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वो दर्दनाक मंजर जिसे देख हर आंख रोई
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मऊ (चित्रकूट)। बाइसा तालाब पर बालिकाओं के शव देख हर आंख रो पड़ी। बालिकाओं के शव को गोद में रखकर उनके परिजन बिलख रहे थे तब इस दर्दनाक मंजर को तो कई लोग देख नहीं सके और आंसू पोंछते हुए पीछे हट गये। किसी ने सोचा भी नहीं था कि इन चारों को वह सब प्रतिदिन एक साथ गांव में घूमते खेलते और स्कूल जाते देखते थे वह सब एक साथ ही दुनिया से रूखसत हो जाएंगी। अकेली बची इनकी सहेली गौरी के चेहरे पर तो ऐसा खौफ है कि वह अपने मां पिता के अलावा किसी से बोल भी नहीं पा रही है। कभी वह चारों सहेलियों को देखती है और कभी वहां के मंजर को।
मृतक बुधरानी, पार्वती, सविता व किरन के परिजन खेती किसानी ही कर परिवार का भरण पोषण करते हैं। रामप्रकाश निषाद की बहन ममता की शादी महेवा घाट कौशांबी में हुई है। उसका पति जोशकुमार अपने दो बेटों के साथ सूरत में रहकर मजदूरी करता है। जिससे उसकी दोनों बेटी किरन व काजल ननिहाल बौसडा में रामप्रकाश के घर रहकर पढ़ाई करती थीं। पार्वती व बुधरानी सगी बहन थीं और तीनों की आपस में खूब पटती थी। सविता व गौरी भी इनकी सहेली थी। जो साथ ही भैंस चराने व स्कूल भी जाती थीं। इनकी मासूमियत व शरारतों के बारे में बताकर ग्रामीण रोने लगे। सविता दो भाई तीन बहनों में तीसरे नंबर की थी। पार्वती व बुधरानी छह बहन व दो भाइयों में चौथे व पांचवे नंबर की थीं। किरन दो भाई दो बहन में तीसरे नंबर की थी।
(संवाद)
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मृतक बुधरानी, पार्वती, सविता व किरन के परिजन खेती किसानी ही कर परिवार का भरण पोषण करते हैं। रामप्रकाश निषाद की बहन ममता की शादी महेवा घाट कौशांबी में हुई है। उसका पति जोशकुमार अपने दो बेटों के साथ सूरत में रहकर मजदूरी करता है। जिससे उसकी दोनों बेटी किरन व काजल ननिहाल बौसडा में रामप्रकाश के घर रहकर पढ़ाई करती थीं। पार्वती व बुधरानी सगी बहन थीं और तीनों की आपस में खूब पटती थी। सविता व गौरी भी इनकी सहेली थी। जो साथ ही भैंस चराने व स्कूल भी जाती थीं। इनकी मासूमियत व शरारतों के बारे में बताकर ग्रामीण रोने लगे। सविता दो भाई तीन बहनों में तीसरे नंबर की थी। पार्वती व बुधरानी छह बहन व दो भाइयों में चौथे व पांचवे नंबर की थीं। किरन दो भाई दो बहन में तीसरे नंबर की थी।
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(संवाद)