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डीएनए, फिंगर प्रिंट से खुलते गूढ़ रहस्य
ब्यूरो/ अमर उजाला, चित्रकूट
Updated Thu, 02 Apr 2015 10:50 PM IST
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सीसीएमवी हैदराबाद के निदेशक डॉ. लालजी सिंह ने कहा कि डीएनए और फिंगर
प्रिंट से मनुष्यों एवं पेड़ पौधों के विभिन्न प्रजातियों के गूढ़ रहस्य का
पता लगाया जा सकता है।
वे गुरुवार को महात्मा गांधी चित्रकूट ग्रामोदय विश्वविद्यालय के अमर्त्य सेन सभागार में विज्ञान एवं पर्यावरण संकाय द्वारा आयोजित विज्ञान विषयक विशिष्ट व्याख्यान को मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे।
डॉ. लालजी सिंह ने कहा कि अपराध के रहस्यों को जानने, औषधियों की गुणवत्ता को उद्घाटित करने, बायोटेक्नॉलोजी एवं बीज उन्नतिकरण आदि क्षेत्रों के विकास एवं उन्नयन में यह तकनीक अत्यंत लाभकारी है। कई घटनाओं का उदाहरण भी दिया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे कुलपति प्रो. नरेश चंद्र गौतम ने कहा कि फिंगर प्रिंटिंग आधुनिक तकनीक है, जिसका विकास तेजी से हुआ है। इसके माध्यम से वांशिकी परीक्षण कर पारिवारिक संबंधों को उजागर करने एवं अपराधियों की पहचान इत्यादि क्षेत्रों में अभूतपूर्व सफलता मिली है।
प्रो. गौतम ने इस तकनीक के रोजगार में नवीन अवसरों पर चर्चा की। विज्ञान एवं पर्यावरण संकाय के अधिष्ठाता प्रो. इंद्र प्रसाद त्रिपाठी ने कार्यक्रम के उद्देश्य बताए। संचालन प्राध्यापक डॉ. वंदना पाठक ने एवं आभार प्रो. इंद्र प्रसाद त्रिपाठी ने जताया।
वे गुरुवार को महात्मा गांधी चित्रकूट ग्रामोदय विश्वविद्यालय के अमर्त्य सेन सभागार में विज्ञान एवं पर्यावरण संकाय द्वारा आयोजित विज्ञान विषयक विशिष्ट व्याख्यान को मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे।
डॉ. लालजी सिंह ने कहा कि अपराध के रहस्यों को जानने, औषधियों की गुणवत्ता को उद्घाटित करने, बायोटेक्नॉलोजी एवं बीज उन्नतिकरण आदि क्षेत्रों के विकास एवं उन्नयन में यह तकनीक अत्यंत लाभकारी है। कई घटनाओं का उदाहरण भी दिया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे कुलपति प्रो. नरेश चंद्र गौतम ने कहा कि फिंगर प्रिंटिंग आधुनिक तकनीक है, जिसका विकास तेजी से हुआ है। इसके माध्यम से वांशिकी परीक्षण कर पारिवारिक संबंधों को उजागर करने एवं अपराधियों की पहचान इत्यादि क्षेत्रों में अभूतपूर्व सफलता मिली है।
प्रो. गौतम ने इस तकनीक के रोजगार में नवीन अवसरों पर चर्चा की। विज्ञान एवं पर्यावरण संकाय के अधिष्ठाता प्रो. इंद्र प्रसाद त्रिपाठी ने कार्यक्रम के उद्देश्य बताए। संचालन प्राध्यापक डॉ. वंदना पाठक ने एवं आभार प्रो. इंद्र प्रसाद त्रिपाठी ने जताया।