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Chitrakoot News: गंभीर हो मरीज की हालत तो जाइए बांदा या प्रयागराज

Mon, 17 Nov 2025 12:14 AM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, चित्रकूट
संवाद न्यूज एजेंसी, चित्रकूट Updated Mon, 17 Nov 2025 12:14 AM IST
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If the patient's condition is serious then go to Banda or Prayagraj.
चित्रकूट। करोड़ों खर्च करके अस्पतालों के भवन बने हैं। इन अस्पतालों में डॉक्टर समेत पैरामेडिकल स्टाफ की तैनाती है। हर महीने इनका वेतन भी निकलता है। फिर भी सरकारी अस्पतालों में गंभीर रोगियों को इलाज नहीं मिलता। जरा सी हालत गंभीर होने पर मरीज को 80 किमी दूर बांदा या फिर 120 किमी दूर प्रयागराज रेफर कर दिया जाता है। मगर वहां तक वो पहुंचते नहीं। रास्ते में ही उनकी सांसें उखड़ जाती हैं।
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अब सड़क हादसों के आंकड़ों पर ही गौर करें तो एक साल में जिले में हुए सड़क हादसों में 158 लोग अपनी जान गवां चुके हैं। इसके पीछे अस्पताल में बेहतर संसाधन व विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी हैं। ऐसे में अगर इन गंभीर रोगियों के इलाज के लिए खोह में बने 200 बेड के अस्पताल को ट्रॉमा सेंटर बना दिया जाए तो शायद उनकी जान बच जाए।
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खोह में सपा शासन काल में बनी दो सौ बेड का मातृ एवं शिशु अस्पताल की आधुनिक मॉडल की बिल्डिंग शोपीस से कम नहीं है। कई बार मांग के बाद डिप्टी सीएम बृजेश पाठक के निर्देश पर ओपीडी चलने लगी है। अब इसमें एलिम्को का भी एक केंद्र खुल गया है। पर जच्चा-बच्चा का इलाज नहीं होता। इसे ट्रॉमा सेंटर बनाने की मांग लंबे समय उठ रही है। वजह, सौ बेड के जिला अस्पताल में विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी है। अक्सर यहां पर कोई एक्सीडेंट या श्वांस की बीमारी का मरीज आते हैं तो उन्हें रेफर किया जाता है। इसके अलावा पांच सीएचसी व पांच पीएचसी भी हैं। इनकी हालत खराब रहती है। सभी महज रेफर सेंटर बनकर रह गए हैं।
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अप्रैल से अब तक रेफर हुए 15 सौ मरीज
चित्रकूट। सरकारी अस्पतालों को रेफर सेंटर कहा जाता है। जिला अस्पताल से ही एक अप्रैल 2025 से नवंबर माह तक कुल 10 हजार 407 भर्ती मरीजों में 1500 को रेफर किया गया है। इस अनुपात में देखें तो लगभग 15 फीसद मरीज जिला अस्पताल से रेफर होते हैं। ऐसा ही आंकडा जब सीएचसी व पीएचसी को देखते हैं तो ज्यादातर जगह में यह 40 फीसद तक हो जाता है। (संवाद)

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फोटो नंबर- 12
व्यवस्थाओं में होना चाहिए सुधार
चित्रकूट। उत्तर प्रदेश उद्योग संगठन के पदाधिकारी, व्यापारी विनोद प्रिंस केसरवानी ने कहा कि स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार जरूरी है। अस्पताल में विशेषज्ञ डॉक्टरों की मौजूदगी होनी चाहिए। इसके लिए सरकार करोड़ों रुपये खर्च कर रही है। ट्रॉमा सेंटर खुलना भी जरूरी है। कई लोगों ने स्वास्थ्य मुद्दे को लेकर प्रदर्शन करने पर सवाल उठाएं हैं जो गलत हैं, स्वास्थ्य का मुद्दा सबसे अहम है और सभी के लिए है। सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार होना ही चाहिए।
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स्वास्थ्य सेवाओं की बेहतरी के प्रयास किए जा रहे हैं। ट्रॉमा सेंटर खुलवाने की आवश्यकता का पत्र पहले भी शासन को भेजा जा चुका है। विशेषज्ञ डॉक्टरों की मांग भी की जा चुकी है। सीमित संसाधन में डाॅक्टर बेहतर इलाज करते हैं। किसी मरीज को जानबूझकर रेफर नहीं किया जाता है।
- डॉ. भूपेश द्विवेदी, सीएमओ
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