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बहुचचत मामले में अकूत संपत्ति की विवाद की जड़
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चित्रकूट। सपा सरकार में खनिज मंत्री रहे गायत्री प्रजापति को कोर्ट द्वारा दोषी करार दिए जाने के बाद चर्चाओं का बाजार गर्म है। सूत्रों का कहना है कि पूर्व मंत्री पर आरोप लगाने वाली महिला का खनन कार्यों में भी खासा दखल था। इस दौरान अकूत संपत्ति अर्जित की गई। यहीं विवाद की मुख्य वजह भी बनी।
मामले में 2014 में जब लखनऊ में पूर्व मंत्री के खिलाफ महिला ने दुष्कर्म का मामला दर्ज कराया तो राजनीतिक गलियारे में हड़कंप मचा था। बुधवार को लखनऊ की अदालत से मामले में पूर्व मंत्री को दोषी करार दिया गया है। अब 12 नवंबर का इंतजार है जब इस मामले में सजा सुनाई जाएगी।
नगर पालिका क्षेत्र के मोहल्ला निवासी महिला के 2012 में सपा सरकार के मंत्री गायत्री प्रजापति से नजदीकियां बढ़ी थीं। इस दौरान खनन कार्यों में भी महिला की खासी दखलंदाजी हो गई थी। करोड़ों रुपये की चल-अचल संपत्ति भी मंत्री व महिला के नाम होने के आरोप लगे थे। बस इसी अकूत संपत्ति को लेकर विवाद शुरू हुआ। पूर्व मंत्री के ही साथ रहने वाले राठ, हमीरपुर के रामसिंह की भी महिला से दोस्ती हो गई। महिला ने रामसिंह पर भी उसके साथ दुष्कर्म और उसकी संपत्ति हथियाने के लिए बेटी को साथ जाने का आरोप लगाया था। बेटी आज तक नहीं लौटी है।
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इसे लेकर भी पूर्व मंत्री व रामसिंह से महिला में संबंध बिगड़ने लगे थे। इसी बीच महिला ने लखनऊ के एक थाने में पूर्व मंत्री समेत कई पर दुष्कर्म और मारपीट की रिपोर्ट दर्ज कराई तो सियासी गलियारे में भूचाल आ गया। अब अदालत ने पूर्व मंत्री गायत्री प्रजापति समेत आशीष शुक्ला व अशोक तिवारी को दोषी करार दिया है। मामले में चंद्रपाल, अमरेंद्र सिंह पिंटू, विकास वर्मा व रूपेश्वर को निर्दोष करार दिया है।
महिला की राजनीतिक क्षेत्र में काफी पकड़ रही है। सबसे पहले वह सभासद बनी। पालिका अध्यक्ष का चुनाव लड़ा, लेकिन वह हार गईं। सपा शासन काल में इनका सपा नेताओं से संपर्क रहा। पूर्व मंत्री के खिलाफ महिला के बयानों और मामले को लेकर भाजपा के नेताओं ने सपा को घेरा था इससे मामला और गंभीर बन गया।
महिला के दोनों फोन नंबर स्विच ऑफ बताते रहे
महिला ने रामसिंह व उसके साथियों पर घर आकर और रास्ते में असलहों से हमला करने के आरोप लगाए। इसे लेकर राठ हमीरपुर व चित्रकूट की कोतवाली में रामसिंह आदि के खिलाफ रिपोर्ट भी दर्ज है। बुधवार को जब इस पूरे प्रकरण में महिला से जवाब जानने के लिए फोन किया गया तो उसके दोनों फोन नंबर स्विच आफ बताते रहे।
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मामले में 2014 में जब लखनऊ में पूर्व मंत्री के खिलाफ महिला ने दुष्कर्म का मामला दर्ज कराया तो राजनीतिक गलियारे में हड़कंप मचा था। बुधवार को लखनऊ की अदालत से मामले में पूर्व मंत्री को दोषी करार दिया गया है। अब 12 नवंबर का इंतजार है जब इस मामले में सजा सुनाई जाएगी।
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नगर पालिका क्षेत्र के मोहल्ला निवासी महिला के 2012 में सपा सरकार के मंत्री गायत्री प्रजापति से नजदीकियां बढ़ी थीं। इस दौरान खनन कार्यों में भी महिला की खासी दखलंदाजी हो गई थी। करोड़ों रुपये की चल-अचल संपत्ति भी मंत्री व महिला के नाम होने के आरोप लगे थे। बस इसी अकूत संपत्ति को लेकर विवाद शुरू हुआ। पूर्व मंत्री के ही साथ रहने वाले राठ, हमीरपुर के रामसिंह की भी महिला से दोस्ती हो गई। महिला ने रामसिंह पर भी उसके साथ दुष्कर्म और उसकी संपत्ति हथियाने के लिए बेटी को साथ जाने का आरोप लगाया था। बेटी आज तक नहीं लौटी है।
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इसे लेकर भी पूर्व मंत्री व रामसिंह से महिला में संबंध बिगड़ने लगे थे। इसी बीच महिला ने लखनऊ के एक थाने में पूर्व मंत्री समेत कई पर दुष्कर्म और मारपीट की रिपोर्ट दर्ज कराई तो सियासी गलियारे में भूचाल आ गया। अब अदालत ने पूर्व मंत्री गायत्री प्रजापति समेत आशीष शुक्ला व अशोक तिवारी को दोषी करार दिया है। मामले में चंद्रपाल, अमरेंद्र सिंह पिंटू, विकास वर्मा व रूपेश्वर को निर्दोष करार दिया है।
महिला की राजनीतिक क्षेत्र में काफी पकड़ रही है। सबसे पहले वह सभासद बनी। पालिका अध्यक्ष का चुनाव लड़ा, लेकिन वह हार गईं। सपा शासन काल में इनका सपा नेताओं से संपर्क रहा। पूर्व मंत्री के खिलाफ महिला के बयानों और मामले को लेकर भाजपा के नेताओं ने सपा को घेरा था इससे मामला और गंभीर बन गया।
महिला के दोनों फोन नंबर स्विच ऑफ बताते रहे
महिला ने रामसिंह व उसके साथियों पर घर आकर और रास्ते में असलहों से हमला करने के आरोप लगाए। इसे लेकर राठ हमीरपुर व चित्रकूट की कोतवाली में रामसिंह आदि के खिलाफ रिपोर्ट भी दर्ज है। बुधवार को जब इस पूरे प्रकरण में महिला से जवाब जानने के लिए फोन किया गया तो उसके दोनों फोन नंबर स्विच आफ बताते रहे।