{"_id":"5cdefe32bdec2207710357dc","slug":"stir-in-five-mill-sees-crusher-town","type":"story","status":"publish","title_hn":"पांच मिल सीज, क्रशर नगरी में हड़कंप","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम","slug":"crime"}}
पांच मिल सीज, क्रशर नगरी में हड़कंप
Sat, 18 May 2019 12:02 AM IST
प्रभापुंज मिश्रा
chitrakoot
chitrakoot
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Sat, 18 May 2019 12:02 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
चित्रकूट/भरतकूप। भरतकूप क्षेत्र में क्रशर मशीनों पर पर्यावरण और खनिज विभाग की टीम ने बड़ी कार्यवाही की है। एनजीटी नियमों को ताक पर रखकर चल रहे पांच मशीनों के सीज की कार्यवाही से क्रशर संचालकों में हड़कंप मचा है।
शुक्रवार की दोपहर बाद प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की टीम के साथ एडीएम जीपी सिंह , सदर एसडीएम इंदुप्रकाश व जिला खनिज अधिकारी मिथलेश कुमार पांडेय की टीम ने क्रशर मिलों पर छापेमारी की। इस कार्यवाही के शुरू होते ही पूरे मिलों में हड़कंप मच गया। कुछ मिलों की मशीनें बंद हो गई और मालिक व मजदूर भाग गए। जिला खनिज अधिकारी ने बताया कि अवैध रूप से चल रही क्रशर मशीनों की लगातार शिकायतें मिलने पर जिलाधिकारी विशाख जी ने जांच को टीम गठित की थी। जिस पर भरतकूप क्रशर मण्डी में छापामार अभियान चलाया गया। इस दौरान नियमों को दरकिनार कर अवैध रूप से चल रही महाकालेश्वर स्टोन मिल, हजरत निजामुद्दीन स्टोन मिल, प्रकाश ग्रेनाइट, संकट मोचन व कामतानाथ स्टोन मिल को सीज किया है। इस दौरान प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारी विजय कुमार मिश्रा व सदस्य राजकरन समेत सीओ सिटी रजनीश यादव आदि मौजूद रहे।
क्या हैं क्रशर मिल के लिए पर्यावरण के मानक
चित्रकूट। इसके पूर्व भी इसी क्षेत्र में पर्यावरण के नियमों की अनदेखी करने पर 23 क्रशर मिलों को सीज किया गया था। जिले के भरतकूप व शिवरामपुर क्षेत्र में 100 क्रशर मिल हैं जो पहाड़ों से आने वाले पत्थरों से गिट्टी बनाते हैं। इन मिलों में एक हजार से अधिक मजदूर काम करते हैं और आस पास के हजारों परिवार का भरण पोषण होता है। क्रशर मिल मालिक अधिक कमाई के चक्कर में पर्यावरण के नियमों की लगातार अनदेखी करते हैं जिससे इन क्रशर से निकलने वाली धूल आस पास के लोगाें को बीमार कर रही है। इस समय इस क्षेत्र में एक सैकड़ा से अधिक टीबी व श्वांस की बीमारी के मरीज हैं। इन्हीं शिकायतों को लेकर एनजीटी व प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की टीमों ने जांच पड़ताल कर कई क्रशर मिल मालिकों को नोटिस दी थी। जिला खनिज अधिकारी मिथलेश कुमार पांडेय ने बताया कि क्रशर मिल की स्थापना हाईवे से 500 मीटर दूर, आबादी से एक किमी दूर होना चाहिए। क्रशर मिल परिसर में समय समय पर पानी का छिड़काव और पेयजल समेत पानी की टंकी आदि होनी चाहिए। इसके अलावा मिल के बाहर व अंदर पेड़ पौधे और पूरी बाउंड्रीवाल भी होना चाहिए। इन्हीं नियमों की अनदेखी पर पांच क्रशर मिल मालिक को पहले नोटिस देकर एक माह के अंदर व्यवस्था दुरुस्त करने को कहा गया था लेकिन शुक्रवार को छापेमारी पर इन नियमों का पालन न होते पाये जाने पर पांच क्रशर सीज की गई हैं।
विज्ञापन
-------------------
विज्ञापन
शुक्रवार की दोपहर बाद प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की टीम के साथ एडीएम जीपी सिंह , सदर एसडीएम इंदुप्रकाश व जिला खनिज अधिकारी मिथलेश कुमार पांडेय की टीम ने क्रशर मिलों पर छापेमारी की। इस कार्यवाही के शुरू होते ही पूरे मिलों में हड़कंप मच गया। कुछ मिलों की मशीनें बंद हो गई और मालिक व मजदूर भाग गए। जिला खनिज अधिकारी ने बताया कि अवैध रूप से चल रही क्रशर मशीनों की लगातार शिकायतें मिलने पर जिलाधिकारी विशाख जी ने जांच को टीम गठित की थी। जिस पर भरतकूप क्रशर मण्डी में छापामार अभियान चलाया गया। इस दौरान नियमों को दरकिनार कर अवैध रूप से चल रही महाकालेश्वर स्टोन मिल, हजरत निजामुद्दीन स्टोन मिल, प्रकाश ग्रेनाइट, संकट मोचन व कामतानाथ स्टोन मिल को सीज किया है। इस दौरान प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारी विजय कुमार मिश्रा व सदस्य राजकरन समेत सीओ सिटी रजनीश यादव आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन
क्या हैं क्रशर मिल के लिए पर्यावरण के मानक
चित्रकूट। इसके पूर्व भी इसी क्षेत्र में पर्यावरण के नियमों की अनदेखी करने पर 23 क्रशर मिलों को सीज किया गया था। जिले के भरतकूप व शिवरामपुर क्षेत्र में 100 क्रशर मिल हैं जो पहाड़ों से आने वाले पत्थरों से गिट्टी बनाते हैं। इन मिलों में एक हजार से अधिक मजदूर काम करते हैं और आस पास के हजारों परिवार का भरण पोषण होता है। क्रशर मिल मालिक अधिक कमाई के चक्कर में पर्यावरण के नियमों की लगातार अनदेखी करते हैं जिससे इन क्रशर से निकलने वाली धूल आस पास के लोगाें को बीमार कर रही है। इस समय इस क्षेत्र में एक सैकड़ा से अधिक टीबी व श्वांस की बीमारी के मरीज हैं। इन्हीं शिकायतों को लेकर एनजीटी व प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की टीमों ने जांच पड़ताल कर कई क्रशर मिल मालिकों को नोटिस दी थी। जिला खनिज अधिकारी मिथलेश कुमार पांडेय ने बताया कि क्रशर मिल की स्थापना हाईवे से 500 मीटर दूर, आबादी से एक किमी दूर होना चाहिए। क्रशर मिल परिसर में समय समय पर पानी का छिड़काव और पेयजल समेत पानी की टंकी आदि होनी चाहिए। इसके अलावा मिल के बाहर व अंदर पेड़ पौधे और पूरी बाउंड्रीवाल भी होना चाहिए। इन्हीं नियमों की अनदेखी पर पांच क्रशर मिल मालिक को पहले नोटिस देकर एक माह के अंदर व्यवस्था दुरुस्त करने को कहा गया था लेकिन शुक्रवार को छापेमारी पर इन नियमों का पालन न होते पाये जाने पर पांच क्रशर सीज की गई हैं।
विज्ञापन
-------------------