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भगवान राम का चरित्र अनुकरणीय
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फोटो-5- राष्ट्रीय रामायण मेले का उदघाटन करने के बाद मंच से संबोधन करते जगदगुरु रामभद्राचार्य व मं?
- फोटो : CHITRAKUTT
चित्रकूट/खोही। धर्मनगरी चित्रकूट में 48वें राष्ट्रीय रामायण मेला का शुभारंभ कई अखाड़ों के निशान लेकर पहुंचे साधु संतों की यात्रा से हुआ। प्रमुख संत-महंतो द्वारा अपने-अपने निशानों सहित हाथी-घोड़ों व बैंड बाजों के साथ मंदाकिनी तट रामघाट से शोभा यात्रा निकालकर राष्ट्रीय रामायण मेला प्रांगण पहुचे।
रामायण मेला परिसर में तुलसीपीठाधीश्वर जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने दीप प्रज्जवलित करते हुए कहा कि श्रीराम एक नारी व्रतधारी रहे हैं। श्रीराम सत्यसंघ हैं। उनका चरित्र अनुकरणीय है। उसे अपने जीवन में उतारने की प्रबल आवश्यकता है। अयोध्या में निर्माणाधीन भगवान श्रीराम के मंदिर अतिसुन्दर होगा। विश्व में सबसे भव्य व अद्वितीय होगा। राष्ट्रीय रामायण मेले की कल्पना डॉ. लोहिया द्वारा की गई थी। वह समाजवादी कट्टर नेता थे। लोहिया रामचरित मानस का पाठ निरन्तर करते थे जिसके चलते उन्होंने चित्रकूट में ही राष्ट्रीय रामायण मेला की परिकल्पना की थी और वो साकार हो रही है। इस मौके पर इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति विपिन चन्द्र दीक्षित, राज्यमंत्री चन्द्रिका प्रसाद उपाध्याय, पूर्व सांसद भैरो प्रसाद मिश्र व जगदगुरु के उत्तराधिकारी आचार्य रामचंद्र दास आदि मौजूद रहे। इससे पहले मेले के कार्यकारी अध्यक्ष राजेश कुमार करवरिया ने निशानों की पूजा कर महंतों के तिलक लगाकर माल्यार्पण किया। इस मौके पर चित्रकूट मप्र के विधायक नीलांशू चतुर्वेदी, करुणा शंकर द्विवेदी, पंकज अग्रवाल, नीलम करवरिया, प्रतीक्षा मिश्रा, लल्लूराम शुक्ल आदि मौजूद रहे। जानकीकुण्ड के संस्कृत विद्यालय के छात्रों द्वारा उद्घाटन के पूर्व स्वस्ति वाचन का पाठ किया गया।
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समाजवाद की सच्ची स्थापना चित्रकूट में ही
रामायण मेले के पहले दिन विद्वगोष्ठी में प्रयागराज के प्रो. सभापति मिश्र ने कहा कि चित्रकूट का कण-कण भगवान राम के चरण संचरण से सुवासित है। भगवान राम ने यहा आकर आदिवासी, जनजाति व कोल-भीलों के बीच रहकर के एक समन्वयवादी संस्कृति का निर्माण किया, वास्तव में समाजवाद की सच्ची स्थापना भगवान श्रीराम ने सर्वप्रथम चित्रकूट में ही की। स्वामी पूनमदास बलिया ने कहा कि भगवान राम ने 11 वर्ष 6 माह चित्रकूट में तपस्या कर ऊर्जा हासिल की थी। रामभरोसे तिवारी रामायणी ने कहा कि विश्व में चित्रकूट के समान कोई दूसरा स्थान नही।
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सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने मन मोहा
