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अतिपिछड़ों को मिले राजनैतिक भागीदारी
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चित्रकूट। भारतीय राजनीति में कर्पूरी ठाकुर की प्रासंगिकता व सामाजिक न्याय की अवधारणा विषय पर आनलाइन राष्ट्रीय बेविनार हुआ। जिसमें मुख्य वक्ता बुंदेलखंड के इतिहासकार डा. शिवप्रेम याज्ञिक ने कहा कि कर्पूरी ठाकुर मात्र जाति विशेष के नेता नहीं थे अपितु जननेता थे। तभी उन्हें जननायक के रूप में याद किया जाता है।
ऐसे महापुरुष को अब तक भारतरत्न नहीं मिला है जो अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्हें भारतरत्न प्रदान करने की मांग राष्ट्रीय मंच के माध्यम से की जाती है। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए इलाहाबाद विश्वविद्यालय के केमिस्ट्री डिपार्टमेंट के प्रो. डा. प्रमोद शर्मा ने कहा कि कर्पूरी ठाकुर राजनैतिक सुचिता के पर्याय थे। विपरीत परिस्थितियों में
संघर्ष करते हुए समतामूलक समाज के निर्माण के लिए आजीवन संघर्ष करते रहे। मुख्य अतिथि प्रख्यात चिंतक रघु ठाकुर ने डा. राम मनोहर लोहिया, आचार्य नरेंद्रदेव व जयप्रकाश नारायण के समकक्ष रखते हुए कर्पूरी ठाकुर के राजनैतिक योगदान पर विस्तृत रूप से प्रकाश डाला। संचालन ललितपुर के लखनलाल आर्य ने किया। (संवाद)
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ऐसे महापुरुष को अब तक भारतरत्न नहीं मिला है जो अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्हें भारतरत्न प्रदान करने की मांग राष्ट्रीय मंच के माध्यम से की जाती है। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए इलाहाबाद विश्वविद्यालय के केमिस्ट्री डिपार्टमेंट के प्रो. डा. प्रमोद शर्मा ने कहा कि कर्पूरी ठाकुर राजनैतिक सुचिता के पर्याय थे। विपरीत परिस्थितियों में
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संघर्ष करते हुए समतामूलक समाज के निर्माण के लिए आजीवन संघर्ष करते रहे। मुख्य अतिथि प्रख्यात चिंतक रघु ठाकुर ने डा. राम मनोहर लोहिया, आचार्य नरेंद्रदेव व जयप्रकाश नारायण के समकक्ष रखते हुए कर्पूरी ठाकुर के राजनैतिक योगदान पर विस्तृत रूप से प्रकाश डाला। संचालन ललितपुर के लखनलाल आर्य ने किया। (संवाद)
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