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चेकडैम की दीवारों में पड़ी दरारें
अमर उजाला ब्यूरो चित्रकूट
Updated Sun, 30 Aug 2015 10:51 PM IST
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मानिकपुर विकास खंड के चुरेह केसरुवा मजरा हाता में वन विभाग द्वारा लाखों की लागत से बनाए गए चेकडैम की दीवारों में निर्माण के चार माह बाद ही दरारें पड़ने लगी हैं। ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने निर्माण के दौरान कई बार घटिया सामग्री प्रयोग करने की शिकायत की लेकिन ध्यान नहीं दिया गया। वहीं विभागीय अधिकारी मानकों में अनदेखी की बात नकार धूप की वजह से दरारें पड़ने की बात कह रहे हैं।
चुरेह केसरुवा मजरा हाता में वन विभाग द्वारा लुसना नाला का जल संचय करने के लिए चार माह पूर्व चार लाख की लागत से चेकडैम का निर्माण कराया गया था। चेकडैम निर्माण की जिम्मेदारी वन क्षेत्राधिकारी ब्रजभूषण शुक्ला को सौंपी गई थी। कार्य प्रभारी फारेस्ट गार्ड रामकिशोर को बनाया गया।
इसके निर्माण के दौरान ग्रामीणों ने मानक के अनुसार मसाला और ईंटा-गारा का प्रयोग न करने की शिकायत की थी। देशराज, कृष्णपाल, रामकिशोर, अजय सिंह आदि ने आरोप लगाया कि बियाबान जंगलों में बनाए जाने वाले इस तरह के चेकडैम का कोई मतलब नहीं है। कहा कि विभागीय लोग अपने ही लोगों को काम देकर बुंदेलखंड पैकेज के कामों को पलीता लगा रहे हैं।
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चेकडैम में दरारें पड़ गईं हैं, ऐसे में आशंका है कि ये चेकडैम बमुश्किल एक दो बारिश ही झेल सकेगा। कांग्रेसी नेता राजू खान, मुकेश अग्रहरि ने कहा कि इसकी शिकायत वे लोग मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर करेंगे। उन्होंने इसकी टीएसी जांच की मांग की है।
ये होता है उद्देश्य
चेकडैम निर्माण का उद्देश्य बारिश के पानी को बर्बाद होने से रोकना और भूजल स्तर को बढ़ाना होता है।
चेकडैम मानक के अनुसार ही बनाया गया है। कोई भी जांच की जा सकती है।
- रामकिशोर, चेकडैम कार्य प्रभारी
निर्माण मानक के अनुरूप किया गया है। दीवारों में जो प्लास्टर किया जाता है उनमें धूप के कारण दरारें पड़ जाती हैं। चेकडैम की गुणवत्ता खराब नहीं है। इस संबंध में किसी भी तरह का आरोप बेबुनियाद है।
- ब्रजभूषण शुक्ला, वन क्षेत्राधिकारी
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चुरेह केसरुवा मजरा हाता में वन विभाग द्वारा लुसना नाला का जल संचय करने के लिए चार माह पूर्व चार लाख की लागत से चेकडैम का निर्माण कराया गया था। चेकडैम निर्माण की जिम्मेदारी वन क्षेत्राधिकारी ब्रजभूषण शुक्ला को सौंपी गई थी। कार्य प्रभारी फारेस्ट गार्ड रामकिशोर को बनाया गया।
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इसके निर्माण के दौरान ग्रामीणों ने मानक के अनुसार मसाला और ईंटा-गारा का प्रयोग न करने की शिकायत की थी। देशराज, कृष्णपाल, रामकिशोर, अजय सिंह आदि ने आरोप लगाया कि बियाबान जंगलों में बनाए जाने वाले इस तरह के चेकडैम का कोई मतलब नहीं है। कहा कि विभागीय लोग अपने ही लोगों को काम देकर बुंदेलखंड पैकेज के कामों को पलीता लगा रहे हैं।
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चेकडैम में दरारें पड़ गईं हैं, ऐसे में आशंका है कि ये चेकडैम बमुश्किल एक दो बारिश ही झेल सकेगा। कांग्रेसी नेता राजू खान, मुकेश अग्रहरि ने कहा कि इसकी शिकायत वे लोग मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर करेंगे। उन्होंने इसकी टीएसी जांच की मांग की है।
ये होता है उद्देश्य
चेकडैम निर्माण का उद्देश्य बारिश के पानी को बर्बाद होने से रोकना और भूजल स्तर को बढ़ाना होता है।
चेकडैम मानक के अनुसार ही बनाया गया है। कोई भी जांच की जा सकती है।
- रामकिशोर, चेकडैम कार्य प्रभारी
निर्माण मानक के अनुरूप किया गया है। दीवारों में जो प्लास्टर किया जाता है उनमें धूप के कारण दरारें पड़ जाती हैं। चेकडैम की गुणवत्ता खराब नहीं है। इस संबंध में किसी भी तरह का आरोप बेबुनियाद है।
- ब्रजभूषण शुक्ला, वन क्षेत्राधिकारी