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अस्पतालों से निराशा, लौट रहे मरीज
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चित्रकूट। कोरोना काल में कोविड अस्पताल सहित जिला अस्पताल में आने वाले मरीज व उनके परिजनों को निराश होकर लौटना पड़ रहा हैं। कही ऑक्सीजन की कमी तो कहीं डाक्टरों की कमी ।कई बार इलाज को लेकर डाक्टरों व मरीजों के परिजनों के बीच विवाद भी हो जाता है। एक बार तो परिजन कोविड अस्पताल के बगल में सड़क में शव रखकर विरोध भी जताया।
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समय से इलाज न करने को लेकर हुई कहासुनी
मानिकपुर कस्बा निवासी महेंद्र द्विवेदी का का इलाज कराने के लिए परिजन जिला अस्पताल पहुंचे। जहां पर इलाज न करने को लेकर डाक्टर व मरीज के परिजनों के बीच कहासुनी हुई। कुछ देर बार महेंद्र द्विवेदी की मौत हो गई। मामले को लेकर परिजनों ने उच्चाधिकारियों से शिकायत की कि समय से इलाज न करने से मौत हुुई है।
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मरीज की मौत होने पर बवाल
कोविड अस्पताल में भर्ती भरकोर्रा गांव के एक मरीज की हालत बिगड़ गई। इसके बाद मरीज की मौत हो गई थी। जिस पर परिजनों ने आरोप लगाया कि अस्पताल के मरीजों की लापरवाही के कारण मौत हुई है। इसके बाद मरीज के परिजन बेकाबू हो गये। जिन्होंने डाक्टरों व अस्पताल के मरीजों के ऊपर हमला बोल दिया।
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परेशानी झेल रहे मरीज सहित उनके परिजन
चित्रकूट। मरीजों को अस्पताल तक लाने के लिए परिजनों को कई परेशानी का सामना करना पड़ता है। कसहाई गांव के राजेंद्र प्रसाद ने बताया कि गंभीर रूप से बीमार मरीज को अस्पताल के अंदर तक ले जाने के लिए न तो स्टेचर मिलता न ही व्हीलचेयर। मजबूरी में मरीजों को कंधे मेें उठाकर ले जाना पड़ता है।
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मरीजोें के लिए ई रिक्शा बना वरदान
चित्रकूट। इस समय मरीजों व उनके परिजनों के लिए ई रिक्शा वरदान साबित हो रहे हैं। उन्हीं के सहारे ही अधिकतर मरीजों को अस्पताल तक लाने व ले जाने का काम परिजन कर रहे हैं। शहर के शंकर बाजार निवासी राजीव द्विवेदी ने बताया कि इस समय एंबुलेंस नहीं मिलती है। ई रिक्शा ही मरीजों के लिए सहारा बने हुए हैं।
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अस्पताल में गंदगी होने से परेशान
चित्रकूट। खोह गांव के सुनील वर्मा, महेश वर्मा ने बताया कि अस्पताल में इस समय गंदगी भी अधिक रहती है। मूत्रालय से लेकर टायलट तक गंदे रहते है। जिससे मरीजो को परेशानी होती है।
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मरीजों का समय से इलाज करने का दावा
मुख्य चिकित्साधिकारी डा. विनोद कुमार व जिला अस्पताल के अधीक्षक डा. आरके गुप्ता ने बताया कि मरीजों का समय से इलाज किया जा रहा है। जिन मरीजों को आक्सीजन की जरूरत रहती है उनको आक्सीजन लगाया जाता है। मुफत में दवाये भी दी जा रही है।
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समय से इलाज न करने को लेकर हुई कहासुनी
मानिकपुर कस्बा निवासी महेंद्र द्विवेदी का का इलाज कराने के लिए परिजन जिला अस्पताल पहुंचे। जहां पर इलाज न करने को लेकर डाक्टर व मरीज के परिजनों के बीच कहासुनी हुई। कुछ देर बार महेंद्र द्विवेदी की मौत हो गई। मामले को लेकर परिजनों ने उच्चाधिकारियों से शिकायत की कि समय से इलाज न करने से मौत हुुई है।
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मरीज की मौत होने पर बवाल
कोविड अस्पताल में भर्ती भरकोर्रा गांव के एक मरीज की हालत बिगड़ गई। इसके बाद मरीज की मौत हो गई थी। जिस पर परिजनों ने आरोप लगाया कि अस्पताल के मरीजों की लापरवाही के कारण मौत हुई है। इसके बाद मरीज के परिजन बेकाबू हो गये। जिन्होंने डाक्टरों व अस्पताल के मरीजों के ऊपर हमला बोल दिया।
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परेशानी झेल रहे मरीज सहित उनके परिजन
चित्रकूट। मरीजों को अस्पताल तक लाने के लिए परिजनों को कई परेशानी का सामना करना पड़ता है। कसहाई गांव के राजेंद्र प्रसाद ने बताया कि गंभीर रूप से बीमार मरीज को अस्पताल के अंदर तक ले जाने के लिए न तो स्टेचर मिलता न ही व्हीलचेयर। मजबूरी में मरीजों को कंधे मेें उठाकर ले जाना पड़ता है।
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मरीजोें के लिए ई रिक्शा बना वरदान
चित्रकूट। इस समय मरीजों व उनके परिजनों के लिए ई रिक्शा वरदान साबित हो रहे हैं। उन्हीं के सहारे ही अधिकतर मरीजों को अस्पताल तक लाने व ले जाने का काम परिजन कर रहे हैं। शहर के शंकर बाजार निवासी राजीव द्विवेदी ने बताया कि इस समय एंबुलेंस नहीं मिलती है। ई रिक्शा ही मरीजों के लिए सहारा बने हुए हैं।
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अस्पताल में गंदगी होने से परेशान
चित्रकूट। खोह गांव के सुनील वर्मा, महेश वर्मा ने बताया कि अस्पताल में इस समय गंदगी भी अधिक रहती है। मूत्रालय से लेकर टायलट तक गंदे रहते है। जिससे मरीजो को परेशानी होती है।
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मरीजों का समय से इलाज करने का दावा
मुख्य चिकित्साधिकारी डा. विनोद कुमार व जिला अस्पताल के अधीक्षक डा. आरके गुप्ता ने बताया कि मरीजों का समय से इलाज किया जा रहा है। जिन मरीजों को आक्सीजन की जरूरत रहती है उनको आक्सीजन लगाया जाता है। मुफत में दवाये भी दी जा रही है।