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Chitrakoot News: नगर पालिका की जमीनों का होगा डिजिटल कायाकल्प, 16 टीमें करेंगी सेटेलाइट सर्वे
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चित्रकूट। नगर पालिका क्षेत्र की हर इंच जमीन का डिजिटल नक्शा तैयार किया जाएगा, इससे फर्जीवाड़े और अवैध कब्जों पर लगाम लगेगी। नागरिकों को भी जमीनी कामों के लिए भटकना नहीं पड़ेगा। आसानी से नागरिकों के काम होंगे।
नगर पालिका क्षेत्र में जमीनों के सर्वे के लिए 12 विशेष टीमें और चार नगर पंचायतों में चार टीमें गठित की जाएंगी। ये टीमें सैटेलाइट तकनीक और अत्याधुनिक रोवर मशीन से जमीनों का सर्वे करेंगी। सर्वे के बाद नागरिकों को यूआरप्रो कार्ड दिया जाएगा। इसमें जमीन के मालिक का नाम, क्षेत्रफल, लोकेशन, कर का विवरण, सहित अन्य पूरा रिकॉर्ड रहेगा।
सर्वे टीम में आईटीआई विशेषज्ञ, राजस्व विभाग और नगर पालिका का एक-एक कर्मचारी शामिल रहेगा। सर्वे में जीपीएस कोऑर्डिनेट के साथ जमीन की सीमाएं दर्ज की जाएंगी। इससे जमीनों का पूरा रिकॉर्ड डिजिटल होगा और फर्जीवाड़ा रुकेगा। नागरिकों के किस जमीन पर कितना अवैध कब्जा है, सैटेलाइट इमेज से तुरंत पता चल जाएगा। सर्वे होने से विकास कार्यों, पार्क, सड़क और नाली के लिए जमीन चिह्नित करना आसान होगा। नगर पालिका क्षेत्र का सर्वे पूरा होने के बाद जमीनी विवादों में कमी आएगी।
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नागरिक अपनी जमीनों को लीज पर आसानी से दे सकेंगे। साथ ही किराया और टैक्स वसूली में पारदर्शिता से नगर पालिका की भी आय बढ़ेगी। नागरिक घर बैठे अपनी जमीन की स्थिति पोर्टल पर देख सकेंगे। जमीन संबंधी मुकदमों में डिजिटल नक्शा ठोस सबूत माना जाएगा। डिजिटल डेटा से भविष्य में जीआईएस आधारित प्लानिंग आसान होगी।
अधिशाषी अभियंता लालजी यादव का कहना है कि सर्वे पूरा होने के बाद सभी जमीनों का डेटा एक क्लिक पर नागरिकों को मिलेगा। इससे न सिर्फ नगर पालिका की संपत्ति का संरक्षण होगा, बल्कि शहर के सुनियोजित विकास में भी मदद मिलेगी। चित्रकूट को स्मार्ट बनाने की दिशा में यह एक बड़ा कदम साबित होगा।
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नगर पालिका क्षेत्र में जमीनों के सर्वे के लिए 12 विशेष टीमें और चार नगर पंचायतों में चार टीमें गठित की जाएंगी। ये टीमें सैटेलाइट तकनीक और अत्याधुनिक रोवर मशीन से जमीनों का सर्वे करेंगी। सर्वे के बाद नागरिकों को यूआरप्रो कार्ड दिया जाएगा। इसमें जमीन के मालिक का नाम, क्षेत्रफल, लोकेशन, कर का विवरण, सहित अन्य पूरा रिकॉर्ड रहेगा।
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सर्वे टीम में आईटीआई विशेषज्ञ, राजस्व विभाग और नगर पालिका का एक-एक कर्मचारी शामिल रहेगा। सर्वे में जीपीएस कोऑर्डिनेट के साथ जमीन की सीमाएं दर्ज की जाएंगी। इससे जमीनों का पूरा रिकॉर्ड डिजिटल होगा और फर्जीवाड़ा रुकेगा। नागरिकों के किस जमीन पर कितना अवैध कब्जा है, सैटेलाइट इमेज से तुरंत पता चल जाएगा। सर्वे होने से विकास कार्यों, पार्क, सड़क और नाली के लिए जमीन चिह्नित करना आसान होगा। नगर पालिका क्षेत्र का सर्वे पूरा होने के बाद जमीनी विवादों में कमी आएगी।
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नागरिक अपनी जमीनों को लीज पर आसानी से दे सकेंगे। साथ ही किराया और टैक्स वसूली में पारदर्शिता से नगर पालिका की भी आय बढ़ेगी। नागरिक घर बैठे अपनी जमीन की स्थिति पोर्टल पर देख सकेंगे। जमीन संबंधी मुकदमों में डिजिटल नक्शा ठोस सबूत माना जाएगा। डिजिटल डेटा से भविष्य में जीआईएस आधारित प्लानिंग आसान होगी।
अधिशाषी अभियंता लालजी यादव का कहना है कि सर्वे पूरा होने के बाद सभी जमीनों का डेटा एक क्लिक पर नागरिकों को मिलेगा। इससे न सिर्फ नगर पालिका की संपत्ति का संरक्षण होगा, बल्कि शहर के सुनियोजित विकास में भी मदद मिलेगी। चित्रकूट को स्मार्ट बनाने की दिशा में यह एक बड़ा कदम साबित होगा।