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Chitrakoot News: टेलीग्राम पर अश्लीलता परोसने में विदेशी नेटवर्क ने बढ़ाई चिंता
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प्राइवेट चैनल बनाकर अपलोड की जा रही थी प्रतिबंधित सामग्री
सब्सक्रिप्शन से वसूली रकम के तार खंगाल रही साइबर सेल
संवाद न्यूज एजेंसी
चित्रकूट। टेलीग्राम पर प्राइवेट चैनल बनाकर प्रतिबंधित सामग्री के कारोबार के आरोप में फंसे सौरभ मिश्रा तक पुलिस अभी पहुंच नहीं सकी है। लेकिन साइबर सेल की जांच में ऐसे डिजिटल साक्ष्य हाथ लगे हैं, जिनका संबंध विदेशी स्रोतों से जुड़ा बताया जा रहा है। विदेशी कनेक्शन के संकेत मिलने के बाद अब जांच सिर्फ आरोपी की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं रह गई है। मामले में अब अंतरराष्ट्रीय डिजिटल नेटवर्क की तलाश तेज हो गई है। सौरभ मिश्रा पर आरोप है कि वह टेलीग्राम पर निजी चैनल बनाकर लोगों को उससे जोड़ता था। चैनल में प्रवेश के लिए सब्सक्रिप्शन के नाम पर ऑनलाइन भुगतान लिया जाता था। रकम वसूलने के लिए अलग-अलग बैंक खातों, यूपीआई आईडी और क्यूआर कोड का इस्तेमाल किए जाने की जानकारी जांच में सामने आ रही है। इसके बाद इन सभी को प्रतिबंधित सामग्री उपलब्ध कराई जाती थी।
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विदेशी सर्वर तक पहुंची साइबर सेल की जांच
चित्रकूट साइबर सेल अब यह पता लगाने में जुटी है कि आरोपी प्रतिबंधित सामग्री कहां से जुटाता था। इसके लिए टेलीग्राम आईडी, आईपी एड्रेस, ईमेल, मोबाइल नंबर और ऑनलाइन भुगतान के रिकॉर्ड खंगाले जा रहे हैं। जांच की एक दिशा विदेशी सर्वर और दूसरे देशों से जुड़े डिजिटल प्लेटफॉर्म तक भी पहुंच रही है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या आरोपी खुद सामग्री जुटाता था या किसी बड़े नेटवर्क के जरिये उसे उपलब्ध कराया जाता था? पुलिस इसी कड़ी को जोड़ने में लगी है। डिजिटल रिकॉर्ड से जुड़े विदेशी लिंक की पुष्टि होने पर जांच का दायरा और बढ़ सकता है।
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दस ठिकानों पर दबिश, फिर भी हाथ खाली
प्राथमिकी दर्ज होने के बाद पुलिस और साइबर टीम आरोपी की तलाश में जिले के अलावा दूसरे जनपदों में करीब दस ठिकानों पर दबिश दे चुकी है। इसके बावजूद आरोपी हाथ नहीं आया। पुलिस सूत्रों के अनुसार आरोपी लगातार अपनी लोकेशन बदल रहा है और उसके मोबाइल नंबर बंद हैं। मोबाइल बंद होने के बाद पुलिस ने अब डिजिटल सुरागों पर जोर दिया है। टेलीग्राम आईडी से लेकर बैंक खाते, यूपीआई ट्रांजैक्शन, क्यूआर कोड और ईमेल तक की कड़ियां जोड़ी जा रही हैं।
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आईडी असली या फर्जी, यही सबसे बड़ा पेच
जांच में यह भी पेच सामने आया है कि जिस टेलीग्राम आईडी के आधार पर आरोपी तक पहुंचने की कोशिश की जा रही है, वह उसकी वास्तविक पहचान से जुड़ी है या फर्जी नाम-पते पर बनाई गई है। साइबर सेल डिजिटल फुटप्रिंट के जरिये आईडी के वास्तविक इस्तेमालकर्ता की पहचान करने में जुटी है। अगर आईडी फर्जी पहचान पर बनाई गई है तो आरोपी ने अपनी पहचान छिपाने के लिए किस स्तर की डिजिटल सावधानी बरती थी, यह भी जांच का अहम हिस्सा है।
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पहले भी सामने आ चुका है विदेशी लिंक पुलिस सूत्रों के मुताबिक जिले में इस तरह के अपराध की जांच में विदेशी प्लेटफॉर्म या डिजिटल नेटवर्क का लिंक का यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले जेई रामभवन से जुड़े मामले की जांच में भी विदेशी प्लेटफॉर्म से कनेक्शन की बात सामने आई थी। अब नए मामले में भी इसी तरह के डिजिटल संकेत मिलने से साइबर सेल की चुनौती बढ़ गई है।
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बोले जिम्मेदार आईटी एक्ट सहित गंभीर धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की गई है। आरोपी की असली पहचान और लोकेशन ट्रेस की जा रही है। सर्विलांस टीम लगातार सक्रिय है और जल्द गिरफ्तारी का प्रयास किया जा रहा है। -अरुण कुमार सिंह, एसपी
