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आश्रम संचालक ने धोखाधड़ी कर लाखों की भूमि लिखाई
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चित्रकूट/मानिकपुर। रिटायर्ड सैनिक ने मानिकपुर तहसील क्षेत्र के ऐंचवारा गांव की उनकी लाखों रुपये की कीमती भूमि को एक आश्रम संचालक द्वारा धोखाधड़ी कर लिखा लेने का आरोप लगाया है। इसकी शिकायत मुख्यमंत्री कार्यालय में की गई तो राजस्वकर्मी ने जांच भी की। मंगलवार को जांच रिपोर्ट में शिकायत वाली भूमि के नंबर को लेकर संदिग्धता जताई गई है। जिससे आश्रम की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं।
ऐंचवारा निवासी रिटायर्ड सैनिक राधेश्याम मिश्र पुत्र गिरजाशरण मिश्र ने बताया कि कई साल पहले गांव के पास ही संचालित एक प्रसिद्ध आश्रम के स्थानीय संचालक से मेलजोल होने के कारण धोखाधड़ी कर लगभग दो हेक्टेयर से अधिक की भूमि अपने आश्रम के नाम करा ली थी। कई साल बाद जब इसकी जानकारी हुई तो विरोध किया लेकिन कोई फर्क नहीं पड़ा। आरोप लगाया कि उनकीभूमि के नाम पर ही आश्रम संचालक ने पांच लाख रुपये का ऋण भी बैेंक से निकाला है। दोनों पक्षों के बीच मामला गर्माता रहा लेकिन कोई फैसला नहीं हो पाया।
शिकायतकर्ता ने 19 फरवरी को मुख्यमंत्री कार्यालय में आनलाइन शिकायत दर्ज कराई। जिस पर मानिकपुर तहसीलदार के पास जांच पहुंची तो उन्होंने राजस्वकर्मियों से जांच शुरू कराई। 25 फरवरी मंगलवार को कानूनगो व अन्य कर्मियों ने तहसीलदार को रिपोर्ट भेजी है। जिसमें संबधित भूमि के नंबर व उसके बगल की भूमि नंबर को लेकर बताया गया कि संदिग्धता का प्रतीक है। इस रिपोर्ट के बाद शिकायतकर्ता को बल मिलाहै। अब शिकायतकर्ता ने डीएम समेत आला अफसरों से मिलकर उनकी आश्रम से दिलाने की मांग की है। इस मामले में आश्रम संचालक से प्रयास के बाद भी संपर्क नहीं हो पाया है।
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ऐंचवारा निवासी रिटायर्ड सैनिक राधेश्याम मिश्र पुत्र गिरजाशरण मिश्र ने बताया कि कई साल पहले गांव के पास ही संचालित एक प्रसिद्ध आश्रम के स्थानीय संचालक से मेलजोल होने के कारण धोखाधड़ी कर लगभग दो हेक्टेयर से अधिक की भूमि अपने आश्रम के नाम करा ली थी। कई साल बाद जब इसकी जानकारी हुई तो विरोध किया लेकिन कोई फर्क नहीं पड़ा। आरोप लगाया कि उनकीभूमि के नाम पर ही आश्रम संचालक ने पांच लाख रुपये का ऋण भी बैेंक से निकाला है। दोनों पक्षों के बीच मामला गर्माता रहा लेकिन कोई फैसला नहीं हो पाया।
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शिकायतकर्ता ने 19 फरवरी को मुख्यमंत्री कार्यालय में आनलाइन शिकायत दर्ज कराई। जिस पर मानिकपुर तहसीलदार के पास जांच पहुंची तो उन्होंने राजस्वकर्मियों से जांच शुरू कराई। 25 फरवरी मंगलवार को कानूनगो व अन्य कर्मियों ने तहसीलदार को रिपोर्ट भेजी है। जिसमें संबधित भूमि के नंबर व उसके बगल की भूमि नंबर को लेकर बताया गया कि संदिग्धता का प्रतीक है। इस रिपोर्ट के बाद शिकायतकर्ता को बल मिलाहै। अब शिकायतकर्ता ने डीएम समेत आला अफसरों से मिलकर उनकी आश्रम से दिलाने की मांग की है। इस मामले में आश्रम संचालक से प्रयास के बाद भी संपर्क नहीं हो पाया है।
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