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कौशल शिक्षा की चुनौतियों पर शिक्षाविदों का चिंतन
ब्यूरो/ अमर उजाला, चित्रकूट
Updated Sun, 15 Feb 2015 11:03 PM IST
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महात्मा गांधी चित्रकूट ग्रामोदय विश्वविद्यालय में
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रोजगार के लिए कौशल विकास विषयक राष्ट्रीय सेमिनार में विवि में कौशल
शिक्षा की चुनौतियों पर गहन चिंतन किया गया।
देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों के वर्तमान एवं पूर्व कुलपतियों के साथ केंद्रीय मानव संसाधन राज्य मंत्री प्रो. रामशंकर कठेरिया ने कौशल शिक्षा में औद्योगिक प्रतिष्ठानों की भूमिका पर चर्चा की।
इस मौके पर प्रो. कठेरिया ने कौशल विकास की योजनाओं को पूरे देश में लागू किए जाने की आवश्यकता बताई। उनके वक्तव्य को आगे बढ़ाते हुए महात्मा गांधी चित्रकूट ग्रामोदय विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. नरेश चंद्र गौतम ने कहा कि विश्वविद्यालय स्थापना काल से ही कौशल शिक्षा के प्रति गंभीर रहा है।
वर्तमान में यूजीसी के सहयोग से विश्वविद्यालय में व्यावसायिक स्नातक (बी बोक) समेत अनेक व्यावसायिक डिप्लोमा पाठ्यक्रम चल रहे हैं। उन्होंने कहा कि सामुदायिक महाविद्यालय योजना के तहत कौशल शिक्षा एवं मूल्यांकन का कार्य पूरे प्रदेश में बड़े पैमाने पर संचालित किया जा रहा है।
विवि के पूर्व कुलपति टी करुणाकरन ने कौशल शिक्षा के लाभ बताते हुए डिजिटल लिटरेसी की दिशा में कार्य करने की सलाह दी। पूर्व कुलपति प्रो. ज्ञानेंद्र सिंह ने रोजगार में कौशल शिक्षा को सभी उच्च शिक्षण संस्थानों में लागू करने की पैरवी की।
पूर्व कुलपति एवं नेहरू ग्राम भारती विश्वविद्यालय इलाहाबाद के कुलपति प्रो. कृष्ण बिहारी पांडेय ने कहा कि चित्रकूट क्षेत्र में प्रचुर मात्रा में औषधीय पौधे मौजूद हैं। इनके प्रसंस्करण से उपयोगी एवं स्वास्थ्य वर्धक उत्पाद बनाए जा सकते हैं । जिनकी खपत पूरे भारत में है।
इसके लिए इस क्षेत्र में इस विषय पर कौशल शिक्षा देने की जरूरत है। रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय, जबलपुर के कुलपति प्रो. केएनएस यादव ने कौशल शिक्षा की विशिष्टता एवं उपयोगिता पर चर्चा की। आईटीएम यूनिवर्सिटी, ग्वालियर के कुलपति प्रो. योगेश उपाध्याय ने आईटीएम यूनिवर्सिटी के अनुभवों को साझा करते हुए कौशल शिक्षा को प्रभावी ढंग से सभी विश्वविद्यालयों में लागू करने की सलाह दी।
वर्धमान महावीर राज्य मुक्त विश्वविद्यालय , कोटा के कुलपति प्रो. विनय पाठक ने कौशल विकास के लिए विशिष्ट कार्ययोजना पर प्रकाश डाला। एकेएस यूनिवर्सिटी, सतना के अध्यक्ष अनंत कुमार सोनी ने उनके विश्वविद्यालय में संचालित कौशल विकास गतिविधियों पर चर्चा की।
