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मऊ इलाके में पानी को लेकर मारामारी
Chitrakoot
Updated Sun, 01 Jun 2014 05:36 AM IST
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मऊ (चित्रकूट)। ब्लाक क्षेत्र की जनता तो जनता मवेशियों तक को पीने का पानी नहीं नसीब हो रहा है। एक दर्जन गांवों में लगे हैंडपंपों की हालत ऐसी है कि दो बाल्टी पानी निकालने के बाद कीचड़ आने लगता है। इलाके की नहरें और तालाब सूख गए है। प्यास से व्याकुल मवेशी मारे-मारे फिर रहे हैं।
मऊ क्षेत्र दर्जन भर से अधिक गांवों में पानी की भीषण किल्लत है। चकौर गांव की प्रधान यशोदिया देवी ने बताया गांव में लगे हैंडपंप दस बाल्टी निकालने के बाद ही बेकार हो जाते है। उसके बाद कीचड़ और बदबूदार पानी आने लगता है। गांव के लोग साइकिल, ठेला आदि पर डिब्बे लादकर दूर दराज क्षेत्रों से पीने का पानी भरकर लाते हैं। इतना ही नहीं पानी भरने के लिए हैंडपंपों पर लाइन लगानी पड़ती है। ग्रामीणों के अनुसार सिलौटा पंप कैनाल कई माह से सूखी पड़ी है, जिससे नहर में पानी नहीं है। पिछले सीजन में भी बिजली की समस्या के चलते पंप से लोगों को पानी नहीं मिला था। यही हालात इस गर्मी में भी हैं। नहरें सूखी होने से जानवर भी बेहाल है। पशुपालकों को खुद के पेयजल के साथ जानवरों के लिए भी हैंडपंपाें से पानी भरकर लाना पड़ता है। मऊ की तरह ही बरगढ़ क्षेत्र के पतेरी, मड़हा, टिकहाई, खोहर, गाहुर, दुबी, रैपुरा, कटईयाडाड़ी, लपाव, पुनिया, मटियार, मनका आदि गांवों में भी पेयजल समस्या है। क्षेत्र के बबलू शुक्ला, रमाशंकर के अनुसार बिजली की समस्या के साथ ही पानी की दिक्कत है। सप्लाई का पानी तो मिलता नहीं है और गर्मी के कारण जलस्तर भी नीचे चला गया है, जिससे हैंडपंप भी दगा दे गए है। दो बाल्टी पानी के बाद ही कीचड़ वाला पानी आने लगता है। महादेव, रामकृष्ण, ननकू के अनुसार बेजुबान मवेशी भी पानी से बेहाल है।
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मऊ क्षेत्र दर्जन भर से अधिक गांवों में पानी की भीषण किल्लत है। चकौर गांव की प्रधान यशोदिया देवी ने बताया गांव में लगे हैंडपंप दस बाल्टी निकालने के बाद ही बेकार हो जाते है। उसके बाद कीचड़ और बदबूदार पानी आने लगता है। गांव के लोग साइकिल, ठेला आदि पर डिब्बे लादकर दूर दराज क्षेत्रों से पीने का पानी भरकर लाते हैं। इतना ही नहीं पानी भरने के लिए हैंडपंपों पर लाइन लगानी पड़ती है। ग्रामीणों के अनुसार सिलौटा पंप कैनाल कई माह से सूखी पड़ी है, जिससे नहर में पानी नहीं है। पिछले सीजन में भी बिजली की समस्या के चलते पंप से लोगों को पानी नहीं मिला था। यही हालात इस गर्मी में भी हैं। नहरें सूखी होने से जानवर भी बेहाल है। पशुपालकों को खुद के पेयजल के साथ जानवरों के लिए भी हैंडपंपाें से पानी भरकर लाना पड़ता है। मऊ की तरह ही बरगढ़ क्षेत्र के पतेरी, मड़हा, टिकहाई, खोहर, गाहुर, दुबी, रैपुरा, कटईयाडाड़ी, लपाव, पुनिया, मटियार, मनका आदि गांवों में भी पेयजल समस्या है। क्षेत्र के बबलू शुक्ला, रमाशंकर के अनुसार बिजली की समस्या के साथ ही पानी की दिक्कत है। सप्लाई का पानी तो मिलता नहीं है और गर्मी के कारण जलस्तर भी नीचे चला गया है, जिससे हैंडपंप भी दगा दे गए है। दो बाल्टी पानी के बाद ही कीचड़ वाला पानी आने लगता है। महादेव, रामकृष्ण, ननकू के अनुसार बेजुबान मवेशी भी पानी से बेहाल है।
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