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दर्द से कराहती प्रसूता को थमाया छुट्टी का लेटर
दर्द से कराहती प्रसूता को थमाया छुट्टी का लेटर
Updated Mon, 08 Oct 2018 11:22 PM IST
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prasuta
- फोटो : amar ujala
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फोटो- 05 सीकेटीपी-6 परिचय-
नवजात की मौत के बाद बीमार प्रसूता का इलाज करने से किया मना
व्हील चेयर पर पत्नी को लेकर डाक्टरों के पास भटकता रहा पति
जानकारी होने पर सीएमएस ने खुद आकर किया इलाज
अमर उजाला ब्यूरो
चित्रकूट। जिला अस्पताल में प्रसव के उपरांत नवजात की मौत होने से प्रसूता की हालत गंभीर हो गई। लेकिन स्टाफ उसका इलाज करने के बजाए छुट्टी देक र गांव जाने का लेटर थमा दिया। दर्द से कराहती प्रसूता के साथ उसका पति व्हील चेयर पर बैठाकर डाक्टर व स्टाफ से पहले इलाज करने की गुहार लगाता रहा। उसकी किसी ने नहीं सुनी। आखिर में जानकारी होते ही सीएमएस पहुंचे और खुद दवा लिखकर उसे भर्ती कराया तब जाकर उसका इलाज शुरू हो पाया।
भरतकूप चौकी क्षेत्र के रौली निवासी रजोला प्रसाद ने बताया कि शनिवार पत्नी कामिनी को घर में तेज प्रसव दर्द होने पर परिजनों की मदद से शिवरामपुर अस्पताल में भर्ती कराया। रविवार प्रसव उपरांत जच्चा -बच्चा की हालत बिगड़ गई। दोनों की हालत गंभीर होने पर जिला अस्पताल रेफर किया गया। इस दौरान नवजात की मौत हो गई। यह उसका पहला बच्चा था। जिला अस्पताल में महिला को भर्ती कराया गया। उसके पति ने आरोप लगाया कि सोमवार की सुबह स्टाफ ने उसकी पत्नी को छुट्टी का पत्र देकर गांव जाने को कहा। जिस पर स्टाफ से कहा गया कि अभी उसकी हालत सही नहीं है एक दिन और रूकने दीजिए लेकिन किसी ने एक न सुनी और बेड खाली करा लिया गया। स्टाफ ने यह कहा कि जब कोई डाक्टर पर्चा लिखकर देगा तभी उसे दुबारा भर्ती कराया जाएगा।
इसके बाद वह व्हील चेयर पर पत्नी को लेकर कई डाक्टरों के पास गया, बताया कि उसकी हालत सही नहीं है। इलाज कर दीजिए लेकिन हर जगह उसे दूसरे नंबर के कमरे में जाने को कहा गया। लगभग एक घंटे बीमार पत्नी को लेकर भटकता रहा। कुछ देर बाद वह सीएमएस डा.राजेश खरे के पास पहुंचा। पूरी जानकारी होते ही सीएमएस ने खुद पर्चे में दवाएं लिखीं और महिला को भर्ती कराया। तब जाकर महिला का इलाज शुरू हुआ।
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नवजात की मौत के बाद बीमार प्रसूता का इलाज करने से किया मना
व्हील चेयर पर पत्नी को लेकर डाक्टरों के पास भटकता रहा पति
जानकारी होने पर सीएमएस ने खुद आकर किया इलाज
अमर उजाला ब्यूरो
चित्रकूट। जिला अस्पताल में प्रसव के उपरांत नवजात की मौत होने से प्रसूता की हालत गंभीर हो गई। लेकिन स्टाफ उसका इलाज करने के बजाए छुट्टी देक र गांव जाने का लेटर थमा दिया। दर्द से कराहती प्रसूता के साथ उसका पति व्हील चेयर पर बैठाकर डाक्टर व स्टाफ से पहले इलाज करने की गुहार लगाता रहा। उसकी किसी ने नहीं सुनी। आखिर में जानकारी होते ही सीएमएस पहुंचे और खुद दवा लिखकर उसे भर्ती कराया तब जाकर उसका इलाज शुरू हो पाया।
भरतकूप चौकी क्षेत्र के रौली निवासी रजोला प्रसाद ने बताया कि शनिवार पत्नी कामिनी को घर में तेज प्रसव दर्द होने पर परिजनों की मदद से शिवरामपुर अस्पताल में भर्ती कराया। रविवार प्रसव उपरांत जच्चा -बच्चा की हालत बिगड़ गई। दोनों की हालत गंभीर होने पर जिला अस्पताल रेफर किया गया। इस दौरान नवजात की मौत हो गई। यह उसका पहला बच्चा था। जिला अस्पताल में महिला को भर्ती कराया गया। उसके पति ने आरोप लगाया कि सोमवार की सुबह स्टाफ ने उसकी पत्नी को छुट्टी का पत्र देकर गांव जाने को कहा। जिस पर स्टाफ से कहा गया कि अभी उसकी हालत सही नहीं है एक दिन और रूकने दीजिए लेकिन किसी ने एक न सुनी और बेड खाली करा लिया गया। स्टाफ ने यह कहा कि जब कोई डाक्टर पर्चा लिखकर देगा तभी उसे दुबारा भर्ती कराया जाएगा।
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इसके बाद वह व्हील चेयर पर पत्नी को लेकर कई डाक्टरों के पास गया, बताया कि उसकी हालत सही नहीं है। इलाज कर दीजिए लेकिन हर जगह उसे दूसरे नंबर के कमरे में जाने को कहा गया। लगभग एक घंटे बीमार पत्नी को लेकर भटकता रहा। कुछ देर बाद वह सीएमएस डा.राजेश खरे के पास पहुंचा। पूरी जानकारी होते ही सीएमएस ने खुद पर्चे में दवाएं लिखीं और महिला को भर्ती कराया। तब जाकर महिला का इलाज शुरू हुआ।
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