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त्वरित निर्णय की कमी से भड़की गुस्से की आग
ब्यूरो/ अमर उजाला, चित्रकूट
Updated Wed, 18 Mar 2015 12:00 AM IST
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कर्वी में तहसील दिवस के दौरान किसानों पर हुए लाठीचार्ज के मामले में अधिकारियों में त्वरित निर्णय लेने की क्षमता की कमी और भीड़ में संयम खोने की प्रवृत्ति के चलते बात बिगड़ गई। घटनास्थल पर यही चर्चा होती रही कि अगर एडीएम या डीएम, एसपी यहां होते तो शायद भीड़ को समझाने में इतनी दिक्कत न होती।
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तहसील दिवस के दौरान हुए बवाल को देखकर ये बात स्पष्ट होती है कि कहीं न कहीं मौजूद अधिकारी और पुलिस कर्मी किसानों की बात को समझ नहीं सके। किसानों ने भी धैर्य खो दिया। कोतवाल का उग्र हो जाना, कुछ पुलिसकर्मियों द्वारा महिलाओं पर जबरन लाठी भांज देने की वजह से बात और बढ़ गई। अगर मौके पर डीएम होतीं तो शायद बात इतनी न बढ़ती।
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कोतवाल ने एसडीएम की भी न सुनी
एसडीएम नरेंद्र सिंह ने लोगों को समझाने की कोशिश की। उन्होंने कोतवाल केपी दुबे से भी संयम से काम लेने को कहा। पर कोतवाल शायद किसी और मूड में थे। यह सही है कि शुरुआत में गुलाबी गैंग लोकतांत्रिक जन संगठन की कमांडर अफसाना ने उनके साथ अभद्रता की थी। लेकिन वे त्वरित कार्रवाई करने से बच जाते तो शायद भीड़ इतना बेकाबू न होती।
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