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...तो फिरौती देकर छूटा शिक्षक
ब्यूरो/अमर उजाला, चित्रकूट
Updated Fri, 08 May 2015 11:42 PM IST
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शिक्षक की जिस तरह से रिहाई हुई, उससे लगता है कि वह
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फिरौती देकर छूटा है। भाई के पास फिरौती के लिए फोन आना, रात होते-होते
शिक्षक का सकुशल छूटकर आना, मानिकपुर में ही भाई से भेंट होना तो कम से कम
इसी तरफ इशारा कर रहे हैं।
सूत्र बताते हैं कि फिरौती का फोन आने के बाद परिजनों और शुभचिंतकों की राय बनी कि सकुशल रिहाई के लिए फिरौती देना ही सबसे सही रास्ता है। बताया जाता है कि पूरे मामले में एक व्यक्ति ने मध्यस्थता की। उसने भरोसा दिलाया कि अगर फिरौती की रकम दे दी जाए तो शिक्षक महफूज रहेगा।
जब बात तय हो गई तो रकम देने का स्थान तय हुआ। बताया जाता है कि लेनदेन रानीपुर गिदुरहा के जंगल में हुआ। डकैतों ने फूंक-फूंक कर कदम रखा। सूत्र बताते हैं कि जिस सिम से फिरौती की मांग का फोन आया था, उसके सर्विलांस में लगने की संभावना के मद्देनजर फिरौती के लेनदेन की बात दूसरे सिम से हुई।
घरवाले हर हाल में मतगंजन को सकुशल छुड़ाना चाहते थे, और इसमें सफल भी रहे। पुत्र की सकुशल रिहाई का संतोष पिता कुंदन लाल के चेहरे पर साफ दिख रहा था।
अपहृत शिक्षक मतगंजन प्रसाद गुरुवार की रात सकुशल घर लौट आया। इससे परिजनों और साथियों में खुशी का माहौल है। शिक्षक का कहना है कि पुलिस के बढ़ते दबाव और साथियों की दुआओं की वजह से वह सकुशल है।
शिक्षक और उसके पिता के बयानों में अंतर है। पिता ने बताया कि वे पुत्र की तलाश में बुधवार को मानिकपुर बस स्टैंड के पास बैठे थे, वहीं उनका पुत्र मिल गया।
बताया कि उनका बेटा किसी तरह बदमाशों को चकमा देकर लौटा है। उधर, मतगंजन का कहना है कि बदमाशों ने उससे कहा कि एक घंटे के अंदर जितनी दूर जा सकते हो भाग जाओ, और वह भागा। रास्ते में उसको भाई सतेंद्र मिल गया, उसके साथ वह घर आया।
शिक्षकों में यह भी चर्चा है कि जिस गांव में शिक्षक तैनात है, वहां कोई ऐसा व्यक्ति है, जिसको यह मालूम था कि एकल कक्ष निर्माण के लिए लगभग साढ़े तीन लाख रुपये आए हैं।
वारदात के पटाक्षेप से भी यह बात साबित हो गई कि अपहरण फिरौती वसूलने के लिए किया गया था। बदमाशों को यह भी मालूम था कि शिक्षक की रिहाई के लिए परिजन किसी तरह का खतरा मोल लेने की बजाय उनकी मांग पूरी कर देंगे।
सूत्र बताते हैं कि फिरौती का फोन आने के बाद परिजनों और शुभचिंतकों की राय बनी कि सकुशल रिहाई के लिए फिरौती देना ही सबसे सही रास्ता है। बताया जाता है कि पूरे मामले में एक व्यक्ति ने मध्यस्थता की। उसने भरोसा दिलाया कि अगर फिरौती की रकम दे दी जाए तो शिक्षक महफूज रहेगा।
जब बात तय हो गई तो रकम देने का स्थान तय हुआ। बताया जाता है कि लेनदेन रानीपुर गिदुरहा के जंगल में हुआ। डकैतों ने फूंक-फूंक कर कदम रखा। सूत्र बताते हैं कि जिस सिम से फिरौती की मांग का फोन आया था, उसके सर्विलांस में लगने की संभावना के मद्देनजर फिरौती के लेनदेन की बात दूसरे सिम से हुई।
घरवाले हर हाल में मतगंजन को सकुशल छुड़ाना चाहते थे, और इसमें सफल भी रहे। पुत्र की सकुशल रिहाई का संतोष पिता कुंदन लाल के चेहरे पर साफ दिख रहा था।
अपहृत शिक्षक मतगंजन प्रसाद गुरुवार की रात सकुशल घर लौट आया। इससे परिजनों और साथियों में खुशी का माहौल है। शिक्षक का कहना है कि पुलिस के बढ़ते दबाव और साथियों की दुआओं की वजह से वह सकुशल है।
शिक्षक और उसके पिता के बयानों में अंतर है। पिता ने बताया कि वे पुत्र की तलाश में बुधवार को मानिकपुर बस स्टैंड के पास बैठे थे, वहीं उनका पुत्र मिल गया।
बताया कि उनका बेटा किसी तरह बदमाशों को चकमा देकर लौटा है। उधर, मतगंजन का कहना है कि बदमाशों ने उससे कहा कि एक घंटे के अंदर जितनी दूर जा सकते हो भाग जाओ, और वह भागा। रास्ते में उसको भाई सतेंद्र मिल गया, उसके साथ वह घर आया।
शिक्षकों में यह भी चर्चा है कि जिस गांव में शिक्षक तैनात है, वहां कोई ऐसा व्यक्ति है, जिसको यह मालूम था कि एकल कक्ष निर्माण के लिए लगभग साढ़े तीन लाख रुपये आए हैं।
वारदात के पटाक्षेप से भी यह बात साबित हो गई कि अपहरण फिरौती वसूलने के लिए किया गया था। बदमाशों को यह भी मालूम था कि शिक्षक की रिहाई के लिए परिजन किसी तरह का खतरा मोल लेने की बजाय उनकी मांग पूरी कर देंगे।