फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Chitrakoot News ›   Accused's anticipatory bail application disposed of.

Chitrakoot News: आरोपी की अग्रिम जमानत अर्जी निस्तारित

Fri, 02 Oct 2026 10:45 PM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, चित्रकूट
संवाद न्यूज एजेंसी, चित्रकूट Updated Fri, 02 Oct 2026 10:45 PM IST
विज्ञापन
Accused's anticipatory bail application disposed of.
चित्रकूट। टेलीग्राम पर बाल यौन शोषण सामग्री बेचने के सनसनीखेज मामले में विशेष पॉक्सो अदालत ने अहम आदेश दिया है।
विज्ञापन

विशेष न्यायाधीश/अपर सत्र न्यायाधीश रेनू मिश्रा की अदालत ने आरोपी सौरभ मिश्रा की अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई कर निस्तारित कर दिया है। अदालत ने पाया कि इस स्तर पर आरोपी की गिरफ्तारी की कोई आशंका नहीं है।
थाना साइबर क्राइम चित्रकूट में बाल शोषण और दुर्व्यवहार की सामग्री बेचने के मामले में प्राथमिकी दर्ज की गई थी। निरीक्षक इंद्रल यादव ने तहरीर दी थी कि साइबर मुख्यालय से आए पत्र हवाला देते हुए जिक्र किया था कि टेलीग्राम प्रोफाइल सौरभ मिश्रा, यूजर आई 1030200426 से बाल शोषण की नई सामग्री बेची जा रही है।
विज्ञापन

जांच में क्यूआर कोड और मोबाइल नंबर का लिंक पुरानी बाजार, भैरोगंज कर्वी निवासी सौरभ मिश्रा से जुड़ा है। इस प्रकरण में आरोपी के अधिवक्ता ने कोर्ट में अग्रिम जमानत अर्जी डाली थी। सुनवाई में बचाव पक्ष ने कहा कि आरोपी सौरभ निर्दोष है, उसका कोई आपराधिक इतिहास नहीं है।
विज्ञापन
विज्ञापन

उसका संबंधित टेलीग्राम आईडी से कोई लेना-देना नहीं है। किसी साइबर हैकर ने उसका नाम-पता इस्तेमाल करके अपराध किया है। पुलिस ने बाहर नौकरी करने के दौरान उसके घर आकर मोबाइल-लैपटॉप उठा लिए, लेकिन कोई जब्ती मेमो नहीं दिया, गवाहों के हस्ताक्षर नहीं कराए।
प्रारंभिक साइबर एक्सपर्ट जांच में डिवाइस में कुछ भी आपत्तिजनक नहीं मिला। क्यूआर कोड जिस यूनियन बैंक खाते से लिंक है, वह खाता ही उसका नहीं है। पुलिस ने 12 सितंबर 2026 को धारा 35(3) बीएनएसएस का नोटिस दिया है, जिसका वह पालन कर रहा है, इसलिए उसे फर्जी केस में न फंसाया जाए।

अदालत ने कहा कि मामला चाइल्ड पोर्नोग्राफी जैसा गंभीर है और स्पेशल जांच बाकी है लेकिन आरोपी बीएनएसएस 35(3) के नोटिस का पालन कर रहा है, कस्टोडियल पूछताछ की जरूरत नहीं है। जांच जारी है और अपराध सात साल से अधिक सजा वाला नहीं है। ऐसी स्थिति में धारा 482 बीएनएसएस के तहत गिरफ्तारी की युक्तियुक्त आशंका नहीं बनती है। इसलिए अग्रिम जमानत याचिका निस्तारित की जाती है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed