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हर साल कोई न कोई जिंदगी जमीन में होती रही दफन

Sat, 18 Sep 2021 12:05 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Sat, 18 Sep 2021 12:05 AM IST
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Every year some life was buried in the ground
चित्रकूट/ मऊ। बारिश होने से गरीबों के कच्चे घर गिरने से हर साल कोई न कोई जिंदगी जमीन मेें दफन होती रही है। गरीबी की लाचारी व मजबूरी मेें कच्चे घर जो रहने लायक भी अब नहीं है। उनमें रहने को मजबूर ग्रामीण अपनी जान गवा रहे हैं। कई तो अभी आशा लगाएं हुए है कि उन्हें सरकार से पक्का मकान मिल जाएगा तो कच्चे मकान से छुटकारा मिल जाएगा। अकेले मऊ क्षेत्र में हर साल बारिश के दौरान दर्दनाक हादसे होते रहे हैं। अभी तीन दिन की बात करें तो एक दिन पूर्व ही तिलौली गांव में दीवार ढहने से मलबे में दबे मासूम की मौत हुई और अब दो मासूम समेत उनकी मां की भी मौत ने सबको हिला कर रख दिया है।
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जिले मेें ग्रामीण क्षेत्र में अधिकतर के पास आज भी कच्चे घर है। जिसमें अपने परिवार सहित रहते है। अधिकतर मकान जीर्णशीर्ण अवस्था में पहुुंच गये है। जो कभी भी बारिश के कारण गिर सकते है। जिससे बड़ी घटना हो सकती है।ऐसे घरों को चिंह्ति भी नहीं किया जाता। बारिश होने से कच्चे घरों के गिरने की घटनाये पिछले साल भी मऊ क्षेत्र में अधिक हुई थी। इस बार भी दो दिन के अंदर दो बड़ी घटनाएं हो गई। जिससे मऊ क्षेत्र में कच्चे घरों में रहने वाले ग्रामीण डरे हुए है कि कहीं उनके भी घर गिरने से घटना न हो जाएं।
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मऊ क्षेत्र मेें एक दिन पहले चंदई तिलौली गांव में कच्चा घर गिरने से मां ऊषा देवी व उसका मासूम बालक सत्यम दब गये थे। जिसमें बच्चे की मौत हो गई थी मां बाल बाल बच गई थी। मऊ क्षेत्र में ही दो साल पहले हन्ना गांव में दीवार गिरने से चार की मौत हो गई थी। एक साल पहले रामनगर क्षेत्र के एक गांव मे घर के सामने बिस्कुट खा रही दो बहनों की मौत एक गांव में हो गई थी। दो दिन पहले जिला मुख्यालय में खटकाना मोहल्ले में कच्चा घर गिरने से एक महिला की मौत हो गई थी। इस तरह से बरसात के समय कच्चा घर व दीवारे गिरने से हर साल घटनाएं होती है। इसके बाद भी ऐसे घर चिंहित नहीं किये जाते जिससे घटना होने की संभावना अधिक रहती है। (संवाद)
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मां यशोदा के गोद में मिले दोनों बच्चों के शव
मऊ। करही गांव में दर्दनाक मंजर में जब मलबा हटा तो मृतका यशोदा देवी का शव बच्चों को गोद में दबा मिला था। मां की ममता देख सभी के आंसू निकल पड़े।
अनुमान है कि मलबा गिरते ही उसने ऋषि व रिया को खींचकर अपनी गोद में छिपा लिया ताकि वह बच सकें। पूरा मलबा उसके ऊपर पड़ा था। यशोदा के हाथ में लगी मिट्टी यह बता रही थी कि उसने मलबे को हटाने की काफी कोशिश की होगी लेकिन लोहे की टिन से उसके सिर व शरीर में चोट लगी जिससे वह कुछ देर में हिम्मत हार गई।

सास के कहने पर रुक गई थी यशोदा
परिजनों के मुताबिक सुबह से बारिश के कारण पति-पत्नी खेत नहीं गये थे तो यशोदा की सास रन्नो देवी ने जिद्कर कहा कि वह बच्चों के लिए घर में खाना बनाए वह खुद खेत की रखवाली करने जा रही है। दोपहर को बारिश थमने के बाद पति पत्नी को खेत ही जाना था लेकिन ऐसा नहीं हो सका। करही निवासी किसान अजय सिंह पटेल व उसका भाई अनिल सिंह एक साथ एक ही घर में रहते हैं। कुछ दिन पूर्व ही अनिल की पत्नी व एक बालक ननिहाल चले गये हैं। स्थानीय लोगों ने बताया कि अनिल का पुत्र भी ऋषि व रिया के साथ ही भोजन करता था। उनके साथ हमेशा खेलता रहता था। यदि वह होता तो वह भी खाना खाते समय जरूर होता।
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