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भड़के ग्रामीण बोले बरगढ़ पुलिस की भूमिका संदिग्ध
Updated Thu, 19 Jul 2018 11:28 PM IST
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ग्रामीण बोले, बरगढ़ पुलिस की भूमिका संदिग्ध
अमर उजाला फालोअप
चित्रकूट/मऊ। बरगढ़ थाने के पास डंपर-टेंपो की टक्कर में सात छात्राओं समेत नौ लोगों की मौत के बाद हाईवे पर जाम लगाने वालों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज होने पर ग्रामीणों ने खासी नाराजगी जताई है। ग्रामीण बोले कि पुलिस की ही गलती से बखेड़ा हुआ और उनके गांव की बेटियां चली गईं और अब उन्हीं के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करा दी गई है। पूरे मामले मेें ग्रामीणों ने बरगढ़ थानाध्यक्ष व पुलिस टीम की भूमिका पर गहरे सवाल उठाए हैं। आरोप लगाया कि यदि बरगढ़ थानाध्यक्ष चार शव न हटाते तो यह आंदोलन बड़ा नहीं होता।
बीते सोमवार कालेज से लौट रहीं छात्राओं से भरे टेंपो को बेकाबू डंपर ने सुचेता कालोनी के पास टक्कर मार दी थी। जिसमें बरगढ़ क्षेत्र की सात छात्राओं समेत टेंपो चालक और उसके दोस्त की मौत हो गई थी। इसके बाद हाईवे पर चार घंटे तक जाम लगा रहा। आक्रोशित ग्रामीणों ने सांसद विधायक, एसपी अपर एसपी व अन्य पुलिस अधिकारियों से गुस्सा जताया था जिससे सभी पीछे हट गए थे। बुधवार को बरगढ़ थाने में 18 नामजद व 50 अज्ञात के खिलाफ के खिलाफ हाईवे जाम लगाना, सरकारी काम में बाधा डालने और तोड़फोड़ की रिपोर्ट दर्ज की गई। इस रिपोर्ट में मृतक छात्रा के पिता समेत कई परिजनों के नाम शामिल हैं।
गुरुवार को इसकी जानकारी होते ही ग्रामीणों का गुस्सा पुलिस विभाग के खिलाफ बढ़ गया। नामजद भइयालाल, उमेश, इद्रंजीत, अनिल, सुनीता व रामकली आदि ने बताया कि पूरे मामले में बरगढ़ पुलिस जिम्मेदार है। खुलेआम परचून की दुकान में शराब बिकवाई जाती है। ओवरलोड वाहन दिनरात गुजरते हैं। टेंपो व अन्य यात्री वाहनों से पुलिस माहवारी वसूलती है। इस घटना के बाद बरगढ़ थानाध्यक्ष ने ही सबसे पहले आकर चार मृत छात्राओं के शव एक वाहन में रखवाकर गायब करा दिया। अन्य शव को भी उठाने का प्रयास किया गया लेकिन ग्रामीणों ने पुलिस को रोक लिया था। एक घंटे तक ग्रामीण पुलिस से चार शव के बारे में पूंछते रहे लेकिन थानाध्यक्ष ने कुछ नहीं बताया। शव गायब होने की आशंका पर ग्रामीणों का आक्रोश बढ़ गया।
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ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि जब पुलिस पर दबाव बनाकर चार लड़कियों के बारे में पूछा तो थानाध्यक्ष ने डांट कर भगाया जिससे ग्रामीण भड़क गए और जाम लगाने को मजबूर हुए। जाम के दौरान भी पुलिस टीम ने ग्रामीणों को बलपूर्वक हटाने का प्रयास किया। अब उनके ऊपर ही मुकदमा लिखा दिया गया है। जिसका हर संभव तरीके से विरोध किया जाएगा। भइयालाल ने कहा कि उसकी बेटी की मौत हुई और उसके खिलाफ रिपोर्ट लिखी गई। इसकी जांच होनी चाहिए। सभी ग्रामीणों ने बरगढ़ थानाध्यक्ष पर कार्रवाई की मांग की है। बताया कि एक दिन पहले ही चार्ज लेने वाले थानाध्यक्ष ने मामले को निपटाने की बजाए बढ़ाने का काम किया है। पुलिस अधीक्षक मनोज कुमार झा ने बताया कि इस मामले की जांच के आदेश पहले ही दिए जा चुके हैं। थाना पुलिस की भूमिक ा की भी जांच कराई जा रही है लेकिन कानून सबके लिए बराबर है। हाईवे पर जाम लगाकर तोड़फोड़ करना अपराध है। इसी आधार पर ही कार्रवाई की गई है लेकिन पुलिस की यदि लापरवाही है तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई होगी।
