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जाडे़ के मौसम में शिकारी जंगलों में हो जाते सक्रिय
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चित्रकूट। जाडे़ में जंगलों में शिकारी ज्यादा शिकार करते है। छत्तीसगढ़ से लेकर महाराष्ट्र तक से शिकार करने के लिए शिकारी इस समय आते है। ये कुछ स्थानीय लोगों से मिलकर बिजली की तार बिछा देते हैं। इसके अलावा आग जलाकर भी जानवरों को मारने का कार्य किया जाता है।
इसी का परिणाम है कि चार दिन पहले जिले की सीमा से सटे एमपी क्षेत्र के चित्रकूट ब्लाक में करंट से तेंदुआ को शिकारियों ने मार दिया था। जिसको लेकर अब यूपी सहित एमपी के वन विभाग के अधिकारी अधिक सक्रिय हो गये है। इसके लिए मानिकपुर के रानीपुर वन्य विहार सहित मारकुंडी के रेंज में सर्चिंग अभियान चलाया। मध्य प्रदेश के इलाके भी लगातार सर्चिंग अभियान चलाया जा रहा है।
स्थानीय शिकारियों के तार छत्तीसगढ़ से लेकर महाराष्ट्र तक के शिकारियों से जुडे़ हुए है। यही कारण रहा है कि बडे़ जानवरों को शिकार स्थानीय शिकारी उनसे मिलकर करते रहे है। इसके बाद निकलने वाली खाल सहित हड्डियों को बेचने का कार्य किया जाता है। पिछले साल भी जाड़े के मौसम में शिकार किए गए थे, जिसको देखते हुए वन विभाग की टीम सक्रिय हो गई है। हालांकि बाहरी शिकारी अभी तक वन विभाग के हाथों पकड़े नहीं जा सके हैं। मारकुंडी रेंज के वन क्षेत्राधिकारी त्रिभुवन सिंह के नेतृत्व मेें टीम मऊ, सकौराहा, रानीपुर ऐहाला नगार के जंगलों में सर्चिंग अभियान चलाया। रेंज ने बताया कि यह अभियान पूरे माह तक चलेगा।
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इसी का परिणाम है कि चार दिन पहले जिले की सीमा से सटे एमपी क्षेत्र के चित्रकूट ब्लाक में करंट से तेंदुआ को शिकारियों ने मार दिया था। जिसको लेकर अब यूपी सहित एमपी के वन विभाग के अधिकारी अधिक सक्रिय हो गये है। इसके लिए मानिकपुर के रानीपुर वन्य विहार सहित मारकुंडी के रेंज में सर्चिंग अभियान चलाया। मध्य प्रदेश के इलाके भी लगातार सर्चिंग अभियान चलाया जा रहा है।
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स्थानीय शिकारियों के तार छत्तीसगढ़ से लेकर महाराष्ट्र तक के शिकारियों से जुडे़ हुए है। यही कारण रहा है कि बडे़ जानवरों को शिकार स्थानीय शिकारी उनसे मिलकर करते रहे है। इसके बाद निकलने वाली खाल सहित हड्डियों को बेचने का कार्य किया जाता है। पिछले साल भी जाड़े के मौसम में शिकार किए गए थे, जिसको देखते हुए वन विभाग की टीम सक्रिय हो गई है। हालांकि बाहरी शिकारी अभी तक वन विभाग के हाथों पकड़े नहीं जा सके हैं। मारकुंडी रेंज के वन क्षेत्राधिकारी त्रिभुवन सिंह के नेतृत्व मेें टीम मऊ, सकौराहा, रानीपुर ऐहाला नगार के जंगलों में सर्चिंग अभियान चलाया। रेंज ने बताया कि यह अभियान पूरे माह तक चलेगा।
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