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स्टैंड में तीन माह से खड़ी प्राइवेट बसें
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फोटो-1- धर्मनगरी के प्रमोदवन अंतर्राज्यीय बस स्टैंड पर खडी बसें
- फोटो : CHITRAKUTT
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खोही (चित्रकूट)। कोरोना संक्रमण के चलते लॉकडाउन के बाद भले ही अब अनलॉक हो गया है, लेकिन धर्मनगरी के 75 बसों के संचालक व इससे जुडे़ कर्मचारी तीन महीने से घरों में बैठे हैं। इससे बस मालिकों, चालकों व परिचालकों के लगभग सवा दो सौ परिवार के सामने रोटी का संकट है। बीते तीन महीने में मध्य प्रदेश सरकार को लगभग 34 लाख रुपये के राजस्व का नुकसान हुआ है। इस व्यवसाय से जुडे़ परिवारों को फिलहाल कोई उम्मीद भी नहीं नजर आ रही है। अनलॉक में नई शर्तों व कोरोना संक्रमण का भय इन सबके काम में बाधा है।
मध्य प्रदेश के चित्रकूट में परिवहन विभाग की तरफ से बसों का संचालन नहीं होता है। यहां प्राइवेट बसों का संचालन होता है। जिले की सीमा से सटे मध्य प्रदेश के धर्मनगरी से लॉकडाउन के बाद तीन महीने से प्राइवेट बसों का संचालन पूरी तरह से बंद है। बस संचालकों का कहना है कि अनलॉक के दौरान सरकार ने नियम बना रखा है कि 20 से ज्यादा सवारियां एक बस में नहीं बैठाई जा सकती हैं। सरकार एक बस से 15 हजार रुपये महीने टैक्स के रूप में लेती है। 20 सवारियां बैठाने पर टैक्स के लिए धनराशि नहीं निकल सकती। सरकार राजस्व भी नहीं माफ कर रही है। इसकी वजह से वह लोग बसों का संचालन नहीं कर रहे हैं।
धर्मनगरी के जानकीकुंड क्षेत्र के प्रमोदवन अंतर्राज्यीय बस स्टैंड से सतना,छतरपुर, पन्ना,रीवा के लिए बसें चलती थी। कोरोना वायरस के कारण लॉकडॉउन हुआ है। तब से बसों का संचालन बंद है। मजबूरी में यात्री ऑटो व अन्य छोटे वाहनों को किराये पर लेकर सतना व अन्य स्थानों में जाने को मजबूर हैं।
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कामदगिरी बस सर्विस के संचालक राजेंद्र त्रिपाठी, बरौंध ट्रैवल्स के राघवेंद्र सिंह, कामदगिर ट्रैवल्स के केएसएल शर्मा ने बताया कि एक बस से 15 हजार रुपये महीने में सरकार राजस्व वसूलती है। कुल 75 बसें चलती है। इस हिसाब से सरकार को करीब सवा 11 लाख रुपये प्रतिमाह राजस्व मिलता है। सरकार के आदेश के अनुसार 20 सवारी बैठाकर बस चलाएंगे, तो टैक्स भी नहीं दे पाएंगे। ऐसे में बसों का संचालन ही नहीं किया जा रहा है। यदि सरकार पिछले तीन माह का टैक्स माफ कर दे, तो बसों का संचालन किया जाएगा।
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मध्य प्रदेश के चित्रकूट में परिवहन विभाग की तरफ से बसों का संचालन नहीं होता है। यहां प्राइवेट बसों का संचालन होता है। जिले की सीमा से सटे मध्य प्रदेश के धर्मनगरी से लॉकडाउन के बाद तीन महीने से प्राइवेट बसों का संचालन पूरी तरह से बंद है। बस संचालकों का कहना है कि अनलॉक के दौरान सरकार ने नियम बना रखा है कि 20 से ज्यादा सवारियां एक बस में नहीं बैठाई जा सकती हैं। सरकार एक बस से 15 हजार रुपये महीने टैक्स के रूप में लेती है। 20 सवारियां बैठाने पर टैक्स के लिए धनराशि नहीं निकल सकती। सरकार राजस्व भी नहीं माफ कर रही है। इसकी वजह से वह लोग बसों का संचालन नहीं कर रहे हैं।
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धर्मनगरी के जानकीकुंड क्षेत्र के प्रमोदवन अंतर्राज्यीय बस स्टैंड से सतना,छतरपुर, पन्ना,रीवा के लिए बसें चलती थी। कोरोना वायरस के कारण लॉकडॉउन हुआ है। तब से बसों का संचालन बंद है। मजबूरी में यात्री ऑटो व अन्य छोटे वाहनों को किराये पर लेकर सतना व अन्य स्थानों में जाने को मजबूर हैं।
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कामदगिरी बस सर्विस के संचालक राजेंद्र त्रिपाठी, बरौंध ट्रैवल्स के राघवेंद्र सिंह, कामदगिर ट्रैवल्स के केएसएल शर्मा ने बताया कि एक बस से 15 हजार रुपये महीने में सरकार राजस्व वसूलती है। कुल 75 बसें चलती है। इस हिसाब से सरकार को करीब सवा 11 लाख रुपये प्रतिमाह राजस्व मिलता है। सरकार के आदेश के अनुसार 20 सवारी बैठाकर बस चलाएंगे, तो टैक्स भी नहीं दे पाएंगे। ऐसे में बसों का संचालन ही नहीं किया जा रहा है। यदि सरकार पिछले तीन माह का टैक्स माफ कर दे, तो बसों का संचालन किया जाएगा।