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थोड़ा और वक्त मिलता तो दो चार मार गिराता

Thu, 02 Jul 2015 10:45 PM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, चित्रकूट।
ब्यूरो/ अमर उजाला, चित्रकूट। Updated Thu, 02 Jul 2015 10:45 PM IST
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Get a little more time to kill the four jeter

बलखड़िया गैंग से मुठभेड़ के दौरान घायल हुए जवानों में बलखड़िया को गोली

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से न उड़ा पाने की खीज दिखी। हालांकि उनके चेहरे पर मुठभेड़ का खौफ भी था और उसके बच जाने पर आक्रोश भी। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मानिकपुर से जिला अस्पताल लाए गए तीनों जवानों ने आपबीती सुनाई।

बताया कि जंगल में बड़ी बड़ी झाड़ियां न होतीं तो उनका बचना मुश्किल था। अस्पताल में भर्ती जिला गाजीपुर निवासी कैलाश यादव पुत्र इंद्रदेव यादव के दाएं कंधे में गोली लगी है।

उन्होंने बताया कि वह गुरुवार की दोपहर डेढ़ से दो बजे के बीच मारकुंडी थाने से एसओ श्रवण कुमार सिंह के साथ जीप में कांबिंग के लिए बंधा भीतर कोलान के पास जंगल में निकले थे।

साथ में जीप चालक सुंदर यादव पुत्र रामकरण निवासी छेरिहा खुर्द और पुष्पेंद्र कुमार पुत्र मइयादीन निवासी देवगनपुरा पनवाड़ी (महोबा) और एक अन्य सिपाही धीरेंद्र भी थे। बताया कि रास्ते में मुखबिर से सूचना मिली कि बंधा भीतर कोलान के पास बलखड़िया गैंग है। इस पर जीप उसी तरफ मोड़ दी।

थाने से लगभग दो से ढाई किमी की दूरी पर मारकुंडी रेंज का गेस्ट हाउस है। उसके पीछे पहाड़ी पर कुछ लोगों को देखा गया। पहले तो उन लोगों को लकड़हारा समझा और ध्यान नहीं दिया। तभी एहतियात बरतते हुए सभी लोग जीप से नीचे उतरे।

कैलाश ने बताया कि अचानक उन्हें लगा कि एक के हाथ में राइफल है। धीरे से सभी से पोजीशन लेने को कहा। वे लोग पोजीशन ले ही रहे थे कि उधर से ताबड़तोड़ फायरिंग होने लगी। इधर पुलिस की ओर से भी जवाब में फायरिंग होने लगी।

लगभग दो मिनट की फायरिंग के बाद कैलाश ने कवर फायर खुद करने की बात कही और बाकी से पीछे हटने और फायरिंग करते रहने के साथ एसपी को सूचना देने को कहा। इस बीच एक सिपाही की मैगजीन खाली हो गई और डकैत भारी पड़ने लगे।

तभी सूझबूझ का परिचय देते हुए सभी ने झाड़ियों के पीछे छिपकर उन पर नजर बनाए रखी। कैलाश ने बताया कि गोली न लगती और थोड़ा वक्त मिलता तो दो चार को वहीं गिरा देता।

मुठभेड़ में 54 वर्षीय कैलाश यादव हीरो बनके उभरे। उनकी बहादुरी की साथ के सिपाही भी सराहना कर रहे थे। कैलाश ने कवर फायर करते हुए चालक सुंदरलाल को गोली लगते देख उसे किनारे किया और जीप को तेजी से पीछे ले जाने को कहा।

उसे ताकीद की कि वह जीप मोड़ने की कोशिश न करे। जितना तेज हो सके पीछे ले जाए। साथ के जख्मी साथियों को भी इसमें बैठने को कहा। वह झाड़ियों में छिपकर भी मोर्चा संभाले रहे और पुलिस फोर्स के आने की प्रतीक्षा करते रहे।

झाड़ी से निकलते ही एक गोली उनके कंधे पर भी आ लगी। उन्होंने खुद को संभालते हुए पास के मंदिर में पहुंचकर एसओ से बात की।

एसओ ने बताया कि सुंदर और पुष्पेंद्र को भी गोली लगी है। बाद में वह प्राइवेट वाहन से थाने पहुंचे और इसके कुछ देर बाद ही एसपी फोर्स के साथ मौके पर पहुंच गए।

पुष्पेंद्र (26) के बाएं पैर में गोली लगी है। पैर में गोली लगने से वह काफी देर तक झाड़ियों में पड़ा रहा तो पुलिसवालों के मन में इसके सुरक्षित होने को लेकर आशंकाएं उभरने लगीं। हालांकि एक सिपाही ने इसकी कराह सुनी और जब इसका पता चला तो लोगों ने राहत की सांस ली।

उधर, जैसे ही तीनों घायल पुलिसकर्मी जिला अस्पताल पहुंचे और उनको भर्ती किया जाने लगा, तभी जिला अस्पताल के कर्मचारी भी हरकत में आ गए। सफाईकर्मी और वार्डब्वाय सफाई में जुट गए।

कोई पंखे का जाला छुड़ाने लगा तो कोई दीवारों के टाइल्स साफ करने लगा। कोई चादर बदलने में जुट गया। मतलब साफ था कि इनके मन में था कि अगर कोई बड़ा अधिकारी न आ जाए इन घायलों को देखने और क्लास लग जाए।

वार्डों में हालांकि कुछ लोग भर्ती थे और गंदगी पसरी थी, जिसे साफ किया जा रहा था।  इस संबंध में जब चिकित्साधीक्षक डा. पीडी चौधरी से बात की गई तो उन्होंने हां हां करके फोन काट दिया और फिर नॉट रीचेबल बताने लगा।


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