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सब्सक्रिप्शन से वसूली रकम के तार खंगाल रही साइबर सेल
संवाद न्यूज एजेंसी
चित्रकूट। टेलीग्राम पर प्राइवेट चैनल बनाकर प्रतिबंधित सामग्री के कारोबार के आरोप में फंसे सौरभ मिश्रा तक पुलिस अभी पहुंच नहीं सकी है। लेकिन साइबर सेल की जांच में ऐसे डिजिटल साक्ष्य हाथ लगे हैं, जिनका संबंध विदेशी स्रोतों से जुड़ा बताया जा रहा है। विदेशी कनेक्शन के संकेत मिलने के बाद अब जांच सिर्फ आरोपी की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं रह गई है। मामले में अब अंतरराष्ट्रीय डिजिटल नेटवर्क की तलाश तेज हो गई है। सौरभ मिश्रा पर आरोप है कि वह टेलीग्राम पर निजी चैनल बनाकर लोगों को उससे जोड़ता था। चैनल में प्रवेश के लिए सब्सक्रिप्शन के नाम पर ऑनलाइन भुगतान लिया जाता था। रकम वसूलने के लिए अलग-अलग बैंक खातों, यूपीआई आईडी और क्यूआर कोड का इस्तेमाल किए जाने की जानकारी जांच में सामने आ रही है। इसके बाद इन सभी को प्रतिबंधित सामग्री उपलब्ध कराई जाती थी।
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विदेशी सर्वर तक पहुंची साइबर सेल की जांच
चित्रकूट साइबर सेल अब यह पता लगाने में जुटी है कि आरोपी प्रतिबंधित सामग्री कहां से जुटाता था। इसके लिए टेलीग्राम आईडी, आईपी एड्रेस, ईमेल, मोबाइल नंबर और ऑनलाइन भुगतान के रिकॉर्ड खंगाले जा रहे हैं। जांच की एक दिशा विदेशी सर्वर और दूसरे देशों से जुड़े डिजिटल प्लेटफॉर्म तक भी पहुंच रही है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या आरोपी खुद सामग्री जुटाता था या किसी बड़े नेटवर्क के जरिये उसे उपलब्ध कराया जाता था? पुलिस इसी कड़ी को जोड़ने में लगी है। डिजिटल रिकॉर्ड से जुड़े विदेशी लिंक की पुष्टि होने पर जांच का दायरा और बढ़ सकता है।
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दस ठिकानों पर दबिश, फिर भी हाथ खाली
प्राथमिकी दर्ज होने के बाद पुलिस और साइबर टीम आरोपी की तलाश में जिले के अलावा दूसरे जनपदों में करीब दस ठिकानों पर दबिश दे चुकी है। इसके बावजूद आरोपी हाथ नहीं आया। पुलिस सूत्रों के अनुसार आरोपी लगातार अपनी लोकेशन बदल रहा है और उसके मोबाइल नंबर बंद हैं। मोबाइल बंद होने के बाद पुलिस ने अब डिजिटल सुरागों पर जोर दिया है। टेलीग्राम आईडी से लेकर बैंक खाते, यूपीआई ट्रांजैक्शन, क्यूआर कोड और ईमेल तक की कड़ियां जोड़ी जा रही हैं।
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आईडी असली या फर्जी, यही सबसे बड़ा पेच
जांच में यह भी पेच सामने आया है कि जिस टेलीग्राम आईडी के आधार पर आरोपी तक पहुंचने की कोशिश की जा रही है, वह उसकी वास्तविक पहचान से जुड़ी है या फर्जी नाम-पते पर बनाई गई है। साइबर सेल डिजिटल फुटप्रिंट के जरिये आईडी के वास्तविक इस्तेमालकर्ता की पहचान करने में जुटी है। अगर आईडी फर्जी पहचान पर बनाई गई है तो आरोपी ने अपनी पहचान छिपाने के लिए किस स्तर की डिजिटल सावधानी बरती थी, यह भी जांच का अहम हिस्सा है।
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पहले भी सामने आ चुका है विदेशी लिंक पुलिस सूत्रों के मुताबिक जिले में इस तरह के अपराध की जांच में विदेशी प्लेटफॉर्म या डिजिटल नेटवर्क का लिंक का यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले जेई रामभवन से जुड़े मामले की जांच में भी विदेशी प्लेटफॉर्म से कनेक्शन की बात सामने आई थी। अब नए मामले में भी इसी तरह के डिजिटल संकेत मिलने से साइबर सेल की चुनौती बढ़ गई है।
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बोले जिम्मेदार आईटी एक्ट सहित गंभीर धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की गई है। आरोपी की असली पहचान और लोकेशन ट्रेस की जा रही है। सर्विलांस टीम लगातार सक्रिय है और जल्द गिरफ्तारी का प्रयास किया जा रहा है। -अरुण कुमार सिंह, एसपी