{"_id":"57532f1a4f1c1bf645108d71","slug":"wroship-for-long-life-of-her-husband","type":"story","status":"publish","title_hn":"वट वृक्ष की पूजा कर पति की दीर्घायु की कामना","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
वट वृक्ष की पूजा कर पति की दीर्घायु की कामना
ब्यूरो/ अमरउजाला, चंदौली
Updated Sun, 05 Jun 2016 01:12 AM IST
विज्ञापन
मुगलसराय के शाहकुटी स्थित काली मंदिर परिसर में वटवृक्ष की पूजा करतीं महिलाएं। अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पति के दीर्घायु की कामना को लेकर महिलाओं ने शनिवार को निराजल व्रत रहकर सावित्री की पूजा अर्चना की। इस दौरान वट वृक्ष के फेरे लगाए और पति के प्राणों की रक्षा की कामना की। विधिविधान से पूजा-अर्चना के बाद महिलाओं ने सावित्री द्वारा यमराज के हाथों पर पति सत्यवान के रक्षा की कथा सुनीं। इस मौके पर वट वृक्ष के नीचे दिन भर पूजन अर्चन का सिलसिला चलता रहा।
ज्येष्ठ मास के अमावस्या को वट सावित्री की पूजा की जाती है। शनिवार को उदया तिथि से चतुर्दशी तिथि थी लेकिन रविवार को अमावस्या तिथि की हानि थी। ऐसे में शनिवार को ही वटसावित्री की पूजा की गई। सुबह से ही पूजा की तैयारियां शुरू हो गई थी। सुबह दस बजकर 40 मिनट पर अमावस्या तिथि की शुरुआत होते ही महिलाएं सोलहो शृंगार कर वट वृक्ष के नीचे पहुंची।
यहां विधिपूर्वक मां सावित्री की पूजा अर्चना की। शृंगार वस्तुओं के अलावा फल, फूल, धूप, दीप और पंखा चढ़ाकर मां की पूजा की गई। बाद में वृट वृक्ष में कच्चे धागे के फेरे लगाए। इसके बाद सावित्री के यमराज के हाथों पति सत्यवान के प्राणों की रक्षा की कथा सुनी। इस दौरान महिलाओं ने अपने पति के दीर्घायु और आकाल मृत्यु से रक्षा की कामना की। बाद में आरती कर प्रसाद वितरित की और उसके बाद अन्न जल ग्रहण किया। नगर के आरपीएफ कालोनी, गया कालोनी, मानसनगर, काली महाल, शाहकुटी, रविनगर, कैलाशपुरी सहित अन्य मुहल्लों में वटवृक्ष के नीचे दिन भर पूजन-अर्चन का सिलसिला चलता रहा।
विज्ञापन
विज्ञापन
ज्येष्ठ मास के अमावस्या को वट सावित्री की पूजा की जाती है। शनिवार को उदया तिथि से चतुर्दशी तिथि थी लेकिन रविवार को अमावस्या तिथि की हानि थी। ऐसे में शनिवार को ही वटसावित्री की पूजा की गई। सुबह से ही पूजा की तैयारियां शुरू हो गई थी। सुबह दस बजकर 40 मिनट पर अमावस्या तिथि की शुरुआत होते ही महिलाएं सोलहो शृंगार कर वट वृक्ष के नीचे पहुंची।
विज्ञापन
यहां विधिपूर्वक मां सावित्री की पूजा अर्चना की। शृंगार वस्तुओं के अलावा फल, फूल, धूप, दीप और पंखा चढ़ाकर मां की पूजा की गई। बाद में वृट वृक्ष में कच्चे धागे के फेरे लगाए। इसके बाद सावित्री के यमराज के हाथों पति सत्यवान के प्राणों की रक्षा की कथा सुनी। इस दौरान महिलाओं ने अपने पति के दीर्घायु और आकाल मृत्यु से रक्षा की कामना की। बाद में आरती कर प्रसाद वितरित की और उसके बाद अन्न जल ग्रहण किया। नगर के आरपीएफ कालोनी, गया कालोनी, मानसनगर, काली महाल, शाहकुटी, रविनगर, कैलाशपुरी सहित अन्य मुहल्लों में वटवृक्ष के नीचे दिन भर पूजन-अर्चन का सिलसिला चलता रहा।
विज्ञापन