सतना सीमेंट, बिड़ला फाउंडेशन के उपाध्यक्ष आरके बख्शी ने कहा कि कौशल विकास के क्षेत्र में उद्योग जगत अपना योगदान देने को तैयार है। इसके लिए विश्वविद्यालयों को अपनी शिक्षा प्रणाली में बदलाव लाने होगें तथा उद्योग जगत का शिक्षण एवं प्रशिक्षण में स्थान सुनिश्चित करना होगा। इसके साथ ही पाठ्यक्रमों में उपयुक्त बदलाव दिलाते हुए उद्योगों में इन्टर्नशिप को अनिवार्य रूप से स्थान देना होगा।
देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों के वर्तमान एवं पूर्व कुलपतियों के साथ केंद्रीय मानव संसाधन राज्य मंत्री प्रो. रामशंकर कठेरिया ने कौशल शिक्षा में औद्योगिक प्रतिष्ठानों की भूमिका पर चर्चा की।
इस मौके पर प्रो. कठेरिया ने कौशल विकास की योजनाओं को पूरे देश में लागू किए जाने की आवश्यकता बताई। उनके वक्तव्य को आगे बढ़ाते हुए महात्मा गांधी चित्रकूट ग्रामोदय विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. नरेश चंद्र गौतम ने कहा कि विश्वविद्यालय स्थापना काल से ही कौशल शिक्षा के प्रति गंभीर रहा है।
वर्तमान में यूजीसी के सहयोग से विश्वविद्यालय में व्यावसायिक स्नातक (बी बोक) समेत अनेक व्यावसायिक डिप्लोमा पाठ्यक्रम चल रहे हैं। उन्होंने कहा कि सामुदायिक महाविद्यालय योजना के तहत कौशल शिक्षा एवं मूल्यांकन का कार्य पूरे प्रदेश में बड़े पैमाने पर संचालित किया जा रहा है।
विवि के पूर्व कुलपति टी करुणाकरन ने कौशल शिक्षा के लाभ बताते हुए डिजिटल लिटरेसी की दिशा में कार्य करने की सलाह दी। पूर्व कुलपति प्रो. ज्ञानेंद्र सिंह ने रोजगार में कौशल शिक्षा को सभी उच्च शिक्षण संस्थानों में लागू करने की पैरवी की।
पूर्व कुलपति एवं नेहरू ग्राम भारती विश्वविद्यालय इलाहाबाद के कुलपति प्रो. कृष्ण बिहारी पांडेय ने कहा कि चित्रकूट क्षेत्र में प्रचुर मात्रा में औषधीय पौधे मौजूद हैं। इनके प्रसंस्करण से उपयोगी एवं स्वास्थ्य वर्धक उत्पाद बनाए जा सकते हैं । जिनकी खपत पूरे भारत में है।
इसके लिए इस क्षेत्र में इस विषय पर कौशल शिक्षा देने की जरूरत है। रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय, जबलपुर के कुलपति प्रो. केएनएस यादव ने कौशल शिक्षा की विशिष्टता एवं उपयोगिता पर चर्चा की। आईटीएम यूनिवर्सिटी, ग्वालियर के कुलपति प्रो. योगेश उपाध्याय ने आईटीएम यूनिवर्सिटी के अनुभवों को साझा करते हुए कौशल शिक्षा को प्रभावी ढंग से सभी विश्वविद्यालयों में लागू करने की सलाह दी।
वर्धमान महावीर राज्य मुक्त विश्वविद्यालय , कोटा के कुलपति प्रो. विनय पाठक ने कौशल विकास के लिए विशिष्ट कार्ययोजना पर प्रकाश डाला। एकेएस यूनिवर्सिटी, सतना के अध्यक्ष अनंत कुमार सोनी ने उनके विश्वविद्यालय में संचालित कौशल विकास गतिविधियों पर चर्चा की।
सतना सीमेंट, बिड़ला फाउंडेशन के उपाध्यक्ष आरके बख्शी ने कहा कि कौशल विकास के क्षेत्र में उद्योग जगत अपना योगदान देने को तैयार है। इसके लिए विश्वविद्यालयों को अपनी शिक्षा प्रणाली में बदलाव लाने होगें तथा उद्योग जगत का शिक्षण एवं प्रशिक्षण में स्थान सुनिश्चित करना होगा। इसके साथ ही पाठ्यक्रमों में उपयुक्त बदलाव दिलाते हुए उद्योगों में इन्टर्नशिप को अनिवार्य रूप से स्थान देना होगा।