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पशुओं को उद्यमिता के रूप में अपना कमाएं लाभ
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फोटो-7- कृषिभवन के सभागार में प्रशिक्षणके दौरान जानकारी देते उपकृषि निदेशक। संवाद
- फोटो : CHITRAKOOT
चित्रकूट। कृषि विभाग के आईटीसी मिशन सुनहरा कल के अंतर्गत पशुपालन प्रबंधन, पशु टीकाकरण एवं नस्ल सुधर विषय पर मास्टर ट्रेनर प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन कृषि विभाग के सभागार में हुआ। पशुविभाग के पैरावेट कर्मचारियों को पशु प्रबंधन और उनके गर्भाधान का प्रशिक्षण दिया गया।
जिला कृषि अधिकारी आरपी शुक्ल ने कहा कि हम पशुओं को उद्यमिता के रूप में अपनाकर लाभ कमा सकते है। इसके लिए बेहतर पशु धन प्रबंधन और दूध उत्पादन करना होगा।
पशुपालन विभाग के डॉॅॅ. गोपेश श्रीवास्तव ने कहा कि गाय फरवरी-मार्च में और भैंस सर्दी के मौसम में गर्भित होती है। कहा कि कृत्रिम गर्भाधान से कई लाभ हैं। इसमें बीमारियां कम होती हैं। उत्तम नस्ल के साड़ों के वीर्य की उपलब्धता रहती है। सही समय पर गर्भाधान हो जाता है।
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डॉ. चंद्रशेखर पाल ने गायों की स्वदेशी नस्ल राठी, गिरि, रेड सिंधी, साहिवाल के बारे में जानकारी दी। बताया कि इस नस्ल की गाय अच्छा दूध देने के साथ दूध में वसा भी रहता है। पशुपालन विभाग के डॉ. वृंदावन राठौर, डॉ. वृजेंद्र लोधी, कुलदीप सिंह, संजय सिंह, वीरेंद्र सिंह और डॉ. संजय सिंह मौजूद रहे।
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जिला कृषि अधिकारी आरपी शुक्ल ने कहा कि हम पशुओं को उद्यमिता के रूप में अपनाकर लाभ कमा सकते है। इसके लिए बेहतर पशु धन प्रबंधन और दूध उत्पादन करना होगा।
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पशुपालन विभाग के डॉॅॅ. गोपेश श्रीवास्तव ने कहा कि गाय फरवरी-मार्च में और भैंस सर्दी के मौसम में गर्भित होती है। कहा कि कृत्रिम गर्भाधान से कई लाभ हैं। इसमें बीमारियां कम होती हैं। उत्तम नस्ल के साड़ों के वीर्य की उपलब्धता रहती है। सही समय पर गर्भाधान हो जाता है।
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डॉ. चंद्रशेखर पाल ने गायों की स्वदेशी नस्ल राठी, गिरि, रेड सिंधी, साहिवाल के बारे में जानकारी दी। बताया कि इस नस्ल की गाय अच्छा दूध देने के साथ दूध में वसा भी रहता है। पशुपालन विभाग के डॉ. वृंदावन राठौर, डॉ. वृजेंद्र लोधी, कुलदीप सिंह, संजय सिंह, वीरेंद्र सिंह और डॉ. संजय सिंह मौजूद रहे।