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जंगल में पहुंचा तेंदुआ ग्रामीण भयभीत डकैत परेशान
चित्रकूट
Updated Sat, 01 Jul 2017 11:31 PM IST
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leopard attack
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अमर उजाला ब्यूरो
चित्रकूट। पाठा क्षेत्र के रानीपुर सेंचुरी में तेंदुआ को जब से छोड़ा गया गया है। जंगलों के आसपास बसे गांव के ग्रामीण इस बात से भयभीत है कि कहीं तेंदुआ बस्ती पर हमला न कर दे। जंगल में लकड़ी व अन्य सामग्री लेने जाने वाले भी भयभीत हैं। माना जा रहा कि इस इलाके में रहने वाले डाकू भी तेंदुए के आने की खबर से सहम गए हैं। उनको डर सता रहा कि वह लोग अब खुलकर जंगल में नहीं घूम सकते ।
गौरतलब है कि बांदा जिले के बबेरू क्षेत्र से तेंदुआ को ग्रामीणों पर हमला करते समय पकड़ा गया था। जहां दो ग्रामीण घायल भी हो गए थे।इसके बाद वन विभाग के अधिकारियों ने तेंदुए को जिले के मानिकपुर विकास खंड स्थित रानीपुर वन्य बिहार के सेंचुरी में छोड़ दिया है। जंगल में नया मेहमान आने की खुशी तो पर्यटकों व विभागीय अधिकारियों को है लेकिन जंगल के क्षेत्र में स्थित रानीपुर, गिदुरहा, आदि गांव के ग्रामीण इस बात से डरे हुए है कि तेेंदुआ उनके ऊपर हमला न बोल दे। तीन साल पूर्व इसी क्षेत्र से भाग कर आए तेंदुए ने बरगढ़ व आसपास के क्षेत्र में दो दिन तक दहशत फै लाई थी। वन विभाग का महकमा उसे पकड़ने के लिए दिन रात प्रयास कर रहा था। अचानक तेंदुआ सूखे कुएं में गिर गया था। इसके बाद सभी ने राहत की सांस ली और वन विभाग के कर्मचारियों ने उसे निकालकर जंगल में छोड़ा था। एक बार शहर के अंदर जंगल से बारह सिंघा बल्दाऊ गंज में घुसा था।
उधर तेंदुए के जंगल में आने से डाकू गैंग के सदस्यों के लिए भी नया खतरा बढ़ गया है। जंगल में डाकू बबुली,गोप्पा सहित कई गैंग विचरण करते रहते हैं। उन्हें डर सता रहा है कि जंगल में स्वच्छत विचरण करना खतरे सेे अब खाली नहीं रह गया है। गौरतलब है कि डाकू ठोकिया व बलखडिया गैंग के सक्रिय सदस्य रहे 50 हजार के इनामी डाकू चुन्नी पटेल को जंगली जानवरों ने हमला कर घायल कर दिया था। इसके बाद से चुननी पटेल गैंग से अलग रहकर भरतकूूप क्षेत्र में आकर इलाज कराता रहा। नम्बर 2016 में मप्र पुलिस ने घेराबंदी कर उसे मार गिराया था। उस दौरान तत्कालीन सतना पुलिस अधीक्षक संजय कुमार सिंह ने पत्रकारों से बताया था कि डकैत चुन्नी के पैर व जांघ को जंगली जानवरों ने उसे घायल कर दिया था। जिससे वह भागने की स्थिति में नहीं था। पूरे मामले में पुलिस अधीक्षक प्रताप गोपेंद्र सिंह व रानीपुर सेंचुरी के क्षेत्राधिकारी त्रिवेणी प्रसाद का मानना है कि जंगली जानवरों से खतरा तो रहता है लेकिन डाकू असलहों और समूह में होने के कारण इनसे बच जाते हैं। आम जनमानस जरूर कई बार जंगल में इन जानवरों का शिकार बन चुके हैं।
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चित्रकूट। पाठा क्षेत्र के रानीपुर सेंचुरी में तेंदुआ को जब से छोड़ा गया गया है। जंगलों के आसपास बसे गांव के ग्रामीण इस बात से भयभीत है कि कहीं तेंदुआ बस्ती पर हमला न कर दे। जंगल में लकड़ी व अन्य सामग्री लेने जाने वाले भी भयभीत हैं। माना जा रहा कि इस इलाके में रहने वाले डाकू भी तेंदुए के आने की खबर से सहम गए हैं। उनको डर सता रहा कि वह लोग अब खुलकर जंगल में नहीं घूम सकते ।
गौरतलब है कि बांदा जिले के बबेरू क्षेत्र से तेंदुआ को ग्रामीणों पर हमला करते समय पकड़ा गया था। जहां दो ग्रामीण घायल भी हो गए थे।इसके बाद वन विभाग के अधिकारियों ने तेंदुए को जिले के मानिकपुर विकास खंड स्थित रानीपुर वन्य बिहार के सेंचुरी में छोड़ दिया है। जंगल में नया मेहमान आने की खुशी तो पर्यटकों व विभागीय अधिकारियों को है लेकिन जंगल के क्षेत्र में स्थित रानीपुर, गिदुरहा, आदि गांव के ग्रामीण इस बात से डरे हुए है कि तेेंदुआ उनके ऊपर हमला न बोल दे। तीन साल पूर्व इसी क्षेत्र से भाग कर आए तेंदुए ने बरगढ़ व आसपास के क्षेत्र में दो दिन तक दहशत फै लाई थी। वन विभाग का महकमा उसे पकड़ने के लिए दिन रात प्रयास कर रहा था। अचानक तेंदुआ सूखे कुएं में गिर गया था। इसके बाद सभी ने राहत की सांस ली और वन विभाग के कर्मचारियों ने उसे निकालकर जंगल में छोड़ा था। एक बार शहर के अंदर जंगल से बारह सिंघा बल्दाऊ गंज में घुसा था।
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उधर तेंदुए के जंगल में आने से डाकू गैंग के सदस्यों के लिए भी नया खतरा बढ़ गया है। जंगल में डाकू बबुली,गोप्पा सहित कई गैंग विचरण करते रहते हैं। उन्हें डर सता रहा है कि जंगल में स्वच्छत विचरण करना खतरे सेे अब खाली नहीं रह गया है। गौरतलब है कि डाकू ठोकिया व बलखडिया गैंग के सक्रिय सदस्य रहे 50 हजार के इनामी डाकू चुन्नी पटेल को जंगली जानवरों ने हमला कर घायल कर दिया था। इसके बाद से चुननी पटेल गैंग से अलग रहकर भरतकूूप क्षेत्र में आकर इलाज कराता रहा। नम्बर 2016 में मप्र पुलिस ने घेराबंदी कर उसे मार गिराया था। उस दौरान तत्कालीन सतना पुलिस अधीक्षक संजय कुमार सिंह ने पत्रकारों से बताया था कि डकैत चुन्नी के पैर व जांघ को जंगली जानवरों ने उसे घायल कर दिया था। जिससे वह भागने की स्थिति में नहीं था। पूरे मामले में पुलिस अधीक्षक प्रताप गोपेंद्र सिंह व रानीपुर सेंचुरी के क्षेत्राधिकारी त्रिवेणी प्रसाद का मानना है कि जंगली जानवरों से खतरा तो रहता है लेकिन डाकू असलहों और समूह में होने के कारण इनसे बच जाते हैं। आम जनमानस जरूर कई बार जंगल में इन जानवरों का शिकार बन चुके हैं।
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