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चित्रकूटःजच्चा बच्चा की सुरक्षा व परेशानी से बचने को संस्थागत प्रसव कराएं

Thu, 23 Jan 2020 11:12 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Thu, 23 Jan 2020 11:12 PM IST
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Chitrakoot: Make institutional deliveries to protect the child and avoid trouble
चित्रकूट। जच्चा और बच्चा को सुरक्षित रखने के साथ प्रसव के समय या प्रसव के बाद किसी भी जटिलता को आसानी से संभाला जा सकता है। यह तभी संभव है जब महिला का संस्थागत प्रसव कराया जाए। जच्चा-बच्चा की सुरक्षा के साथ प्रसूता को आर्थिक सहयोग भी मिलता है।
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प्रभारी सीएमओ डा. एबी कटियार ने बताया कि घर में प्रसव होने के बाद जच्चा या बच्चा को किसी प्रकार की परेशानी आने पर उन्हें अस्पताल लाना ही पड़ता है। इससे बचने के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और जिला अस्पताल में लाकर गर्भवती महिलाओं का प्रसव कराएं। स्वास्थ्य विभाग की कोशिश है कि ज्यादा से ज्यादा महिलाओं का संस्थागत प्रसव कराया जाए। इसके लिए आशा व एएनएम को लगाया गया है। कहा गया है कि जैसे ही पता चले कि कोई महिला गर्भवती है तो उसकी जांच कराकर टीके लगवाए और परिजनों को महिला का प्रसव सरकारी अस्पतालों में ही कराने के लिए प्रेरित करें। संस्थागत प्रसव कराने से शिशु एवं मृत्यु दर को न्यून कर सकते हैं। जच्चा और बच्चा की सुरक्षा के साथ प्रसूता को आर्थिक सहयोग भी दिया जाता है।
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अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी व नोडल आरसीएच डा. ध्रुव कुमार ने बताया कि सरकार द्वारा संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने के लिए जननी सुरक्षा योजना चल रही है। योजना का मूल मकसद संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देकर मातृ और शिशु मृत्यु दर को न्यून करना है। इस योजना के अंतर्गत सरकारी अस्पताल में प्रसव कराने पर प्रसूताओं को 1400 रुपये ग्रामीण क्षेत्र और 1000 रुपये शहरी क्षेत्र में आर्थिक सहयोग के रूप में दिये जाते हैं। मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डा. आरके गुप्ता ने बताया कि कुशल डॉक्टर व प्रशिक्षित स्टाफ की देखरेख में प्रसव होता है। किसी भी जटिल परिस्थिति से निपटने में आसानी रहती है। इसके साथ दवाइयों और उपकरणों की मौजूदगी बच्चे की जटिलता पर तुरंत चिकित्साय संक्रमण का खतरा नहीं रहता, खून की कमी पर पूर्ति। प्रसव बाद बच्चे को सांस नहीं आ रही या धीमी आ रही तो एसएनसीयू मे इलाज मिल सकता है।
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