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बड़े पैमाने पर हो रही है जंगली जड़ीबूटियों की कालाबाजारी

Sun, 12 Sep 2021 11:17 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Sun, 12 Sep 2021 11:17 PM IST
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Black marketing of wild herbs is happening on a large scale
मानिकपुर के जंगल से जडी बूटी वाले पेड़ के पत्ते व टहनियों को ले जाता एक ट्राली चालक। संवाद - फोटो : CHITRAKOOT
मानिकपुर (चित्रकूट)। कस्बे में बड़े पैमाने पर जंगली जड़ी बूटियों की कालाबाजारी हो रही है। जड़ीबूटियों पर ज्यादा पैसा कमाने के चक्कर मे दुकानदार जहरीला चारा वनक्षेत्र व सेंचुरी एरिया में बड़े पैमाने पर फेनी, गुडमार पत्ती का अवैध रूप से कर रहे हैं। इस काम में वन विभाग व वन निगम के अधिकारी कर्मचारियों की मिली भगत का आरोप है।
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मानिकपुर कस्बा निवासी गुलाब पांडेय और रामकिशोर मिश्रा ने डीएम को लिखे पत्र में बताया कि मानिकपुर वन क्षेत्र से प्रतिवर्ष करोड़ों रुपये की जंगली जड़ी बूटियों की उपज होती है। जिसको खरीदने का जिम्मा शासन ने वन निगम को दिया है। आरोप है कि वन निगम खुद न खरीदकर सुविधा शुल्क लेकर अपने चहेते कुछ ठेकेदारों को जड़ी बूटी की खरीद करने की छूट देते हैं। इसके बाद ऐसे लोग वन निगम के अधिकारी व कर्मचारी से साठगांठ कर हर रोज ट्रकों से महानगरों में दवा कंपनियों को इसकी बिक्री कर रहे हैं।
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इस संबध में डीएफओ कैलाश प्रकाश ने बताया कि समय समय पर अभियान चलता है। जंगली जड़ी बूटी की खरीद फरोख्त में विभागीय अधिकारियों की मिली भगत नहीं है।
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