फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Chitrakoot News ›   swayam sahayata samuh

प्रवासी मजदूर पाएंगे स्वयं सहायता समूह से प्रशिक्षण

Fri, 29 May 2020 11:09 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Fri, 29 May 2020 11:09 PM IST
विज्ञापन
swayam sahayata samuh
चित्रकूट। दीनदयाल अंत्योदय योजना राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत रोजगार को बढ़ावा देने के लिए जिले में बनाए गए स्वयं सहायता समूह आने वाले प्रवासी श्रमिको को रोजगार से जोड़ने का कार्य करेंगे। इसके प्रयास भी शुरु हो गए हैं। खासकर महिला श्रमिकों को रोजगार दिलाने में यह मददगार बनेगें।
विज्ञापन

जिले में महिलाओं के बनाए गए स्वयं सहायता समूह शहर से लेकर गांव-गांव में गठित है। जो कई तरह के कार्य कर रहे है। लकड़ी के खिलौने बनाना, कपड़े की सिलाई करना, आटा चक्की लगाने व फल की दुकानें लगाने सहित अगरबत्ती बनाने का कार्य करती है। समूहों की महिलाओं द्वारा सौंन्दर्य प्रसाधन की दुकानें भी लगाती है। मेलों के दौरान लगभग 15 से 20 दुकानें पूजन सामग्री की लगाती हैं।
विज्ञापन

चित्रकूट। जिले में 100 से अधिक स्वयं सहायता समूह हैं। इसमेें पहाड़ी विकास खंड के अंतर्गत बनाए गए समूहों में जय श्रीराम, पालेश्वरनाथ, मानिकपुर विकास खंड में आदिवासी इलाके में बने समूहों में जय महालक्ष्मी, भैरम बाबा, लक्ष्मी, ज्योति। सदर विकास खंड के अंतर्गत बनाए गए समूहों में शारदा, गंगा, शिव, लक्ष्मीनारायण आदि समूह है।
विज्ञापन
विज्ञापन

चित्रकूट। अमावस्या व दीवाली मेला में लगभग 20 स्वयं सहायता समूह सामग्री बेचते है। जिसमें कई ऐसे समूह है जो अपने हाथों से बनाई गई वस्तु बेचते हैं। जिसमें ओम शांती, जय श्रीलक्ष्मी जय माता, उजाला आदि समूह बनाए गए हैं। जिसमेें सीतापुर ग्रमाीण की सीता व रानी देवी लकड़ी के खिलौने बनाने, तौरा गांव की नीतू, अशोह की राधा, सुरेसन की राधा, खोही की अरविंद पूजा पाठ सहित दोना पत्ता तैयार कर बेचने का कार्य कर रही है।

चित्रकूट। जिला विकास अधिकारी आर के त्रिपाठी ने बताया कि जिलें में बने स्वयं सहायता समूह बाहर से आने वाले प्रवासी मजदूरों के लिए रोजगार उपलब्ध कराने में सहायक साबित होगा। इस योजना का प्रमुख उद्देश्य सभी को रोजगार उपलब्ध कराना है। ताकि उनकी अजीविका चल सके। आने वाले प्रवासी मजदूरों को परंपरागत आय के स्रोतों से कृषि, फल, सब्जी, खेती, मुर्गी पालन, बकरी, पालन लकड़ी के खिलौने बनाने सहित कैंटीन का प्रशिक्षण देंगी।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed