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Chitrakoot News: बाढ़ ने छीना घर, एक हजार लोगों को मदद की आस

Mon, 07 Sep 2026 11:12 PM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, चित्रकूट
संवाद न्यूज एजेंसी, चित्रकूट Updated Mon, 07 Sep 2026 11:12 PM IST
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Floods ripped away homes, leaving 1,000 people hoping for help
07 सीकेटीपी-10-अपने गिरे मकान में बैठी उर्मिला। संवाद - फोटो : File photo
चित्रकूट। जिला मुख्यालय से जुड़े व मंदाकिनी नदी के किनारे बसे बहादुर गांव में बाढ़ का पानी उतर चुका है।
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बाढ़ ने लोगों के घर छीन लिए लेकिन ग्रामीणों की मुश्किलें कम नहीं हुई हैं। करीब एक हजार की आबादी वाले इस गांव में कई परिवार अब भी राहत सामग्री व मुआवजे की आस लगाए बैठे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि कुछ घरों में राहत सामग्री पहुंची जबकि जरूरतमंद कई परिवार इससे वंचित रह गए।
बाढ़ में कई मकान क्षतिग्रस्त हुए और कुछ पूरी तरह गिर गए। कुछ परिवारों को आवास योजना का लाभ मिलने की बात कही जा रही है, लेकिन कई परिवार अब भी मदद के इंतजार में हैं। ग्रामीण सुरेश, मुन्नू लाल व श्याम बिहारी ने बताया कि बहादुर गांव में बड़ी संख्या में केवट परिवार रहते हैं।
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बाढ़ के दौरान ग्रामीणों ने अपनी जान जोखिम में डालकर कई लोगों की जान बचाई लेकिन जब बाढ़ का पानी गांव में पहुंचा और खुद उनकी जान पर बन आई तो मदद के लिए कोई नजर नहीं आया। बाढ़ में कई घर गिर गए। पशुओं के लिए रखा भूसा और चारा पानी में खराब हो गया। घरों में राशन और बच्चों के लिए दूध तक नहीं बचा है।
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राहत सामग्री मिली भी तो इतनी नहीं कि उससे परिवार और पशुओं की जरूरत पूरी हो सके। घर गिरने के कारण कई परिवार दूसरों के घरों में शरण लेकर रहने को मजबूर हैं। ऐसे में उनके सामने खाने-पीने के साथ रहने की भी समस्या खड़ी हो गई है।
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बोलीं महिलाएं-पुराने कमरे में रहने की मजबूरी
बाढ़ में उनके मकान का एक हिस्सा पूरी तरह गिर गया। अब परिवार के पास रहने के लिए पुराने समय में बना सिर्फ एक कमरा बचा है। मकान गिरने के बाद भी उन्हें आवास योजना का लाभ नहीं मिला है। -रामदुलारी।

बाढ़ ने सबकुछ तबाह कर दिया। घर भी गिर गया। अब वह बच्चों के साथ दूसरे के घर में रहने को मजबूर हैं। अभी तक सरकारी स्तर पर कोई लाभ नहीं मिला। जो थोड़ा बहुत सामान बचा है, उसी के सहारे पेट पाल रहे हैं।-उर्मिला।

मकान गिरने के बाद घर का पूरा सामान मलबे में दबा हुआ है। पशुओं के लिए रखा भूसा भी पानी में खराब हो गया। दूसरे के घर में शरण लेकर जीवन गुजारना पड़ रहा है। परिवार के सामने अब घर और रोजी-रोटी दोनों का संकट है।- फूलन ।
राहत वितरण को लेकर सवाल उठाए। गांव में जिन लोगों को जरूरत नहीं थी, उन्हें भी किट मिल गई जबकि जरूरतमंद परिवारों को कोई लाभ नहीं मिला। मजबूरी में परिवार किसी तरह जीवन गुजार रहा है। -बच्ची देवी।
वर्जन
लगातार सर्वे के माध्यम से बाढ़ में गिरे और क्षतिग्रस्त मकानों को चिह्नित किया जा रहा है। पात्र लोगों को नियमानुसार मुआवजा दिया गया है। राहत सामग्री का वितरण भी लगातार कराया जा रहा है। बाढ़ प्रभावित लोगों तक सहायता पहुंचाने के लिए प्रशासन की ओर से लगातार कार्रवाई की जा रही है।

- पुलकित गर्ग, जिलाधिकारी।

07 सीकेटीपी-10-अपने गिरे मकान में बैठी उर्मिला। संवाद

07 सीकेटीपी-10-अपने गिरे मकान में बैठी उर्मिला। संवाद- फोटो : File photo

07 सीकेटीपी-10-अपने गिरे मकान में बैठी उर्मिला। संवाद

07 सीकेटीपी-10-अपने गिरे मकान में बैठी उर्मिला। संवाद- फोटो : File photo

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