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प्रदूषित हो रही धर्मनगरी, आओ मिलकर बचाएं : गुंजन

Fri, 04 Jun 2021 10:58 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Fri, 04 Jun 2021 10:58 PM IST
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aao milker bachyee gunjan
aao milker bachyee gunjan - फोटो : CHITRAKUTT
चित्रकूट। मानकों को ताक पर रख हो रहे खनन, भूजल दोहन पर्यावरण प्रदूषण की प्रमुख समय है। इससे जंगली जीव जंतु और मानव दोनों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। विश्व पर्यावरण दिवस पर हम सभी को एकजुट होकर पर्यावरण से बचाव का संकल्प लेना होगा। हमें भावी पीढ़ी को हरियाली की धरोहर देना होगा। यह बात पर्यावरणविद् गुंजन मिश्रा ने प्रदूषण पर चिंता जताते हुए कही।
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इस कोरोना काल में वर्ष विश्व पर्यावरण दिवस 2021 का विषय पारिस्थितिकी तंत्र की बहाली है। इस थीम के अंतर्गत पेड़ उगाना शहर को हरा भरा करना नदियों की सफाई करना आदि शामिल है। आक्सीजन से लेकर जीवन मौत के बीच जूझते लोगोें के लिए पर्यावरण के साथ खिलवाड़ एक मुख्य कारण भी सामने आया है। लाखों लोगों की आस्था का केंद्र और चित्रकूट धर्मनगरी की जीवनदायिनी मंदाकिनी नदी का हाल भी इसी क्रम में शामिल है। इसके अलावा पहाड़ों व नदियों में मानक को ताक पर रखकर दिन रात खनन, भूजल दोहन और वायु प्रदुषण पर भी नियंत्रण नहीं होने से चिंता बढ़ी है।
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पर्यावरणविद गुंजन मिश्रा के अनुसार चित्रकूट के जंगल में आग, खनन, नदियों, भूमिगत, जल व वायु प्रदूषण आदि पर्यावरणीय समस्याएं है। चित्रकूट में प्रत्येक वर्ष जंगलों में आग लगती है। जिससे जंगली पशुओं व पक्षियों के आवास आग से नष्ट हो जाते है एवं जानवरों का चारा भी नष्ट हो जाता है। आग से तेंदु पत्ता, चिरोंजी, औषधीय पेड़-पौधों व जलाऊ लकड़ी से जुड़ी होती है, वो भी प्रभावित होते है। चित्रकूट में बालू, कंकड़ ग्रेनाइट व सैंड पत्थर के खनन के कारण 200 से 300 फीट नीचे तक खोद दिया गया है। जिससे भूमिगत जल का स्तर भी प्रभावित होता है। बताते है कि औसतन एक ब्लास्ट में 6000 लीटर कार्बन मोनो ऑक्साइड व 2400 लीटर नाइट्रस ऑक्साइड निकलती है। इससे पर्यावरण प्रदूषित होता है।
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चित्रकूट में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन भी एक बहुत बड़ी पर्यावरण समस्या है क्योंकि इसके लिए कोई भी जगह निर्धारित नहीं की गयी है। जैव चिकित्सा अपशिष्ट की श्रेणी के अनुसार पीला, लाल, नीला, सफेद और काला रंग के बैग में निर्धारित किये गए है लेकिन इस नियम का पालन भी अस्पतालों में नहीं दिखाई देता है।

कर्वी और रामनगर ब्लाक क्रिटिकल और सेमी क्त्रिस्टिकल श्रेणी में आ चुके हैं। भरतकूप में स्टोन क्त्रस्शर के कारण कणिका तत्व जिनका आकार 10 माइक्त्रसे मीटर होता है वातावरण में उनकी उपस्थिति सर्दियों में केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के मानकों से 20 गुना एवं गर्मियों में 10 गुना ज्यादा मापी गई है।
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