राष्ट्रीय रामायण मेले में प्रथम दिवस संध्या से लेकर देर रात तक सांस्कृतिक कार्यक्त्रस्मों की भरमार रही। कांती दीक्षित, सोनम केशरवानी, लक्ष्मी उपाध्याय लखनऊ व गन्धर्व कल्चरल ऑर्गनाईजेशन लखनऊ द्वारा रामकथा एवं कृष्णकाव्य के आधार पर कई मनोहारी भजन प्रस्तुत किए गए। लोक नृत्य के कार्यक्रमों में नटराज संगीत महाविद्यालय बांदा द्वारा मंचन किया गया। शास्त्रीय नृत्य वर्णिका श्रीवास्तव लखनऊ द्वारा मंचन किया गया जिसे दर्शकों ने तालियां बजाकर कलाकारों का मनोबल बढाया।
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रामायण मेला परिसर में तुलसीपीठाधीश्वर जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने दीप प्रज्जवलित करते हुए कहा कि श्रीराम एक नारी व्रतधारी रहे हैं। श्रीराम सत्यसंघ हैं। उनका चरित्र अनुकरणीय है। उसे अपने जीवन में उतारने की प्रबल आवश्यकता है। अयोध्या में निर्माणाधीन भगवान श्रीराम के मंदिर अतिसुन्दर होगा। विश्व में सबसे भव्य व अद्वितीय होगा। राष्ट्रीय रामायण मेले की कल्पना डॉ. लोहिया द्वारा की गई थी। वह समाजवादी कट्टर नेता थे। लोहिया रामचरित मानस का पाठ निरन्तर करते थे जिसके चलते उन्होंने चित्रकूट में ही राष्ट्रीय रामायण मेला की परिकल्पना की थी और वो साकार हो रही है। इस मौके पर इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति विपिन चन्द्र दीक्षित, राज्यमंत्री चन्द्रिका प्रसाद उपाध्याय, पूर्व सांसद भैरो प्रसाद मिश्र व जगदगुरु के उत्तराधिकारी आचार्य रामचंद्र दास आदि मौजूद रहे। इससे पहले मेले के कार्यकारी अध्यक्ष राजेश कुमार करवरिया ने निशानों की पूजा कर महंतों के तिलक लगाकर माल्यार्पण किया। इस मौके पर चित्रकूट मप्र के विधायक नीलांशू चतुर्वेदी, करुणा शंकर द्विवेदी, पंकज अग्रवाल, नीलम करवरिया, प्रतीक्षा मिश्रा, लल्लूराम शुक्ल आदि मौजूद रहे। जानकीकुण्ड के संस्कृत विद्यालय के छात्रों द्वारा उद्घाटन के पूर्व स्वस्ति वाचन का पाठ किया गया।
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समाजवाद की सच्ची स्थापना चित्रकूट में ही
रामायण मेले के पहले दिन विद्वगोष्ठी में प्रयागराज के प्रो. सभापति मिश्र ने कहा कि चित्रकूट का कण-कण भगवान राम के चरण संचरण से सुवासित है। भगवान राम ने यहा आकर आदिवासी, जनजाति व कोल-भीलों के बीच रहकर के एक समन्वयवादी संस्कृति का निर्माण किया, वास्तव में समाजवाद की सच्ची स्थापना भगवान श्रीराम ने सर्वप्रथम चित्रकूट में ही की। स्वामी पूनमदास बलिया ने कहा कि भगवान राम ने 11 वर्ष 6 माह चित्रकूट में तपस्या कर ऊर्जा हासिल की थी। रामभरोसे तिवारी रामायणी ने कहा कि विश्व में चित्रकूट के समान कोई दूसरा स्थान नही।
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सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने मन मोहा
राष्ट्रीय रामायण मेले में प्रथम दिवस संध्या से लेकर देर रात तक सांस्कृतिक कार्यक्त्रस्मों की भरमार रही। कांती दीक्षित, सोनम केशरवानी, लक्ष्मी उपाध्याय लखनऊ व गन्धर्व कल्चरल ऑर्गनाईजेशन लखनऊ द्वारा रामकथा एवं कृष्णकाव्य के आधार पर कई मनोहारी भजन प्रस्तुत किए गए। लोक नृत्य के कार्यक्रमों में नटराज संगीत महाविद्यालय बांदा द्वारा मंचन किया गया। शास्त्रीय नृत्य वर्णिका श्रीवास्तव लखनऊ द्वारा मंचन किया गया जिसे दर्शकों ने तालियां बजाकर कलाकारों का मनोबल बढाया।