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Chitrakoot News: लाखों का नुकसान, चार-पांच हजार का मुआवजा
Sun, 13 Sep 2026 10:58 PM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चित्रकूट
संवाद न्यूज एजेंसी, चित्रकूट
Updated Sun, 13 Sep 2026 10:58 PM IST
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13 सीकेटीपी-05-दुकानों के सामने मलबा होने के बाद बंद दुकानें। संवाद
चित्रकूट। मंदाकिनी का पानी उतरे एक सप्ताह से अधिक हो गया है, लेकिन रामघाट में तबाही के निशान अब भी बाकी हैं। बाढ़ ने यहां 200 से ज्यादा दुकानें और 100 से अधिक मकानों को उजाड़ दिया।
बाढ़ इतनी तेजी से आई कि दुकानदारों को सामान समेटने तक का मौका नहीं मिला। नुकसान लाखों में है, लेकिन राहत के नाम पर दुकानदारों को सिर्फ पांच हजार रुपये दिए जा रहे हैं। यही रकम अब सबसे बड़ी चिंता बन गई है। दुकानदारों का कहना है कि पांच हजार से न तो दुकान दोबारा शुरू हो सकती है और न ही कर्ज चुकाया जा सकता है। कई दुकानों के सामने अभी भी मलबा और कीचड़ भरा है।
वहीं, बाढ़ का पानी भले ही उतर गया हो, लेकिन रामघाट के कारोबारियों की मुश्किलें कम नहीं हुई हैं। कई दुकानें अभी भी बंद हैं। दुकानदारों का कहना है कि दुकानें खोलने के लिए नया माल खरीदना जरूरी है, लेकिन बाढ़ में पूरी पूंजी डूब जाने के बाद उनके पास सामान खरीदने के लिए पैसे नहीं बचे हैं। ऐसे में राहत राशि और वास्तविक नुकसान के बीच बड़ा अंतर लोगों की परेशानी बढ़ा रहा है।
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जमा पूंजी से दुकान खोली
बाढ़ में दुकान का पूरा सामान और फर्नीचर बह गया। प्रशासन से मिले पांच हजार से दुकान में दोबारा माल भरना संभव नहीं। घर में जो थोड़ी जमा पूंजी थी, उसी से कुछ सामान लाकर दुकान खोलने की कोशिश की है।
-हरिशंकर, गारमेंट्स दुकानदार, रामघाट
लोन लेकर भरा था गोदाम
10 लाख रुपये का लोन लेकर दुकान और गोदाम में सामान भरा था। बाढ़ में सब खराब हो गया। अब कारोबार दोबारा खड़ा करने के साथ बैंक का कर्ज चुकाने की भी चुनौती है। जब नुकसान लाखों का हुआ है तो पांच हजार का मुआवजा किस काम आएगा।
- अंकित अग्रवाल, कारोबारी ऑटो पार्ट्स।
जारी है सर्वे
प्रभावित दुकानों को पांच हजार की सहायता के साथ बर्तन, कपड़े आदि जरूरी सामान दिया जा रहा है। प्रभावित क्षेत्रों में अभी सर्वे चल रहा है। सर्वे के आधार पर आगे मुआवजा वितरण की कार्रवाई की जाएगी।- अजय यादव, एसडीएम कर्वी।
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बाढ़ इतनी तेजी से आई कि दुकानदारों को सामान समेटने तक का मौका नहीं मिला। नुकसान लाखों में है, लेकिन राहत के नाम पर दुकानदारों को सिर्फ पांच हजार रुपये दिए जा रहे हैं। यही रकम अब सबसे बड़ी चिंता बन गई है। दुकानदारों का कहना है कि पांच हजार से न तो दुकान दोबारा शुरू हो सकती है और न ही कर्ज चुकाया जा सकता है। कई दुकानों के सामने अभी भी मलबा और कीचड़ भरा है।
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वहीं, बाढ़ का पानी भले ही उतर गया हो, लेकिन रामघाट के कारोबारियों की मुश्किलें कम नहीं हुई हैं। कई दुकानें अभी भी बंद हैं। दुकानदारों का कहना है कि दुकानें खोलने के लिए नया माल खरीदना जरूरी है, लेकिन बाढ़ में पूरी पूंजी डूब जाने के बाद उनके पास सामान खरीदने के लिए पैसे नहीं बचे हैं। ऐसे में राहत राशि और वास्तविक नुकसान के बीच बड़ा अंतर लोगों की परेशानी बढ़ा रहा है।
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जमा पूंजी से दुकान खोली
बाढ़ में दुकान का पूरा सामान और फर्नीचर बह गया। प्रशासन से मिले पांच हजार से दुकान में दोबारा माल भरना संभव नहीं। घर में जो थोड़ी जमा पूंजी थी, उसी से कुछ सामान लाकर दुकान खोलने की कोशिश की है।
-हरिशंकर, गारमेंट्स दुकानदार, रामघाट
लोन लेकर भरा था गोदाम
10 लाख रुपये का लोन लेकर दुकान और गोदाम में सामान भरा था। बाढ़ में सब खराब हो गया। अब कारोबार दोबारा खड़ा करने के साथ बैंक का कर्ज चुकाने की भी चुनौती है। जब नुकसान लाखों का हुआ है तो पांच हजार का मुआवजा किस काम आएगा।
- अंकित अग्रवाल, कारोबारी ऑटो पार्ट्स।
जारी है सर्वे
प्रभावित दुकानों को पांच हजार की सहायता के साथ बर्तन, कपड़े आदि जरूरी सामान दिया जा रहा है। प्रभावित क्षेत्रों में अभी सर्वे चल रहा है। सर्वे के आधार पर आगे मुआवजा वितरण की कार्रवाई की जाएगी।- अजय यादव, एसडीएम कर्वी।

13 सीकेटीपी-05-दुकानों के सामने मलबा होने के बाद बंद दुकानें। संवाद

13 सीकेटीपी-05-दुकानों के सामने मलबा होने के बाद बंद दुकानें। संवाद

13 सीकेटीपी-05-दुकानों के सामने मलबा होने के बाद बंद दुकानें। संवाद