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जीवन की अनुपम उपलिब्ध है संगीत, वेबिनार में बोले जगद्गुरु रामभद्राचार्य
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खोही(चित्रकूट) में जगद्गुरु रामभद्राचार्य दिव्यांग विश्वविद्यालय के संगीत विभाग की ओर से आयोजित संत महाकवि तुलसीदास की रचना पर आधारित दो दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय वेबिनार का बृहस्पतिवार को समापन हुआ।
मुख्य अतिथि आजीवन कुलाधिपति जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य ने कहा कि संगीत जीवन की अनुपम उपलब्धि हैं। संत तुलसीदास ने कहा था कि अगर इस संसार सागर को पार करना है, तो भगवान श्रीराम के गुणगान करना होगा। डा. विजयश्री शर्मा अमेरिका, पं. अभय माणके इंदौर, प्रो. निशा झा भागलपुर बिहार, डा. संतोष कुमार सिकिम, डा. अरविंद कुमार पटना, एस पटेल टोरंटो कनाडा, प्रो. के शशि कुमार वाराणसी आदि ने अपने विचार रखें।
अतिथियों का परिचय वेबिनार संयोजक डॉ ज्योति विश्वकर्मा ने कराया। आयोजन के कोऑर्डिनेटर डा. गोपाल कुमार मिश्र ने विशेष सहयोग के लिए डा. राम शंकर सिंह संगीत विभाग बीएचयू व संचालन डा. गोपाल मिश्रा, डा. श्वेता कुमारी, डा. रूचि मिश्रा, आदित्य तिवारी, प्रतीक्षा मिश्रा, डा. मनीष कुमार, पीआरओ एसपी मिश्रा को धन्यवाद ज्ञापित किया।
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मुख्य अतिथि आजीवन कुलाधिपति जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य ने कहा कि संगीत जीवन की अनुपम उपलब्धि हैं। संत तुलसीदास ने कहा था कि अगर इस संसार सागर को पार करना है, तो भगवान श्रीराम के गुणगान करना होगा। डा. विजयश्री शर्मा अमेरिका, पं. अभय माणके इंदौर, प्रो. निशा झा भागलपुर बिहार, डा. संतोष कुमार सिकिम, डा. अरविंद कुमार पटना, एस पटेल टोरंटो कनाडा, प्रो. के शशि कुमार वाराणसी आदि ने अपने विचार रखें।
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अतिथियों का परिचय वेबिनार संयोजक डॉ ज्योति विश्वकर्मा ने कराया। आयोजन के कोऑर्डिनेटर डा. गोपाल कुमार मिश्र ने विशेष सहयोग के लिए डा. राम शंकर सिंह संगीत विभाग बीएचयू व संचालन डा. गोपाल मिश्रा, डा. श्वेता कुमारी, डा. रूचि मिश्रा, आदित्य तिवारी, प्रतीक्षा मिश्रा, डा. मनीष कुमार, पीआरओ एसपी मिश्रा को धन्यवाद ज्ञापित किया।
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