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मुखबरी के शक पर तीनों को गोली से उड़ाया था
chitrakoot
Updated Wed, 09 Aug 2017 11:08 PM IST
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- फोटो : demo
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चित्रकूट। पुलिस रिमांड पर आए एक लाख पंाच हजार के इनामा डाकू गोप्पा ने रिमांड खत्म होने के कुछ देर पहले माना कि पहाड़ी के पास लूटी रायफल लेने आए तीन युवकों को पुलिस मुखबरी के शक पर गोली से उड़ाया था। इसके अलावा कर्का गांव में बोरिंग मशीन वाले दो युवकों के अपहरण में फिरौती वसूली थी।
पुलिस रिमांड पर जेल से बाहर आए डाकू गोप्पा ने मंगलवार की देर शाम को बताया कि तिहरा हत्याकांड करने का उसका कोई इरादा नहीं था बल्कि रायफल लौटाकर रुपये लेना मकसद था। पहाड़ी के पास मई 2016 में लूटी रायफल लौटाने का सौदा सत्तर हजार में तय था। जिसे लेकर तीन लोग पहुंचे थे। वह दरसेंडा के ही एक जनप्रतिनिधि के चार पहिया वाहन से तीनों के पास पहुंचा था। काफी देर तक बातचीत के दौरान तीनों की बातोें से पुलिस मुखबरी का शक हुआ। इसी शक पर गोलियोें से उड़ा दिया था।
रिमंाड के बाद घटनास्थल लेकर गए रैपुरा थानाध्यक्ष अंगद प्रताप सिंह ने बताया कि डाकू ने कर्का पड़रिया में दो युवकों के अपहरण के दौरान पुलिस मुठभेड़ के बारे में बताया कि यदि बारिश न होती तो शायद उस दिन कई लोगों की मौत हो जाती। उसने रिहाई के बदले फिरौती वसूली थी। डाकू गोप्पा ने बताया कि इधर कई महीने से पुलिस का दबाव बढ़ रहा था। वह ज्यादातर समय मोहलिया के जंगल में ही रहता था। उसने गैंग और मददगारों के बारे में ज्यादा कुछ नहीं बताया।
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पुलिस रिमांड पर जेल से बाहर आए डाकू गोप्पा ने मंगलवार की देर शाम को बताया कि तिहरा हत्याकांड करने का उसका कोई इरादा नहीं था बल्कि रायफल लौटाकर रुपये लेना मकसद था। पहाड़ी के पास मई 2016 में लूटी रायफल लौटाने का सौदा सत्तर हजार में तय था। जिसे लेकर तीन लोग पहुंचे थे। वह दरसेंडा के ही एक जनप्रतिनिधि के चार पहिया वाहन से तीनों के पास पहुंचा था। काफी देर तक बातचीत के दौरान तीनों की बातोें से पुलिस मुखबरी का शक हुआ। इसी शक पर गोलियोें से उड़ा दिया था।
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रिमंाड के बाद घटनास्थल लेकर गए रैपुरा थानाध्यक्ष अंगद प्रताप सिंह ने बताया कि डाकू ने कर्का पड़रिया में दो युवकों के अपहरण के दौरान पुलिस मुठभेड़ के बारे में बताया कि यदि बारिश न होती तो शायद उस दिन कई लोगों की मौत हो जाती। उसने रिहाई के बदले फिरौती वसूली थी। डाकू गोप्पा ने बताया कि इधर कई महीने से पुलिस का दबाव बढ़ रहा था। वह ज्यादातर समय मोहलिया के जंगल में ही रहता था। उसने गैंग और मददगारों के बारे में ज्यादा कुछ नहीं बताया।
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