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मंदाकिनी में आई बाढ़ से तरौंहा बना टापू
चित्रकूट
Updated Wed, 17 Aug 2016 10:59 PM IST
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मंदाकिनी का पानी टेपो स्टैंड व सीतापुर कस्बे तक आने के कारण सावन में आए तीर्थयात्रियों को पानी से होकर गुजरना पड़ा।
- फोटो : अमर उजाला
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मंदाकिनी में आई बाढ़ से शहर से सटा तरौंहा टापू बन गया है। मुख्यालय को जोड़ने वाली सड़क में पानी भर जाने से तरौंहा वासी घर में ही कैद हो गये हैं। आवागमन के सभी रास्ते बंद होने से बच्चे स्कूल नहीं जा पाये। प्रशासनिक अधिकारी बाढ़ क्षेत्र में नजर रखे हुए हैं।
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चार दिनों से हो रही भारी बारिश के कारण मंदाकिनी नदी में बाढ़ आ गई। नदी के तट पर बसा होने से तरौंहा पानी से घिर गया है। तरौंहा की जमीन ऊंची नीची होने से जब भी नदी में बाढ़ आती है। कम ऊंचाई में बसे लोगों के घरों में पानी भर जाता है। जिसका असर सबसे अधिक मुख्यालय को जोड़ने वाली सड़क में देखने को मिल रहा है।
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बीच रास्ते में पानी भर जाने से यहां के निवासी घरों से नहीं निकले। स्कूल खुलने के बाद भी बच्चे स्कूल नही जा पाए। सुरक्षा व्यवस्था के लिए पुलिस तैनात है। प्रशासनिक अधिकारियों ने बाढ़ क्षेत्र में जाकर निवासियों को घरों से न निकलने की सलाह दी है।
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स्थानीय रमेश द्विवेदी, राकेश चौधरी, राहुल द्विवेदी, आमिर व इंत्याज अहमद आदि ने बताया कि लगभग 50 घरों में पानी घुस गया है। जिससे लाखों की संपत्ति का नुकसान हुआ है।
लगातार मूसलाधार बारिश होने से राष्ट्रीय राजमार्ग में बनी आधा दर्जन पुलिया की मिट्टी का कटान तेजी से जारी है।
जलभराव से चित्रकूट इलाहाबाद मार्ग बंद हो गया है। लोग अब बस व अन्य साधनों की जगह रेलगाड़ियों का सहारा ले रहे हैं। लोग मुख्यालय के बस स्टैंड में बसों का इंतजार करते हुए भीगने को मजबूर हैं।
चार दिनों से हो रही बारिश से झांसी मिर्जापुर राष्ट्रीय राजमार्ग स्थित अहिरी व सुरौंधा गांव के पास बनी पुलिया की दस-दस मीटर मिट्टी बहने से मार्ग से गुजरने वाले वाहनों की रफ्तार थम गई है। जलभराव होने से हाइवे पर आवागमन बंद है, और दोनों पुलिया के बीच सैकड़ों वाहन फंसे हैं।
वाहनों में बैठे यात्री व चालक भूख प्यास से परेशान हैं। थानाध्यक्ष केशव वर्मा ने बताया कि देर शाम को नाले के पास से बाईपास मार्ग से हल्के व छोटे वाहनों को गुजारा गया। इसके अलावा अब इलाहाबाद आने जाने वाले वाहनों को कौशांबी-राजापुर मार्ग से गुजारा जा रहा है।
कर्वी से इलाहाबाद व इलाहाबाद से बांदा, कानपुर जाने वाली दो दर्जन से अधिक बसें रास्ते में ही फंसी है। रास्ता बंद हो जाने से रोडवेज चालकों ने बसे बस स्टैंड में ही खड़ी कर दी है। हालत यह कि घर न पहुंचने के कारण लोग रिश्तेदारों के घर व धर्मशालाओं में शरण लिए हुए है।
दो दिन के बाद भी अहिरी सुरौन्धा गांव के पास बनी पुलिया को ठीक कराने के लिए लोक निर्माण विभाग के अधिकारी नहीं पहुंचे। जिससे यात्रियों में प्रशासनिक अधिकारियों के प्रति आक्रोश है।
राष्ट्रीय राजमार्ग झांसी मिर्जापुर में यातायात को सुगम बनाने को सरकार ने पुराने रपटों की जगह ऊंची पुलियों का निर्माण कराया था। इस कार्य में अरबों रूपये तो लगा दिये गये पर तकनीकी कमी के कारण पहली ही बरसात में पुलिया निर्माण करने वाले विभाग की पोल खुल गयी है।
बरसात होने से पुलियों में अधिक पानी का जमाव हो गया और आस पास की मिट्टी धस गई है। जिससे यातायात प्रभावित हो रहा है। यात्रियों का कहना है कि इसके पहले तो रपटे ही अच्छे थे। जिनसे पानी कुछ देर बाद निकाल जाता था। नवनिर्मित पुलियों की जांच कर लापरवाही करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।
राष्ट्रीय राजमार्ग में अहिरी, सुरौंध, इटवा, जोखरा, रामनगर, देउधा, लालापुर, कालूपुर में पानी की निकासी के लिए रपटे बने थे। मार्ग को सुगम बनाने के लिए सरकार ने रपटे की जगह पुलियों का निर्माण कर दिया। पुलिया को बनाने में कई साल लग गये लेकिन आज भी कुछ पुलिया अधूरी है।
पुलियों के चालू हो के बाद पहली बरसात में ही इनकी गुणवत्ता की पोल खुल गई है। पानी का बहाव न होने से पुलिया सहित आस पास की मिट्टी बह जाने से यातायात प्रभावित है। यात्रियों का कहना है कि बनायी गई पुलियों में अरबों रूपये खर्च कर दिये गये हैं। तकनीकी की कमी व लंबाई कम होने से पुलिया पहली ही बरसात झेल न सकी।
इस कार्य की जांच कर अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। इस मामले में अपर जिलाधिकारी हवलदार सिंह ने कहा कि बारिश का सीजन खत्म होने के बाद पुलिया निर्माण कराने वाले विभाग के अधिकारियों से बातचीत की जाएगी। ऊंचाई पर बनवाई गई पुलियों में जलभराव नहीं होता लेकिन इस बार उम्मीद से ज्यादा बारिश होने से यह समस्या हुई। यदि मानक विहीन काम हुआ है तो इसकी जांच कराएंगे।