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कृषि कानून के खिलाफ किसाना नेताओं ने सौंपे ज्ञापन

Sat, 05 Jun 2021 11:34 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Sat, 05 Jun 2021 11:34 PM IST
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कूषि कानून की प्रतियां जलाते किसान नेता। - फोटो : CHITRAKUTT
चित्रकूट/राजापुर। नये कृषि बिल का किसान यूनियन व कई उनके समर्थक राजनीतिक दल ने शनिवार को जिले में अलग अलग स्थानों पर विरोध दर्ज कराया। कई जगह नये कृषि कानून की सांकेतिक प्रतियां जलाई गई और कई जगह विरोध प्रदर्शन धरना देकर ज्ञापन सौंपा।
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केंद्रीय संगठन किसान मोर्चा के आवाहन पर भारतीय किसान यूनियन जिला इकाई ने जिलामहामंत्री अरुण कुमार पांडेय के नेतृत्व में तहसील परिसर राजापुर में काले कृषि कानूनों की प्रतियां को फाड़ कर विरोध किया। इसके बाद उपजिलाधिकारी राजापुर को किसानों की स्थानीय समस्याओं पर ज्ञापन दिया। उपाध्यक्ष उदयनारायण सिंह ने बताया कि इस कृषि कानूनों से किसान तवाह हो जाएगा किसानों की जमीनों पर उद्योग जगत का कब्जा होगा किसान अपने ही खेतों में मजदूरी करने को बाध्य होगा। सरकार किसानों को गुलाम बनाना चाहती हैं जब किसानों को ये कानून पसंद नही है तो जबरन क्यो थोपना चाह रही हैं।
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ब्लॉक अध्यक्ष राजकिशोर सिंह ने कहा कि आज जिले का किसान अपना गेहू नही बेच पा रहा है। केन्द्रो में केंद्र प्रभारियों द्वारा कभी बारदाना गेहूं उठान को लेकर खरीद नही करते। रात्रि में बिना टोकन व नम्बर के अपने चहेतों का खरीद कर गोदाम भर दिया जाता है। इस मौके पर जिला संरक्षक छोटेलाल पीढ़िया, तहसील अध्यक्ष शिवदयाल सिंह बघेल , देवेंद्र सिंह, जिलाउपाध्यक्ष नथन यादव ,ब्लाक उपाध्यक्ष योगेंद्र सिंह तहसील मंत्री राममूरत सिंह तहसील संगठन मंत्री बीरेंद्र सिंह चंद्रपाल सिंह आदि किसान मौजूद रहे।
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इसके अलावा किसान सभा चित्रकूट ने उत्तर प्रदेश किसान सभा के राज्य कार्यकारिणी सदस्य रूद्रप्रसाद मिश्र के नेतृत्व में सम्पूर्ण क्त्रसंति दिवस कृषि कानूनों की प्रतियां जलाकर मनाया। कोविड.19 के जारी निर्देशों का पालन करते हुए तथा पुलिस प्रशासन की लाकडाउन के कारण बरती जा रही सख्ती के कारण घर में ही संपूर्ण क्त्रसंति दिवस मनाया। बताया कि 5जून 2020 को ही केंद्र सरकार ने काले कृषि कानूनों को अध्यादेश के रूप मे लाई थी। काले कानूनों को रद्द करने के लिए पिछले छह महीने से किसान आन्दोलन कर रहे हैं लेकिन केंद्र सरकार तानाशाही शासन लागू कर किसानों की बातें सुनने को तैयार नहीं है। सरकार की इस नीति को किसान सफल नही होने देंगे।आंदोलन को अब सरकार दबा नही सकती है गांव.गांव फैल चुका है।
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