजुर्ग गांव से इंद्रराज ने अपनी पत्नी गोमती को चुनाव लड़ाया। वह बलखड़िया की पत्नी लक्ष्मिनिया को हराकर प्रधान बन गई।
साक्षात मौत को अपने सामने देखने वाले प्रधान के देवर का परिवार इतना भयभीत है कि किसी भी परिचित को देखकर उसके गले लिपटकर बिलखने लगता है।
शुक्रवार रात मौत के मुंह से बाहर निकले प्रधान गोमती देवी के परिजनों के चेहरों से खौफ का साया मिट नहीं रहा है। देवर शत्रुघन की पत्नी कौशल्या व वृद्ध मां देवती ने कहा- ‘भगवाने आए जिव बचाईस हवै।
डाकुन से तो जिव अगाहन है’। रात को जब प्रधान के घर डकैतों ने आग लगाई तो इसकी जानकारी होने पर पड़ोसी रामनारायण व गुड़िया देवी दौड़कर उनके घर पहुंचे। गेट पर असलहे लिए मौजूद डकैतों ने उन्हें धमकी देकर भगा दिया।
वारदात के बाद प्रधान के घर के पास दो पुलिसकर्मी तैनात कर दिए गए हैं। जिला पंचायत सदस्य अनिल प्रधान व कांग्रेस नेता पुष्पेंद्र सिंह पटेल ने बताया कि कुछ माह पहले तक यहां पीएसी कैंप था।
इससे डकैतों का मूवमेंट कम होता था। पीएसी हटते ही डकैतों ने आतंक मचाना शुरू कर दिया है। पुलिस अधीक्षक के के चौधरी ने बताया कि ग्रामीणों की सूचना पर पुलिस टीम को तत्काल मौके पर पहुंचने के निर्देंश दे दिए थे।
डकैतों को शायद यह मालूम नहीं था कि प्रधान गोमती व उसका पति इंद्रराज गांव में नहीं हैं। परिजनों ने बताया कि एक दिन पहले ही दोनों किसी काम से रैपुरवा गांव चले गए थे।
ग्रामीणों ने मौके पर पहुंची पुलिस की कार्यशैली पर भी सवालिया निशान लगाए हैं। कुछ लोगों ने बताया कि जब गांव के अंदर पुलिस टीमें आ गईं तो भी डकैैत प्रधान के आंगन में मौजूद थे। इस बीच पुलिस टीम ने गांव के बाहर फायरिंग शुरू कर दी। फायरिंग की आवाज सुनकर डकैत भाग निकले। पुलिस बिना फायरिंग किए घेराबंदी करती तो शायद डकैत भाग न पाते।