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जिले के आठ गांव, कुपोषण से मुक्त
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चित्रकूट। जिले में चिन्हित 20 सुपोषित गांव में से 8 गांव कुपोषण से मुक्त हो चुके हैं। जिला कार्यक्रम अधिकारी ने यह दावा किया है कि स्वास्थ्य, शिक्षा आईसीडीएस सहित सभी सहयोगी विभागों के सम्मिलित प्रयास से यह सफ लता मिली है।
जिला कार्यक्रम अधिकारी मनोज कुमार ने बताया कि छिवलहा, बंबुरा, परदवां, मुरका, चकजाफर, भुईहरीमाफी, भानपुर, प्रसिद्धपुर, पियरिया माफी, घुरेहटा, विपरौंद, धधवार, देवकली, मगरहाई, सकरौंहा, रानीपुर, इतरौर भीशमपुर, बगलई, बालापुर, डिलौरा सहित 20 गांव सुपोषित गांव के लिए चिन्हित किए गए थे। बताया कि स्वास्थ, खाद्य एवं रसद, मनरेगा, जिला पंचायत, बेसिक शिक्षा सहित सभी छह विभागों ने मिलकर टीम भावना से काम किया और आठ गांव कुपोषण से मुक्त हो पाये। उन्होंने बताया कि इन गांवों में स्वास्थ्य, खाद्य एवं रसद, मनरेगा, जिला पंचायत, बेसिक शिक्षा आदि विभाग अपने काम की बराबर मॉनिटरिंग करते रहे हैं और जिस विभाग से जो सहयोग चाहिए उसके लिए तालमेल बैठाकर काम किया तभी सफलता प्राप्त हुई है।
कोई एक विभाग यह काम अकेले नहीं कर पाता। इन गांव में मिले अति कुपोषित बच्चों को आंगनबाड़ी केंद्र में एएनएम से चिकित्सीय परामर्श के बाद पोषण पुनर्वास केंद्र में भर्ती करा कर उन्हे उचित इलाज और आहार देकर स्वस्थ बनाया गया है। जिला कार्यक्रम अधिकारी के मुताबिक छिवलहा, भूईहरीमाफ ी, पियरियामाफ ी, ढ़ढवार, देवकली, सकरौंहा, बगलई, डिलौरा आदि आठ गांव कुपोषण से मुक्त हो चुके हैं। इन गांवों में अब कोई बच्चा लाल व पीली श्रेणी में नहीं बचा है। जिला कार्यक्त्रस्म अधिकारी ने बताया कि उपरोक्त गांवों में चिन्हित बच्चों के परिवारों में एमसीपी (मदर चाइल्ड प्रोटेक्शन) कार्ड, राशन कार्ड, मनरेगा से जॉब कार्ड, समुचित साफ सफाई (शौचालय) की व्यवस्था, सभी परिवारों के लिए उचित पेयजल की व्यवस्था सम्मिलित प्रयास से करा दी गई है।
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जिला कार्यक्रम अधिकारी मनोज कुमार ने बताया कि छिवलहा, बंबुरा, परदवां, मुरका, चकजाफर, भुईहरीमाफी, भानपुर, प्रसिद्धपुर, पियरिया माफी, घुरेहटा, विपरौंद, धधवार, देवकली, मगरहाई, सकरौंहा, रानीपुर, इतरौर भीशमपुर, बगलई, बालापुर, डिलौरा सहित 20 गांव सुपोषित गांव के लिए चिन्हित किए गए थे। बताया कि स्वास्थ, खाद्य एवं रसद, मनरेगा, जिला पंचायत, बेसिक शिक्षा सहित सभी छह विभागों ने मिलकर टीम भावना से काम किया और आठ गांव कुपोषण से मुक्त हो पाये। उन्होंने बताया कि इन गांवों में स्वास्थ्य, खाद्य एवं रसद, मनरेगा, जिला पंचायत, बेसिक शिक्षा आदि विभाग अपने काम की बराबर मॉनिटरिंग करते रहे हैं और जिस विभाग से जो सहयोग चाहिए उसके लिए तालमेल बैठाकर काम किया तभी सफलता प्राप्त हुई है।
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कोई एक विभाग यह काम अकेले नहीं कर पाता। इन गांव में मिले अति कुपोषित बच्चों को आंगनबाड़ी केंद्र में एएनएम से चिकित्सीय परामर्श के बाद पोषण पुनर्वास केंद्र में भर्ती करा कर उन्हे उचित इलाज और आहार देकर स्वस्थ बनाया गया है। जिला कार्यक्रम अधिकारी के मुताबिक छिवलहा, भूईहरीमाफ ी, पियरियामाफ ी, ढ़ढवार, देवकली, सकरौंहा, बगलई, डिलौरा आदि आठ गांव कुपोषण से मुक्त हो चुके हैं। इन गांवों में अब कोई बच्चा लाल व पीली श्रेणी में नहीं बचा है। जिला कार्यक्त्रस्म अधिकारी ने बताया कि उपरोक्त गांवों में चिन्हित बच्चों के परिवारों में एमसीपी (मदर चाइल्ड प्रोटेक्शन) कार्ड, राशन कार्ड, मनरेगा से जॉब कार्ड, समुचित साफ सफाई (शौचालय) की व्यवस्था, सभी परिवारों के लिए उचित पेयजल की व्यवस्था सम्मिलित प्रयास से करा दी गई है।
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