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अधिकारी खाएं रसगुल्ला, किसानों को सूखी पूड़ी
ब्यूरो/अमर उजाला चित्रकूट।
Updated Wed, 20 May 2015 11:12 PM IST
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कृषि विभाग चित्रकूट द्वारा बुधवार को आयोजित एक दिवसीय किसान मेला एवं खरीफ गोष्ठी में भारी अव्यवस्था दिखी। मेले के लिए पर्याप्त धन मिलने के बाद भी किसानों की अनदेखी की गई। जहां अधिकारी रसगुल्ले का मजा लेते देखे गए वहीं किसानों को घंटों इंतजार के बाद सूखी पूड़ी से काम चलाना पड़ा। हाल ये रहा कि कई किसान व्यवस्था को कोसते दिखे और खाना छोड़कर चले गए।
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जिलास्तरीय खरीफ गोष्ठी एवं किसान मेले का उद्घाटन जिलाधिकारी नीलम अहलावत ने दीप प्रज्ज्वलन कर किया। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को किसानों की समस्याओं के निस्तारण के निर्देश दिए। लेकिन डीएम के जाते ही जैसे अधिकारी अपनी जिम्मेदारी भूल गए। किसी ने उनकी समस्या पर ध्यान नहीं दिया। प्रचार-प्रसार के अभाव में मेले में किसानों की संख्या काफी कम रही।
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किसान भीषण गर्मी में परेशान रहे जबकि अधिकारी कूलर की हवा खा रहे थे। सबसे ज्यादा अव्यवस्था तो खानपान की रही। सुबह से आए किसानों को अपराह्न तीन बजे के करीब खाना दिया गया। उसमें भी सिर्फ पूड़ी और सब्जी दी गई। जबकि अधिकारियों की थाली में पनीर, रसगुल्ला सजा था। इस पर किसानों ने कहा कि उनके साथ सौतेला व्यवहार किया जाता है।
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किसान विष्णुदत्त ने कहा कि क्या करें साहब, जो व्यवस्था है, उससे काम चलाना पड़ता है। विनय प्रताप ने कहा कि अधिकारी अंदर बैठकर मलाईदार खाते हैं और हमें सूखी पूड़ी सब्जी दी जाती है। वो भी पर्याप्त नहीं है। कई किसान तो खाना छोड़कर चले गए। मऊ तहसील निवासी रामनरेश त्रिपाठी ने कहा कि अब बुलाया गया तो न आएंगे। हद तो तब हो गई जब एक किसान के पानी की बोतल उठाने पर कर्मचारी ने उससे बोतल छीन ली।
कृषि उप निदेशक जगदीश नारायण ने कहा कि किसान मेले के लिए पैसा आता है। अगर किसानों के साथ गलत हुआ है तो मैं जिम्मेदार हूं। किसान से पानी की बोतल किसी कर्मचारी ने छीनी है तो उसे दंडित किया जाएगा। आइंदा से ऐसा नहीं होगा।
सिर्फ औपचारिकता होती
चित्रकूट। भाकियू जिलाध्यक्ष रामसिंह पटेल ने कहा कि किसानों की जागरूकता के लिए आयोजित गोष्ठी में सिर्फ औपचारिकता होती है। उप कृषि निदेशक और जिला कृषि अधिकारी धन का दुरुपयोग करते हैं।
किसानों को दोयम स्तर का खाना दिया गया। भारतीय किसान यूनियन इसका विरोध करती है। यूनियन अधिकारियों को आगाह करती है कि अगर इस तरह की बातें जारी रहीं तो विभाग के खिलाफ जोरदार आंदोलन किया जाएगा। एक किसान ने पानी की बोतल ले ली तो कर्मचारी उससे लड़ने को उतारू हो गया, ये शर्मनाक है ।
समस्याओं पर चिंतित दिखीं डीएम
गोष्ठी में जब तक जिलाधिकारी रहीं, उन्होंने किसानों की समस्याओं को गंभीरता से सुना और उन्हें नोट भी किया। रेहुटिया और बसिला के किसानों ने अग्निकांड के मामले में मुआवजे की मांग की। इस पर डीएम ने कहा कि समुचित मदद दी जाएगी। किसानों ने अन्ना प्रथा उन्मूलन, जल संकट आदि की समस्याएं भी बर्ताइं।
इस पर डीएम ने आश्वासन दिया कि मुख्यमंत्री की योजना हमारा जल हमारा जीवन के द्वारा जिले के प्राकृतिक स्रोतों को चिह्नित किया जाएगा। तीस मई तक इन पर कब्जों को भी हटाया जाएगा। जिले के लिए छह और नलकूपों की मांग की जाएगी। डीएम ने कहा कि किसानों के लिए बीज और खाद की पर्याप्त उपलब्धता है। मौके पर कृषि उप निदेशक जगदीश नारायण, जिला कृषि अधिकारी अरविंद सिंह, कृषि विज्ञान केंद्र के प्राचार्य नरेंद्र सिंह, जिला उद्यान अधिकारी राकेश कुमार, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी एनके गहलौत, एलडीएम दिनकर सिंह आदि मौजूद रहे।