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पहाड़ों की आग नियंत्रित, बिना छिड़काव लौटी वायुसेना की टीम
अमर उजाला चित्रकूट
Updated Sun, 01 Apr 2018 11:35 PM IST
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जंगल में लगी आग को बुझाते लोग
- फोटो : अमर उजाला
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चित्रकूट। जिले के देवांगना समेत अन्य पहाड़ों पर लगी आग को बुझाने आए वायुसेना के हेलीकाप्टर से पानी छिड़काव की जरूरत नहीं पड़ी और रात में ही आग पर नियंत्रण होने से हेलीकाप्टर दो बार सर्वे कर लौट गया। इसके बावजूद जंगल में आग सुलग रही है। जिस पर प्रशासनिक अधिकारियों का दावा है कि यह मामूली और प्रतिवर्ष लगने वाली आग है। ज्यादा नुकसान वाली आग पर नियंत्रण हो चुका है।
जंगलों में चार दिन से आग का तांडव जारी रहने के बाद जब मंदिर मठ, ऐतिहासिक स्थल और करोड़ों की वन संपदा के नुकसान होने की संभावना बढ़ी तो जिला प्रशासन ने वायुसेना की मदद ली। शनिवार को डीएम विशाख जी अययर के प्रयास से वायुेसना के दो हेलीकॉप्टर आए और जंगल का सर्वे किया था। देर शाम को जनहानि, जीव जंतु हानि और हेलीकॉप्टर में कम ईंधन होने के कारण तय हुआ था कि रविवार सुबह जंगल में पानी का छिड़काव कराया जाएगा। इसकी तैयारी पूरी हो चुकी थी। सुबह लगभग छह बजे वायुसेना का एमआई 17 वी 5 विशेष विमान लेकर नागपुर टीम के छह सदस्य पहुंचे।
गुंता बांध से पानी लेने के पहले टीम प्रभारी स्कवार्डन पंकज शर्मा ने हेलीकॉप्टर देवांगना हवाई पट्टी पर उतरवाया। यहां से प्रशासनिक व वन विभाग के अधिकारियों को लेकर पहले आग वाले वन क्षेत्र का हवाई सर्वे किया। जिस पर पाया गया है कि आग की विभीषिका काफी कम हो गई है और अब इसके लिए हेलीकॉप्टर से पानी छिड़काव की जरूरत नहीं है।
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सर्वे के बाद लौटे वायुसेना के टीम प्रभारी ने डीएम को पूरे मामले की जानकारी दी। मौके पर मौजूद एसडीएम सत्यप्रकाश(आईएएस) व एसडीओ संजय अग्रवाल(वन विभाग) ने भी पूरी रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को दी। डीएफओ आरके त्रिपाठी व रेंजर नरेंद्र सिंह ने दावा किया कि अब आग बेहद कम है और यह इस मौसम में सामान्य है। जिस आसानी से नियंत्रित कर लेंगे। बैठक के बाद सुबह नौ बजे वायुसेना का हेलीकॉप्टर इलाहाबाद की ओर रवाना हो गया। इस मौके पर एडीएम विजय नारायण पांडेय, एसडीएम दुर्गेश मिश्रा व अपर एसपी बलवंत चौधरी, तहसीलदार राजू वर्मा,नायब राजेश विश्वकर्मा व सीओ सुरेश शर्मा भी मौजूद रहे।
आग से हुआ काफी नुकसान
चित्रकूट। भले ही जंगल में लगी आग को बुझाने के लिए आया वायुसेना का हेलीकाप्टर लौट गया है लेकिन सुलगती आग को नियंत्रित करने का काम जारी है। वनाधिकारियों का मानना है कि आग से लगभग 20 स्थानों पर लाखों की जड़ी बूटी वाले पौधे और सैकड़ों जीव-जंतु मर चुके हैं।
