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Chitrakoot News: सिलिंडर न मिलने पर होटल-रेस्टोरेंट ने मेन्यू व कुकिंग का बदला सिस्टम
Sat, 21 Mar 2026 12:19 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चित्रकूट
संवाद न्यूज एजेंसी, चित्रकूट
Updated Sat, 21 Mar 2026 12:19 AM IST
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फोटो 20सीकेटीपी 17 मलय वर्मा। संवाद
- फोटो : फुरसतगंज स्थित मस्जिद में नमाज अदा करते अकीदतमंद।
चित्रकूट। व्यावसायिक सिलिंडरों की आपूर्ति बंद होने से धर्मनगरी में होटल और रेस्टोरेंट कारोबार पर गहरा असर पड़ा है। इससे होटल व्यवसायियों को अपने मेन्यू और खाना पकाने के तरीकों में बड़े बदलाव करने पड़ रहे हैं। कई लोकप्रिय व्यंजन अब उनके मेन्यू कार्ड से बाहर हो गए हैं और सगाई जैसे कार्यक्रमों के लिए भोजन की आपूर्ति भी रोक दी गई है। व्यावसायिक सिलिंडरों की आपूर्ति बंद होने के बाद से होटल और रेस्टोरेंट इंडक्शन चूल्हों से काम चला रहे हैं।
शहर के होटल व्यवसायी राजेंद्र कुमार, रामलाल और अरशद खान ने बताया कि उन्होंने मेन्यू में आधे से ज्यादा व्यंजनों में कमी कर दी है। उनके अनुसार, दाल मखनी, तंदूरी कबाब और कुछ खास मांसाहारी व्यंजन जैसे पकवानों को तैयार होने में आठ से 12 घंटे तक धीमी आंच पर पकाना पड़ता है। इन व्यंजनों में अधिक गैस लगती है, जिसकी अनुपलब्धता के कारण इन्हें बनाना बंद कर दिया गया है। अब वे सैंडविच, चाऊमीन, सादा पराठा, पनीर पराठा, शाही पनीर के साथ चावल और कढ़ी जैसे व्यंजन परोस रहे हैं। जिला पूर्ति अधिकारी कमल नयन ने भी व्यावसायिक सिलिंडर बंद होने की पुष्टि की है। बताया कि इन सिलिंडरों के मिलने पर पाबंदी लगी है।
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होटल व्यवसायियों पर सीधा असर
सिविल लाइन स्थित होटल व्यवसायी मलय वर्मा ने बताया कि गैस न मिलने के कारण उन्होंने मेन्यू और कुकिंग में बदलाव किया है। उन्होंने आधे से ज्यादा व्यंजन बनाना बंद कर दिया है और अब पराठे व कढ़ी-चावल से काम चला रहे हैं। वर्मा ने यह भी बताया कि सगाई या अन्य कार्यक्रमों में भोजन की थाली की आपूर्ति भी रोक दी गई है। इस स्थिति ने उनके कारोबार के लिए मुश्किल पैदा कर दी है।
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मेन्यू में कटौती और वैकल्पिक व्यवस्था
पुरानी बाजार निवासी रेस्टोरेंट मालिक कमल केसरवानी ने भी गैस की किल्लत के कारण खाने-पीने का सामान आधा से ज्यादा कम करने की बात कही। उनके रेस्टोरेंट में अब सैंडविच, चाऊमीन और पुलाव जैसे व्यंजन ही बनाए जा रहे हैं। होटल व्यवसायी अब कम गैस खपत वाले या इंडक्शन पर आसानी से बनने वाले व्यंजनों पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। इस बदलाव से ग्राहकों को भी सीमित विकल्प मिल रहे हैं।
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शहर के होटल व्यवसायी राजेंद्र कुमार, रामलाल और अरशद खान ने बताया कि उन्होंने मेन्यू में आधे से ज्यादा व्यंजनों में कमी कर दी है। उनके अनुसार, दाल मखनी, तंदूरी कबाब और कुछ खास मांसाहारी व्यंजन जैसे पकवानों को तैयार होने में आठ से 12 घंटे तक धीमी आंच पर पकाना पड़ता है। इन व्यंजनों में अधिक गैस लगती है, जिसकी अनुपलब्धता के कारण इन्हें बनाना बंद कर दिया गया है। अब वे सैंडविच, चाऊमीन, सादा पराठा, पनीर पराठा, शाही पनीर के साथ चावल और कढ़ी जैसे व्यंजन परोस रहे हैं। जिला पूर्ति अधिकारी कमल नयन ने भी व्यावसायिक सिलिंडर बंद होने की पुष्टि की है। बताया कि इन सिलिंडरों के मिलने पर पाबंदी लगी है।
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होटल व्यवसायियों पर सीधा असर
सिविल लाइन स्थित होटल व्यवसायी मलय वर्मा ने बताया कि गैस न मिलने के कारण उन्होंने मेन्यू और कुकिंग में बदलाव किया है। उन्होंने आधे से ज्यादा व्यंजन बनाना बंद कर दिया है और अब पराठे व कढ़ी-चावल से काम चला रहे हैं। वर्मा ने यह भी बताया कि सगाई या अन्य कार्यक्रमों में भोजन की थाली की आपूर्ति भी रोक दी गई है। इस स्थिति ने उनके कारोबार के लिए मुश्किल पैदा कर दी है।
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मेन्यू में कटौती और वैकल्पिक व्यवस्था
पुरानी बाजार निवासी रेस्टोरेंट मालिक कमल केसरवानी ने भी गैस की किल्लत के कारण खाने-पीने का सामान आधा से ज्यादा कम करने की बात कही। उनके रेस्टोरेंट में अब सैंडविच, चाऊमीन और पुलाव जैसे व्यंजन ही बनाए जा रहे हैं। होटल व्यवसायी अब कम गैस खपत वाले या इंडक्शन पर आसानी से बनने वाले व्यंजनों पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। इस बदलाव से ग्राहकों को भी सीमित विकल्प मिल रहे हैं।

फोटो 20सीकेटीपी 17 मलय वर्मा। संवाद- फोटो : फुरसतगंज स्थित मस्जिद में नमाज अदा करते अकीदतमंद।