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घनघोर जंगल में सीधी मुठभेड़ करना आसान नहीं
Updated Thu, 24 Aug 2017 11:47 PM IST
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घनघोर जंगलों में सीधी मुठभेड़ आसान नहीं
वारदात को अंजाम देकर पहाड़ पर चढ़ जाते हैं डकैत
अमर उजाला ब्यूरो
चित्रकूट।
मानिकपुर क्षेत्र के जंगलों में डकैतों से मुठभेड़ पुलिस के लिए आसान नहीं है। इस इलाके के 40 किलोमीटर के दायरे में घनघोर जंगल हैं। मिर्जापुर विंध्य पर्वत की पहाड़िया भी लगी हैं। इसी कारण जंगल डाक ुओं के लिए मुफीद स्थान रहा है। एमपी की सीमा लगी होने का भी डाकू फायदा उठाते हैं।
जंगल में बसे अधिकतर गांव पहाड़ों के नीचे बसे हैं। डाकू गांवों में वारदात कर पहाड़ों पर चढ़ जाते हैं। डकैतों की सूचना मिलने पर पुलिस को घनघोर जंगल से होकर गुजरना पड़ता है। गांव पहुंचते ही डाकू जंगल से भागकर पहाड़ों पर चढ़ जाते हैं। मानिकपुर क्षेत्र के जंगल से भरतकूप और एमपी के भी जंगल लगे हैं, जिनका दायरा लगभग 120 किलोमीटर हो जाता है। इस कारण आसानी से डाकू जंगल का सहारा लेकर भाग जाते हैं।
एडीजी बीएन सावंत, डीआईजी ज्ञानेश्वर तिवारी और एसपी प्रताप गोपेंद्र भी कई बार मान चुके हैं कि ऊंचे पहाड़ों और घनघोर जंगल के कारण अक्सर डाकू बच जाते हैं। घेराव के बाद भी पहाड़ के नीचे होने पर पुलिस को लौटना पड़ जाता है।
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वारदात को अंजाम देकर पहाड़ पर चढ़ जाते हैं डकैत
अमर उजाला ब्यूरो
चित्रकूट।
मानिकपुर क्षेत्र के जंगलों में डकैतों से मुठभेड़ पुलिस के लिए आसान नहीं है। इस इलाके के 40 किलोमीटर के दायरे में घनघोर जंगल हैं। मिर्जापुर विंध्य पर्वत की पहाड़िया भी लगी हैं। इसी कारण जंगल डाक ुओं के लिए मुफीद स्थान रहा है। एमपी की सीमा लगी होने का भी डाकू फायदा उठाते हैं।
जंगल में बसे अधिकतर गांव पहाड़ों के नीचे बसे हैं। डाकू गांवों में वारदात कर पहाड़ों पर चढ़ जाते हैं। डकैतों की सूचना मिलने पर पुलिस को घनघोर जंगल से होकर गुजरना पड़ता है। गांव पहुंचते ही डाकू जंगल से भागकर पहाड़ों पर चढ़ जाते हैं। मानिकपुर क्षेत्र के जंगल से भरतकूप और एमपी के भी जंगल लगे हैं, जिनका दायरा लगभग 120 किलोमीटर हो जाता है। इस कारण आसानी से डाकू जंगल का सहारा लेकर भाग जाते हैं।
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एडीजी बीएन सावंत, डीआईजी ज्ञानेश्वर तिवारी और एसपी प्रताप गोपेंद्र भी कई बार मान चुके हैं कि ऊंचे पहाड़ों और घनघोर जंगल के कारण अक्सर डाकू बच जाते हैं। घेराव के बाद भी पहाड़ के नीचे होने पर पुलिस को लौटना पड़ जाता है।
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