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Chitrakoot News: पांच दिन दीपों से जगमगाएगी मंदाकिनी, 30 लाख से अधिक श्रद्धालु करते हैं दीपदान
Fri, 17 Oct 2025 01:40 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चित्रकूट
संवाद न्यूज एजेंसी, चित्रकूट
Updated Fri, 17 Oct 2025 01:40 AM IST
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12 सीकेटीपी-13- परिचय- दियों की रोशनी से सजा रामघाट ।फाइल फोटो
चित्रकूट। भगवान श्रीराम की तपोभूमि चित्रकूट इस बार फिर दिवाली पर्व पर आस्था, परंपरा और लोक संस्कृति के अद्भुत संगम का साक्षी बनेगी। अमावस्या की रात मंदाकिनी नदी का हर घाट दीपों की रोशनी से नहाएगा। यहां दिवाली पर्व अयोध्या की तर्ज पर भव्य स्वरूप में मनाया जाएगा। धनतेरस से भैया दूज तक पांच दिनों तक दीपों की पंक्तियों से सजी धर्मनगरी की छटा मन मोह लेगी। प्रशासन के अनुसार इस वर्ष करीब 30 लाख दीप जलाए जाएंगे, जिनमें लाखों श्रद्धालु दीपदान करेंगे।
धर्मनगरी में दीपदान की परंपरा सदियों से चली आ रही है। मान्यता है कि भगवान श्रीराम ने लंका विजय के बाद चित्रकूट के रामघाट पर दीपदान किया था। इसी क्षण से दीपदान पर्व की शुरुआत मानी जाती है। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि आज भी अमावस्या की रात प्रभु श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण मंदाकिनी में स्नान कर दीपदान करते हैं।
रामघाट स्थित मत्तगजेंद्रनाथ मंदिर के महंत विपिन महाराज बताते हैं कि दीपदान के दिन भगवान श्रीराम मंदाकिनी में डुबकी लगाते हैं और आशीर्वाद देते हैं। उनके अनुसार यह पर्व श्रद्धालुओं की भक्ति और भगवान के प्रति प्रेम का प्रतीक है।
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सरकार द्वारा रामघाट और आसपास के मंदिरों का सौंदर्यीकरण कर धर्मनगरी को और भव्य रूप दिया गया है। पांच दिवसीय दीपदान मेले में प्रशासन की ओर से 21 लाख दीप जलाए जाएंगे, जबकि शेष दीप श्रद्धालु समर्पित करेंगे।
इस दौरान लोक संस्कृति की झलक भी पूरे शबाब पर रहेगी। प्रदेश और अन्य राज्यों के कलाकार मंचों पर लोकगीतों, रामकथाओं और पारंपरिक नृत्यों की प्रस्तुतियों से श्रद्धालुओं का मन मोहेंगे। दीपदान के बाद परेवा और दूज पर मौनियों का प्रसिद्ध दिवारी नृत्य और उसके बाद गधों का पारंपरिक मेला आयोजित किया जाएगा, जिसमें लाखों की बोली लगाई जाएगी। चित्रकूट की दिवाली इस बार भी श्रद्धा, संस्कृति और सौंदर्य का भव्य संगम बनकर धर्मनगरी की आस्था को नई रोशनी देगा।
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धर्मनगरी में दीपदान की परंपरा सदियों से चली आ रही है। मान्यता है कि भगवान श्रीराम ने लंका विजय के बाद चित्रकूट के रामघाट पर दीपदान किया था। इसी क्षण से दीपदान पर्व की शुरुआत मानी जाती है। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि आज भी अमावस्या की रात प्रभु श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण मंदाकिनी में स्नान कर दीपदान करते हैं।
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रामघाट स्थित मत्तगजेंद्रनाथ मंदिर के महंत विपिन महाराज बताते हैं कि दीपदान के दिन भगवान श्रीराम मंदाकिनी में डुबकी लगाते हैं और आशीर्वाद देते हैं। उनके अनुसार यह पर्व श्रद्धालुओं की भक्ति और भगवान के प्रति प्रेम का प्रतीक है।
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सरकार द्वारा रामघाट और आसपास के मंदिरों का सौंदर्यीकरण कर धर्मनगरी को और भव्य रूप दिया गया है। पांच दिवसीय दीपदान मेले में प्रशासन की ओर से 21 लाख दीप जलाए जाएंगे, जबकि शेष दीप श्रद्धालु समर्पित करेंगे।
इस दौरान लोक संस्कृति की झलक भी पूरे शबाब पर रहेगी। प्रदेश और अन्य राज्यों के कलाकार मंचों पर लोकगीतों, रामकथाओं और पारंपरिक नृत्यों की प्रस्तुतियों से श्रद्धालुओं का मन मोहेंगे। दीपदान के बाद परेवा और दूज पर मौनियों का प्रसिद्ध दिवारी नृत्य और उसके बाद गधों का पारंपरिक मेला आयोजित किया जाएगा, जिसमें लाखों की बोली लगाई जाएगी। चित्रकूट की दिवाली इस बार भी श्रद्धा, संस्कृति और सौंदर्य का भव्य संगम बनकर धर्मनगरी की आस्था को नई रोशनी देगा।