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श्रीराम से प्रेरणा लेकर माता पिता की करें सेवा
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धर्मनगरी में मंदाकिनी की आरती करते श्रीराम कथा वक्ता मुरलीधर महराज। संवाद
- फोटो : CHITRAKOOT
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चित्रकूट। मानस वक्ता मुरलीधर महाराज ने अयोध्या कांड में वर्णित भगवान राम के वन गमन व केवट प्रसंग का मार्मिक वर्णन किया। जब उन्होंने रामभक्ति पर आधारित भजन सुनाए तो भक्त नाचने लगे। उन्होंने कहा कि माता पिता की सेवा व उनकी आज्ञा मानने वाले श्रीराम से मानव जगत को प्रेरणा लेनी चाहिए।
रामायण मेला परिसर में महाजन मनिहार परिवार की यजमानी में चल रही श्रीराम कथा में शुक्रवार को मानस वक्ता ने कहा कि वर्तमान में जिनके भी माता-पिता जीवित हैं, वह सबसे भाग्यशाली इंसान हैं। माता-पिता की जो सेवा करता है वह इस संसार रूपी सागर से पार उतर जाता है और जो इनकी आत्मा को दुखाता है, वह इस संसार रूपी सागर में डूब जाता है।
कहा कि दासी मंथरा के भड़काने से कैकई ने राजा दशरथ से राम के वन गमन का आदेश तो दिलवा दिया और पिता की आज्ञा पाकर भगवान राम अयोध्या से सशरीर वन को चले गए पर अयोध्या के लोगों के हृदय में राम हमेशा विराजित रहे तथा वो लोग भगवान श्रीराम की प्रतीक्षा में संन्यासियों सा जीवन व्यतीत करने लगे। इस दौरान भागवताचार्य सिद्धार्थ पयासी, चंद्रकला, रमेश चंद्र मनिहार, विजय महाजन, नीलम महाजन, गोयल, विष्णु गोयल, डा.चंदा शर्मा सहित अनेक साधु-संत व श्रद्धालु मौजूद रहे।
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मंदाकिनी की पवित्रता बनाए रखना जरूरी
चित्रकूट। मानस कथा वक्ता मुरलीधर महराज रामघाट पहुंचे और साधु-संतों से मिलकर आशीर्वाद लिया। फिर मंदाकिनी नदी के जल का अर्पण कर पूजन किया और आरती में शामिल हुए। इस दौरान मंदाकिनी के घाट को सुंदर दीपमाला से सजाया गया। हजारों की संख्या में टिमटिमाते दीपक दीपावली के त्योहार से प्रतीत हो रहे थे। उन्होंने मंदाकिनी नदी से प्रदूषण को हटाने के लिए चल रहा काम जारी रखने को कहा है, जिससे मंदाकिनी की पवित्रता बनी रहे।
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रामायण मेला परिसर में महाजन मनिहार परिवार की यजमानी में चल रही श्रीराम कथा में शुक्रवार को मानस वक्ता ने कहा कि वर्तमान में जिनके भी माता-पिता जीवित हैं, वह सबसे भाग्यशाली इंसान हैं। माता-पिता की जो सेवा करता है वह इस संसार रूपी सागर से पार उतर जाता है और जो इनकी आत्मा को दुखाता है, वह इस संसार रूपी सागर में डूब जाता है।
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कहा कि दासी मंथरा के भड़काने से कैकई ने राजा दशरथ से राम के वन गमन का आदेश तो दिलवा दिया और पिता की आज्ञा पाकर भगवान राम अयोध्या से सशरीर वन को चले गए पर अयोध्या के लोगों के हृदय में राम हमेशा विराजित रहे तथा वो लोग भगवान श्रीराम की प्रतीक्षा में संन्यासियों सा जीवन व्यतीत करने लगे। इस दौरान भागवताचार्य सिद्धार्थ पयासी, चंद्रकला, रमेश चंद्र मनिहार, विजय महाजन, नीलम महाजन, गोयल, विष्णु गोयल, डा.चंदा शर्मा सहित अनेक साधु-संत व श्रद्धालु मौजूद रहे।
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मंदाकिनी की पवित्रता बनाए रखना जरूरी
चित्रकूट। मानस कथा वक्ता मुरलीधर महराज रामघाट पहुंचे और साधु-संतों से मिलकर आशीर्वाद लिया। फिर मंदाकिनी नदी के जल का अर्पण कर पूजन किया और आरती में शामिल हुए। इस दौरान मंदाकिनी के घाट को सुंदर दीपमाला से सजाया गया। हजारों की संख्या में टिमटिमाते दीपक दीपावली के त्योहार से प्रतीत हो रहे थे। उन्होंने मंदाकिनी नदी से प्रदूषण को हटाने के लिए चल रहा काम जारी रखने को कहा है, जिससे मंदाकिनी की पवित्रता बनी रहे।

धर्मनगरी में चल रही श्रीराम कथा श्रवण के दौरान पंडाल में भक्तिभाव से झूमते नाचते भक्तगण। संवाद- फोटो : CHITRAKOOT