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अध्यात्म, विज्ञान और विश्वास पर संत, महंतो का सम्मेलन
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चित्रकूट। धर्मनगरी में शुक्रवार को मानवसेवा के अग्रदूत संत रणछोड़दास महाराज के शिष्य महामंडलेश्वर स्वामी हरिचरणदास महाराज का जन्म शताब्दी महोत्सव मनाया गया। इसमें कई स्थानों के संत महंत व साधु शामिल हुए। कथा वाचक संत मोरारी बापू ने चित्रकूट के सभी साधु-संतों का अभिवादन भी किया।
जानकीकुंड के रघुबीर मंदिर बड़ी गुफा में आयोजित संत सम्मेलन का शुभारंभ भजन गायक पवन तिवारी के गोस्वामी तुलसीदास के पदों के गायन के साथ हुआ। सद़गुरु सेवा संघ के ट्रस्टी डा. बीके जैन व डा. इलेश जैन ने मंचासीन महात्माओं के साथ गुरुपूजन, दीप प्रज्ज्वलन किया।
संतों को माल्यार्पण कर आशीर्वाद लिया। सम्मेलन में वक्ताओं का विषय अध्यात्म, विज्ञान और विश्वास पर संत, महंतो ने अपने विचार प्रकट किए। संत मोरारी बापू ने कहा कि समाज की उन्नति के लिए ऐसे सम्मेलनों का आयोजन सार्थक पहल है। इस ट्रस्ट में कई सेवाकार्य संचालित हो रहे हैं, जिसमें लाखों लोग लाभान्वित हो रहे हैं। ट्रस्ट द्वारा संतों की सेवा का प्रकल्प अध्यात्म का प्रतीक है।
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इस मौके पर स्वामी रामेश्वरदास ऋषिकेश, राघवाचार्य वेदांती रैवासापीठ, राजगुरु बद्री प्रपन्नाचार्य आचार्य आश्रम, सनकादिक ब्रम्हचारी, रामजीदास संतोषी अखाड़ा, आचार्य रामचन्द्रदास तुलसीपीठ, राम हृदयदास महाराज रामायणी कुटी, मदनदास महाराज कामदगिरि पीठ, दीनबंधुदास मलूक पीठ वृंदावन, नितिन भाई रायचूरा राजकोट मौजूद रहे।
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जानकीकुंड के रघुबीर मंदिर बड़ी गुफा में आयोजित संत सम्मेलन का शुभारंभ भजन गायक पवन तिवारी के गोस्वामी तुलसीदास के पदों के गायन के साथ हुआ। सद़गुरु सेवा संघ के ट्रस्टी डा. बीके जैन व डा. इलेश जैन ने मंचासीन महात्माओं के साथ गुरुपूजन, दीप प्रज्ज्वलन किया।
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संतों को माल्यार्पण कर आशीर्वाद लिया। सम्मेलन में वक्ताओं का विषय अध्यात्म, विज्ञान और विश्वास पर संत, महंतो ने अपने विचार प्रकट किए। संत मोरारी बापू ने कहा कि समाज की उन्नति के लिए ऐसे सम्मेलनों का आयोजन सार्थक पहल है। इस ट्रस्ट में कई सेवाकार्य संचालित हो रहे हैं, जिसमें लाखों लोग लाभान्वित हो रहे हैं। ट्रस्ट द्वारा संतों की सेवा का प्रकल्प अध्यात्म का प्रतीक है।
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इस मौके पर स्वामी रामेश्वरदास ऋषिकेश, राघवाचार्य वेदांती रैवासापीठ, राजगुरु बद्री प्रपन्नाचार्य आचार्य आश्रम, सनकादिक ब्रम्हचारी, रामजीदास संतोषी अखाड़ा, आचार्य रामचन्द्रदास तुलसीपीठ, राम हृदयदास महाराज रामायणी कुटी, मदनदास महाराज कामदगिरि पीठ, दीनबंधुदास मलूक पीठ वृंदावन, नितिन भाई रायचूरा राजकोट मौजूद रहे।