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देश में संस्कारों की कमी से विचलित स्वतंत्रता सेनानी

Sun, 14 Aug 2016 11:12 PM IST
चित्रकूट
चित्रकूट Updated Sun, 14 Aug 2016 11:12 PM IST
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Distracted by the lack of values in the country, freedom fighter
अमर उजाला से बातचीत करते स्वतंत्रता संग्राम सेनानी भुवनेश्वर प्रसाद व उनकी पत्नी शांति देवी। - फोटो : अमर उजाला

जिले के स्वतंत्रता संग्राम सेनानी भुवनेश्वर प्रसाद देश की 70वीं वर्ष गांठ मनाने को उत्साहित हैं। हर साल की तरह इस बार भी वह जिले मेें होने वाले कार्यक्रम में भाग लेेंगे। देश के आजाद होने से वह खुश तो है लेकिन बढ़ते भ्रष्टाचार से उनका मन विचलित हो जाता है।

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उनका मानना है कि लोगों में संस्कारों की कमी हो गई है। जिससे वह आजादी की कीमत नहीं समझ पा रहे।  अमर उजाला से विशेष बातचीत में कस्बे के भुवनेश्वर प्रसाद ने संस्मरण में बताया कि 24 दिसम्बर 1941 को देश की आजादी के लिए लड़ने पर  उन्हें जेल भेज दिया गया था।
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वे आठ माह तक जेल में रहे, साथ ही उन्हें 20 रूपये जुर्माना भी देना पड़ा। इसके बाद भारत छोड़ो आंदोलन में शामिल होने पर 1942 में वह छह माह जेल में रहे। स्वतंत्रा सेनानी ने कहा कि देश तो आजाद हो गया लेकिन अब लोगों में अनुशासन नहीं रह गया है। देश के नेता दोहरे चरित्र के हो गये है। एक पार्टी में शामिल होने के लिए पार्टी के मुखिया का गुणगान करते है, और छोड़ने पर उसकी बुराई करते है।

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