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चित्रकूट : राजस्थान से लौटे मजदूरों ने बताई पीड़ा, मांगी मदद
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फोटो- 9- कलक्ट्रेट परिसर में सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने कीमांग करते मजदूर। । संवाद
- फोटो : CHITRAKOOT
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चित्रकूट। राजस्थान में चार साल से ईंट भट्ठे में काम के नाम पर बंधक बने मजदूर वहां के प्रशासन की कार्रवाई में छूट तो गए, लेकिन अब पाई-पाई को मोहताज हो गए हैं। पीड़ित मजदूरों ने सोमवार को मुख्यालय आकर जिलाधिकारी से आर्थिक मदद व शासकीय योजनाओं का लाभ दिलाने की मांग की।
सोमवार को पहाड़ी ब्लाक के कपना गांव के मजदूर रमाशंकर, अनीता राजेश, सोना, सावित्री, बिट्टी, अशोक, राजू एक स्वयंसेवी संस्था के पदाधिकारियों के साथ बच्चों सहित मुख्यालय पहुंचे। डीएम को सौंपे पत्र में बताया कि चार साल से राजस्थान के सालरमाला में जोगनिया ब्रिक्स ईंट भट्ठा पर सुबह सात से रात दस बजे तक जबरन पथाई र्व इंट जराई का कार्य कराया जाता था। मना करने पर लात घूसों से पिटाई की जाती थी।
सात जुलाई को वहां के प्रशासन को फोन कर अवगत कराया। जिस पर प्रशासनिक अधिकारियों ने मुक्त कराकर रिपोर्ट दर्ज कराई और मुक्ति प्रमाण पत्र दिया गया। इस प्रकार वह अपने घरो को वापस हो सके। बताया कि अब उनके पास कोई आय का स्रोत नहीं है। आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर है। डीएम को सौंपे पत्र में मांग की है कि आर्थिक मदद दिलाते हुए शासन की योजनाओं का लाभ दिलाया जाए।
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सोमवार को पहाड़ी ब्लाक के कपना गांव के मजदूर रमाशंकर, अनीता राजेश, सोना, सावित्री, बिट्टी, अशोक, राजू एक स्वयंसेवी संस्था के पदाधिकारियों के साथ बच्चों सहित मुख्यालय पहुंचे। डीएम को सौंपे पत्र में बताया कि चार साल से राजस्थान के सालरमाला में जोगनिया ब्रिक्स ईंट भट्ठा पर सुबह सात से रात दस बजे तक जबरन पथाई र्व इंट जराई का कार्य कराया जाता था। मना करने पर लात घूसों से पिटाई की जाती थी।
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सात जुलाई को वहां के प्रशासन को फोन कर अवगत कराया। जिस पर प्रशासनिक अधिकारियों ने मुक्त कराकर रिपोर्ट दर्ज कराई और मुक्ति प्रमाण पत्र दिया गया। इस प्रकार वह अपने घरो को वापस हो सके। बताया कि अब उनके पास कोई आय का स्रोत नहीं है। आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर है। डीएम को सौंपे पत्र में मांग की है कि आर्थिक मदद दिलाते हुए शासन की योजनाओं का लाभ दिलाया जाए।
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