डीएफओ आरके त्रिपाठी व एसडीओ संजय अग्रवाल ने बताया कि इस मौसम में इस क्षेत्र के पहाड़ों पर अक्सर आग लगती है। कभी खेतों में लगी आग, कभी महुंआ बीनने वालों द्वारा पत्तों में आग लगाने और बीड़ी सिगरेट पीकर जंगल में फेंकने से उसकी चिंगारी से आग जंगल के कीमती पेड़ों तक पहुंचती है। इन दिनों बरगढ़, लौरी, मरजादपुर, देवांगना, सिद्धपुर, कोलगदिहया के जंगलों में आग लगी थी। वन विभाग के अधिकारियों ने माना है कि इस आग से मूल्यवान लैटना, वन तुलसी, तेंदू पत्ता व बांस का ज्यादा नुकसान हुआ है। इसके अलावा लगभग एक सैकड़ा खरगोश, गिलहरी, चूहे, सांप व बंदरों की मौत हुई है।
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जंगलों में चार दिन से आग का तांडव जारी रहने के बाद जब मंदिर मठ, ऐतिहासिक स्थल और करोड़ों की वन संपदा के नुकसान होने की संभावना बढ़ी तो जिला प्रशासन ने वायुसेना की मदद ली। शनिवार को डीएम विशाख जी अययर के प्रयास से वायुेसना के दो हेलीकॉप्टर आए और जंगल का सर्वे किया था। देर शाम को जनहानि, जीव जंतु हानि और हेलीकॉप्टर में कम ईंधन होने के कारण तय हुआ था कि रविवार सुबह जंगल में पानी का छिड़काव कराया जाएगा। इसकी तैयारी पूरी हो चुकी थी। सुबह लगभग छह बजे वायुसेना का एमआई 17 वी 5 विशेष विमान लेकर नागपुर टीम के छह सदस्य पहुंचे।
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गुंता बांध से पानी लेने के पहले टीम प्रभारी स्कवार्डन पंकज शर्मा ने हेलीकॉप्टर देवांगना हवाई पट्टी पर उतरवाया। यहां से प्रशासनिक व वन विभाग के अधिकारियों को लेकर पहले आग वाले वन क्षेत्र का हवाई सर्वे किया। जिस पर पाया गया है कि आग की विभीषिका काफी कम हो गई है और अब इसके लिए हेलीकॉप्टर से पानी छिड़काव की जरूरत नहीं है।
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सर्वे के बाद लौटे वायुसेना के टीम प्रभारी ने डीएम को पूरे मामले की जानकारी दी। मौके पर मौजूद एसडीएम सत्यप्रकाश(आईएएस) व एसडीओ संजय अग्रवाल(वन विभाग) ने भी पूरी रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को दी। डीएफओ आरके त्रिपाठी व रेंजर नरेंद्र सिंह ने दावा किया कि अब आग बेहद कम है और यह इस मौसम में सामान्य है। जिस आसानी से नियंत्रित कर लेंगे। बैठक के बाद सुबह नौ बजे वायुसेना का हेलीकॉप्टर इलाहाबाद की ओर रवाना हो गया। इस मौके पर एडीएम विजय नारायण पांडेय, एसडीएम दुर्गेश मिश्रा व अपर एसपी बलवंत चौधरी, तहसीलदार राजू वर्मा,नायब राजेश विश्वकर्मा व सीओ सुरेश शर्मा भी मौजूद रहे।
आग से हुआ काफी नुकसान
चित्रकूट। भले ही जंगल में लगी आग को बुझाने के लिए आया वायुसेना का हेलीकाप्टर लौट गया है लेकिन सुलगती आग को नियंत्रित करने का काम जारी है। वनाधिकारियों का मानना है कि आग से लगभग 20 स्थानों पर लाखों की जड़ी बूटी वाले पौधे और सैकड़ों जीव-जंतु मर चुके हैं।
डीएफओ आरके त्रिपाठी व एसडीओ संजय अग्रवाल ने बताया कि इस मौसम में इस क्षेत्र के पहाड़ों पर अक्सर आग लगती है। कभी खेतों में लगी आग, कभी महुंआ बीनने वालों द्वारा पत्तों में आग लगाने और बीड़ी सिगरेट पीकर जंगल में फेंकने से उसकी चिंगारी से आग जंगल के कीमती पेड़ों तक पहुंचती है। इन दिनों बरगढ़, लौरी, मरजादपुर, देवांगना, सिद्धपुर, कोलगदिहया के जंगलों में आग लगी थी। वन विभाग के अधिकारियों ने माना है कि इस आग से मूल्यवान लैटना, वन तुलसी, तेंदू पत्ता व बांस का ज्यादा नुकसान हुआ है। इसके अलावा लगभग एक सैकड़ा खरगोश, गिलहरी, चूहे, सांप व बंदरों की मौत हुई है।