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चित्रकूट/मऊ। बरगढ़ थाने के पास डंपर-टेंपो की टक्कर में सात छात्राओं समेत नौ लोगों की मौत के बाद हाईवे पर जाम लगाने वालों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज होने पर ग्रामीणों ने खासी नाराजगी जताई है। ग्रामीण बोले कि पुलिस की ही गलती से बखेड़ा हुआ और उनके गांव की बेटियां चली गईं और अब उन्हीं के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करा दी गई है। पूरे मामले मेें ग्रामीणों ने बरगढ़ थानाध्यक्ष व पुलिस टीम की भूमिका पर गहरे सवाल उठाए हैं। आरोप लगाया कि यदि बरगढ़ थानाध्यक्ष चार शव न हटाते तो यह आंदोलन बड़ा नहीं होता।
बीते सोमवार कालेज से लौट रहीं छात्राओं से भरे टेंपो को बेकाबू डंपर ने सुचेता कालोनी के पास टक्कर मार दी थी। जिसमें बरगढ़ क्षेत्र की सात छात्राओं समेत टेंपो चालक और उसके दोस्त की मौत हो गई थी। इसके बाद हाईवे पर चार घंटे तक जाम लगा रहा। आक्रोशित ग्रामीणों ने सांसद विधायक, एसपी अपर एसपी व अन्य पुलिस अधिकारियों से गुस्सा जताया था जिससे सभी पीछे हट गए थे। बुधवार को बरगढ़ थाने में 18 नामजद व 50 अज्ञात के खिलाफ के खिलाफ हाईवे जाम लगाना, सरकारी काम में बाधा डालने और तोड़फोड़ की रिपोर्ट दर्ज की गई। इस रिपोर्ट में मृतक छात्रा के पिता समेत कई परिजनों के नाम शामिल हैं।
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गुरुवार को इसकी जानकारी होते ही ग्रामीणों का गुस्सा पुलिस विभाग के खिलाफ बढ़ गया। नामजद भइयालाल, उमेश, इद्रंजीत, अनिल, सुनीता व रामकली आदि ने बताया कि पूरे मामले में बरगढ़ पुलिस जिम्मेदार है। खुलेआम परचून की दुकान में शराब बिकवाई जाती है। ओवरलोड वाहन दिनरात गुजरते हैं। टेंपो व अन्य यात्री वाहनों से पुलिस माहवारी वसूलती है। इस घटना के बाद बरगढ़ थानाध्यक्ष ने ही सबसे पहले आकर चार मृत छात्राओं के शव एक वाहन में रखवाकर गायब करा दिया। अन्य शव को भी उठाने का प्रयास किया गया लेकिन ग्रामीणों ने पुलिस को रोक लिया था। एक घंटे तक ग्रामीण पुलिस से चार शव के बारे में पूंछते रहे लेकिन थानाध्यक्ष ने कुछ नहीं बताया। शव गायब होने की आशंका पर ग्रामीणों का आक्रोश बढ़ गया।
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ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि जब पुलिस पर दबाव बनाकर चार लड़कियों के बारे में पूछा तो थानाध्यक्ष ने डांट कर भगाया जिससे ग्रामीण भड़क गए और जाम लगाने को मजबूर हुए। जाम के दौरान भी पुलिस टीम ने ग्रामीणों को बलपूर्वक हटाने का प्रयास किया। अब उनके ऊपर ही मुकदमा लिखा दिया गया है। जिसका हर संभव तरीके से विरोध किया जाएगा। भइयालाल ने कहा कि उसकी बेटी की मौत हुई और उसके खिलाफ रिपोर्ट लिखी गई। इसकी जांच होनी चाहिए। सभी ग्रामीणों ने बरगढ़ थानाध्यक्ष पर कार्रवाई की मांग की है। बताया कि एक दिन पहले ही चार्ज लेने वाले थानाध्यक्ष ने मामले को निपटाने की बजाए बढ़ाने का काम किया है। पुलिस अधीक्षक मनोज कुमार झा ने बताया कि इस मामले की जांच के आदेश पहले ही दिए जा चुके हैं। थाना पुलिस की भूमिक ा की भी जांच कराई जा रही है लेकिन कानून सबके लिए बराबर है। हाईवे पर जाम लगाकर तोड़फोड़ करना अपराध है। इसी आधार पर ही कार्रवाई की गई है लेकिन पुलिस की यदि लापरवाही है तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई होगी।