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Chitrakoot News: जीवन प्रमाणपत्र देने में भी पेंशनर कर रहे हीलाहवाली
Wed, 26 Nov 2025 11:33 PM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चित्रकूट
संवाद न्यूज एजेंसी, चित्रकूट
Updated Wed, 26 Nov 2025 11:33 PM IST
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चित्रकूट। कोषागार में हुए पेंशन घोटाला के बाद भी पेंशनर अपना जीवन प्रमाणपत्र देने में दिलचस्पी नहीं ले रहे हैं। विभिन्न सरकारी विभागों से सेवानिवृत्त हुए करीब पांच हजार से ज्यादा पेंशनरों को पेंशन मिलती है। इन्हें हर साल खुद के जीवित होने का प्रमाणपत्र देने की अनिवार्यता है। बावजूद इसके इस बार अब तक मात्र 20 से 25 फीसद पेंशनरों ने ही जीवित प्रमाणपत्र जमा किए हैं। खास बात तो यह है कि इनके जीवित प्रमाणपत्र न देने की वजह से विभागीय कर्मचारियों ने बिचौलियों के गठजोड़ से कोषागार में 43 करोड़ से ज्यादा का घोटाला कर दिया, हालांकि अब इसकी जांच चल रही है।
जिले में सरकारी विभागों से सेवानिवृत्त हुए 5018 पेंशनरों को पेंशन मिलती है। यह रकम इनके बैंकों में ट्रेजरी से भेजी जाती है। इन्हें हर साल नवंबर माह में खुद के जीवित होने का प्रमाणपत्र कोषागार को देने का प्राविधान है। बावजूद इसके यहां के कोषागार ने पेंशनरों से जीवन प्रमाणपत्र लेने में शिथिलता बरती। नतीजतन, बिना जीवन प्रमाणपत्र लिए उनके खातों में पेंशन आहरित होती रही। जबकि कई पेंशनर स्वर्ग भी सिधार चुके थे। आहिस्ता-आहिस्ता पिछले पांच साल में विभागीय अफसर-कर्मचारियों ने बिचौलियों की मिलीभगत से 43 करोड़ का घोटाला कर डाला। करीब डेढ़ माह पहले कोषागार में पेंशन घोटाले का मुद्दा उठा था तो जांच हुई।
पता चला कि 93 पेंशनरों के खाता में 43.13 करोड़ रुपये एरियर व पेंशन के नाम पर डालकर बिचौलियों की मदद से कोषागार के कर्मचारियों ने निकाला था। पेंशनरों को 15 से 20 फीसदी रकम देकर अन्य को वापस ले लिया था। घोटाले के बाद सभी पेंशनरों को जीवित होने का प्रमाणपत्र देने के लिए कहा गया था। जिस पर अभी तक करीब 12 सौ ही पेंशनरों ने जीवित होने का प्रमाणपत्र दिया है।
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इस समय तो दिन भर में बामुश्किल 20 पेंशनर भी नहीं आ रहे हैं। उधर, वरिष्ठ कोषाधिकारी रमेश सिंह ने बताया कि सभी पेंशनरों को जीवन प्रमाणपत्र जमा करने के लिए कहा गया है। रोजाना पेंशनर प्रमाणपत्र देने आ रहे हैं लेकिन इस समय इनकी संख्या कुछ कम है।
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जिले में सरकारी विभागों से सेवानिवृत्त हुए 5018 पेंशनरों को पेंशन मिलती है। यह रकम इनके बैंकों में ट्रेजरी से भेजी जाती है। इन्हें हर साल नवंबर माह में खुद के जीवित होने का प्रमाणपत्र कोषागार को देने का प्राविधान है। बावजूद इसके यहां के कोषागार ने पेंशनरों से जीवन प्रमाणपत्र लेने में शिथिलता बरती। नतीजतन, बिना जीवन प्रमाणपत्र लिए उनके खातों में पेंशन आहरित होती रही। जबकि कई पेंशनर स्वर्ग भी सिधार चुके थे। आहिस्ता-आहिस्ता पिछले पांच साल में विभागीय अफसर-कर्मचारियों ने बिचौलियों की मिलीभगत से 43 करोड़ का घोटाला कर डाला। करीब डेढ़ माह पहले कोषागार में पेंशन घोटाले का मुद्दा उठा था तो जांच हुई।
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पता चला कि 93 पेंशनरों के खाता में 43.13 करोड़ रुपये एरियर व पेंशन के नाम पर डालकर बिचौलियों की मदद से कोषागार के कर्मचारियों ने निकाला था। पेंशनरों को 15 से 20 फीसदी रकम देकर अन्य को वापस ले लिया था। घोटाले के बाद सभी पेंशनरों को जीवित होने का प्रमाणपत्र देने के लिए कहा गया था। जिस पर अभी तक करीब 12 सौ ही पेंशनरों ने जीवित होने का प्रमाणपत्र दिया है।
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इस समय तो दिन भर में बामुश्किल 20 पेंशनर भी नहीं आ रहे हैं। उधर, वरिष्ठ कोषाधिकारी रमेश सिंह ने बताया कि सभी पेंशनरों को जीवन प्रमाणपत्र जमा करने के लिए कहा गया है। रोजाना पेंशनर प्रमाणपत्र देने आ रहे हैं लेकिन इस समय इनकी संख्या कुछ कम है।